कैमरे में कैद हुआ खौफनाक मंजर, जाम्बोये में खदान धंसने से 100 से ज्यादा लोगों की मौत

जाम्बोये में सोने की खदान में भूस्खलन के कारण भीषण हादसा हुआ. इस हादसे में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है.

अफ्रीकी देश सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक के जाम्बोये इलाके में मंगलवार (18 अगस्त) को सोने की खदान में हुए भीषण हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. बीबीसी के मुताबिक, अचानक हुए लैंडस्लाइड के कारण खदान का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर धंस गया, जिसके मलबे में कई मजदूर दब गए. इस दर्दनाक हादसे में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है.

जमीन धंसते ही मचा हड़कंप

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भूस्खलन होते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई. अचानक मलबा गिरने से लोग घबरा गए और सुरक्षित जगहों की ओर भागने लगे. हादसे की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग अपने परिजनों और परिचितों की तलाश में घटनास्थल पर पहुंच गए. मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और हर तरफ चीख-पुकार का माहौल बन गया. कई लोग अपनों के बारे में जानकारी लेने के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए.

मलबे में जिंदगी तलाश रहा रेस्क्यू अभियान

हादसे की सूचना मिलते ही राहत और बचाव एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं. मलबा हटाकर उसमें दबे लोगों को बाहर निकालने का काम तेजी से किया जा रहा है. बचावकर्मी लगातार खदान के अंदर और आसपास तलाश अभियान चला रहे हैं.

बढ़ सकता है मृतकों का आंकड़ा

अधिकारियों को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी कई लोग फंसे हो सकते हैं. ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. हादसे की वजह और नुकसान का पूरा आकलन राहत-बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही सामने आ सकेगा.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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