वाशिंगटन : अमेरिका का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र में समलैगिंक जीवन साथियों को लाभ देने के विरोध में भारत के मतदान से वह निराश है.
कार्नेगी एंडॉवमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में लोगों को संबोधित करते हुए भारत में अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा ने भारत और अमेरिका के बीच स्ट्रेटेजिक प्लस पार्टनरशिप के बारे में बातचीत की मगर साथ ही कहा कि यह आवश्यक नहीं कि दोनों देश हर मुद्दे पर एकमत हों.
उन्होंने कहा, उदाहरण के लिए इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों में समलैंगिक रिश्ते रखने वालों के लाभ छीनने के प्रस्ताव का भारत द्वारा समर्थन किए जाने से हम निराश हैं. उन्होंने कहा, हम भारत, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और पूरी दुनिया में एलजीबीटी समुदाय के अधिकारों का समर्थन करते रहेंगे.
संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों में शामिल समलैंगिक जोडों को मिलने वाले लाभ समाप्त करने के लिए रुस की ओर से लाए गए प्रस्ताव के पक्ष में भारत, चीन, मिस्र, ईरान, इराक, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब सहित 43 देशों ने विरोध किया था. लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा में 80 देशों के विरोध के कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका.
हालांकि नयी दिल्ली ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने सदस्य देशों से सलाह लिए बगैर ही तंत्र में मिलने वाले लाभों में बदलाव कर दिया था. नयी दिल्ली में अमेरिका के शीर्ष राजनयिक बनने से बाद अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम में वर्मा ने हालांकि भारत की तारीफ की.
