बदलता एशिया और भारत की नई कूटनीति -2: कहां चीन, कहां हम?

एशिया में अब सिर्फ भू-राजनीति ही नहीं, बल्कि सॉफ्ट पावर भी नीति-निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. एशियाई मामलों की विशेषज्ञ डॉ. अपर्णा चौधरी से विशेष बातचीत.

दुनिया की राजनीति का अगला निर्णायक अध्याय एशिया में लिखा जा रहा है.

चीन की आर्थिक और सैन्य ताकत, Indo-Pacific में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, दक्षिण एशिया में बदलते राजनीतिक समीकरण और तकनीक की बढ़ती भूमिका ने पूरे क्षेत्र की भू-राजनीति को बदल दिया है.

इस बदलते एशिया में भारत के सामने सवाल सिर्फ अपनी सुरक्षा का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय नेतृत्व, आर्थिक साझेदारी और वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करने का भी है.

ऐसे में Neighbourhood First और Act East Policy से लेकर Indo-Pacific तक भारत की रणनीति कितनी प्रभावी है? चीन की बढ़ती सक्रियता का भारत किस तरह जवाब दे सकता है? और नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका व मालदीव जैसे पड़ोसी देशों में बदलती राजनीति भारत के लिए क्या मायने रखती है?

इन तमाम सवालों पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य एवं एशियाई मामलों की विशेषज्ञ डॉ. अपर्णा चौधरी से विशेष बातचीत.

पार्ट 1 यहां पढ़ सकते हैं.

चीन–पाकिस्तान रणनीतिक साझेदारी (CPEC सहित) भारत की सुरक्षा और कूटनीति के लिए कितनी बड़ी चुनौती है?

CPEC को मात्र आर्थिक दृष्टि से व्याख्यायित करना एक रणनीतिक त्रुटि है. यह चीन की मंशा पर संदेह उत्पन्न करती है.

पाकिस्तान के द्वारा चीन का हाथ पकड़ना भारत के लिए एक बड़ा झटका है. इसे भारत की घेराबंदी के संदर्भ में देखना चाहिए. और इसके काउन्टर में भारत को अन्य प्रोजेक्ट लाने होंगे और उन पर उतनी ही तेजी से काम करना होगा जितना कि चीन कर रहा है.

भारत का multimodel कानेक्टिविटी प्रोजेक्ट अभी भी चीन को टक्कर दे पाने की स्थिति में नहीं है। हमे यह समझना होगा की केवल प्रोजेक्ट की घोषणा मात्र से कुछ नहीं होने वाला.

क्वाड (QUAD), ब्रिक्स (BRICS), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और BIMSTEC जैसे मंचों में भारत की समानांतर भागीदारी को आप किस प्रकार देखते हैं?

इन सभी क्षेत्रीय संगठनों में भारत की सहभागिता दो स्तरों पर देखी जानी चाहिए;

  • एक तो सम्मिलित रूप में सदस्य देशों के साथ व्यापार-वाणिज्य व सांस्कृतिक संबंधों का सुदृढ़ होना.
  • और दूसरा, द्विपक्षीय सहयोग हेतु ये संगठन एक प्लेटफॉर्म प्रदान करते हैं.
  • इसके साथ ही BRIC, SCO व BIMSTEC जैसे संगठनों को केवल आर्थिक संगठन के तौर पर श्रेणीबद्ध नहीं करना चाहिए क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों के मध्य कोई भी सम्बन्ध हो. उसके मूल में रणनीतिक सहभागिता ही होती है.

यह अवश्य है कि हर सागठन का अपना कार्य करने का तरीका है जैसे QUAD पूरे तरीके से रणनीतिक सहभागिता के लिए बनाया गया है तो इसकी कार्यशैली अलग है और जो आर्थिक संगठन हैं वो दूसरे तरीकों से रणनीतिक लक्ष्यों की पूर्ति करते हैं.

क्या भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) की नीति वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में प्रभावी बनी हुई है, या इसमें बदलाव की आवश्यकता है?

भारत की विदेश नीति कोई fixed entity नहीं, है बल्कि इसमें समय के साथ नए आयाम जुड़ते व घटते रहते हैं.

Act East Policy जो कि Look East Policy का ही बदल स्वरूप है, में आर्थिक, सांस्कृतिक व जुड़ाव के साथ-साथ रणनीतिक आयाम भी जोड़ा गया.

इस प्रकार के बदलाव भारत की strategic autonomy के लिए आवश्यक हैं. Make in India की बात की जाए तो यह रक्षा क्षेत्र में भारत को self-reliant बनाने की दिशा में लिया गया कदम है.

भारत की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार मार्गों और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का उसकी विदेश नीति पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?

Maritime security एक लंबे समय से भारत के लिए एक चुनौती रही है, किन्तु एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के दौर में यह अब उतना दुष्कर कार्य नहीं रहा है.

साथ ही समय-समय पर भारत अपनी Navy में submarines, satellite observation, mechanized boats आदि जोड़ता है, जो सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं.

दक्षिण एशिया में आतंकवाद, सीमा विवाद, साइबर सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसी गैर-पारंपरिक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को किन रणनीतियों पर अधिक ध्यान देना चाहिए?

गैर-पारंपरिक challenges राष्ट्र को आंतरिक रूप से खोखला कर रही हैं. राज्य का आधार ही इस बात पर टिका है कि यह अपने नागरिकों की सुरक्षा करेगा.

ऐसे मे आतंकवाद, सीमा विवाद, साइबर सुरक्षा, और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों से निपटने हेतु उचित तैयारी राज्य द्वारा की जानी चाहिए.

इनमें से साइबर सुरक्षा उतना पुराना मुद्दा नहीं है. एक लाइन में यदि कहा जाए तो मानव संसाधन का विकास और शिक्षा के स्तर को बढ़ते हुए तकनीक पर जोर देना, आवश्यक है.

आपके अनुसार अगले 10 वर्षों में एशिया की शक्ति-संरचना (Asian Balance of Power) कैसी होगी, और उसमें भारत की संभावित भूमिका क्या होगी?

भारत एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर रहा है और अगले दस वर्षों में यह अपनी शक्तियों को consolidate करते हुए एशियन पिवोट की भूमिका निभा पाने में सक्षम होगा.

इसके साथ ही न केवल एशिया बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत अपनी विस्तृत भूमिका विशेषकर मृदु शक्ति व सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से निरीयक रोल में होगा.

यदि आपको भारत सरकार को एशिया क्षेत्र में कूटनीतिक बढ़त बनाने के लिए तीन प्रमुख नीतिगत सुझाव देने हों, तो वे क्या होंगे?

  • पहला तो ये है कि commerce, culture व connectivity को बढ़ाने हेतु जितने भी माध्यम हैं, जिनमें सोशल मीडिया व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी शामिल हैं, उनका व्यापक स्तर पर उपयोग करना, जो भारत की मृदु शक्ति व सांस्कृतिक कूटनीति का आधार है.
  • दूसरा, दद्विपक्षीय सम्बन्ध सुदृढ़ करना, यह भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि को मजबूत और पुख्ता ढंग से रख पाने में सहायक होगा.
  • तीसरा, जिन एशियाई राष्ट्रों के साथ भारत के सीमा विवाद, जल विवाद, या अन्य विवाद हैं उन्हे बिना किसी बाह्य शक्ति को शामिल किए वार्ता के द्वारा समाधान करने का प्रयास करे.


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लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी (Achal Priyadarshy) अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, शिक्षाविद् और 32 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  4. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  5. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  6. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  7. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  8. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  9. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  10. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  11. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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