मिडिल ईस्ट जंग: ऑस्ट्रेलिया हिस्सा नहीं, फिर भी चुकानी पड़ रही भारी कीमत, जानें क्यों?

Australia Fuel Crisis: ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने बुधवार को देश के नाम संदेश में साफ कहा कि आने वाले महीने आसान नहीं होने वाले हैं. उन्होंने बताया कि मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में चल रही जंग की वजह से दुनिया भर में फ्यूल सप्लाई चेन बिगड़ गई है. हालांकि ऑस्ट्रेलिया इस जंग का हिस्सा नहीं है, लेकिन वहां की जनता को महंगे पेट्रोल और डीजल के रूप में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है.

Australia Fuel Crisis: पीएम ने कहा कि सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि देश को इस संकट के बुरे असर से बचाया जा सके. पीएम अल्बनीज ने बताया कि सोमवार को ही नेशनल कैबिनेट ने ‘नेशनल फ्यूल सिक्योरिटी प्लान’ को मंजूरी दे दी है.

इस प्लान के तहत सरकार, अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम करेगी ताकि अगर लंबे समय तक तेल की सप्लाई रुकी रहे, तो भी देश की गाड़ी चलती रहे. ऑस्ट्रेलियन डिपार्टमेंट ऑफ प्राइम मिनिस्टर एंड कैबिनेट के बयान के मुताबिक, यह प्लान पेट्रोल पंपों पर तेल की उपलब्धता और खासकर डीजल की सप्लाई पर नजर रखने का काम करेगा.

पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में बड़ी कटौती

महंगाई से राहत देने के लिए सरकार ने फ्यूल एक्साइज (तेल पर लगने वाला टैक्स) को आधा कर दिया है. इससे हर लीटर पेट्रोल पर करीब 26 सेंट की बचत होगी. यह कटौती अगले तीन महीनों तक लागू रहेगी. इसके अलावा ट्रक चलाने वालों के लिए ‘हेवी व्हीकल रोड यूजर चार्ज’ को घटाकर जीरो कर दिया गया है. सरकार की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा तेल का प्रोडक्शन देश के अंदर ही हो और उसे बाहर भेजने के बजाय देश की जरूरतों के लिए स्टॉक किया जाए.

तेल जमा न करने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की अपील

पीएम ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर पेट्रोल या डीजल का स्टॉक (होर्डिंग) न करें. उन्होंने कहा कि लोग अपनी जरूरत के हिसाब से ही तेल भरवाएं ताकि दूसरों को दिक्कत न हो. पीएम ने सुझाव दिया कि जो लोग ट्रेन, बस या ट्राम से सफर कर सकते हैं, वे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें. ऐसा करने से फ्यूल बचेगा और वह तेल उन किसानों, नर्सों, शिफ्ट वर्कर्स और ट्रक ड्राइवरों के काम आ सकेगा जिन्हें रोजाना गाड़ी चलाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है.

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आर्थिक झटकों के लिए रहें तैयार

अल्बनीज ने स्वीकार किया कि इस जंग ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इतिहास का सबसे बड़ा उछाल ला दिया है. इसका असर सिर्फ पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं है, बल्कि सुपरमार्केट के सामान और खेती पर भी पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि आने वाले ईस्टर के त्योहार को सामान्य तरीके से मनाएं, लेकिन फिजूलखर्ची से बचें. सरकार अपने पड़ोसी देशों और ट्रेडिंग पार्टनर्स के साथ बातचीत कर रही है ताकि देश में खाद और तेल की कमी न होने पाए.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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