भारत में महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा को देखकर हम यह मान बैठते हैं कि सिर्फ हमारे देश में ही महिलाएं हिंसा की शिकार हैं, लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है.
स्वीडन से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो न सिर्फ चौंकाने वाला है, वरन मानवाधिकारों पर भी सवाल खड़े करता है. एक जांच में यह बात सामने आयी है कि एक स्कूल में 60 लोगों की योनि को काटा गया है.
इस प्रक्रिया को फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (एफजीएम) कहा जाता है.इस प्रक्रिया में 28 लड़कियों के साथ काफी बर्बर क्रिया की गयी, जिसमें क्लिटॉरिस को पूरी तरह काटकर वजाइना के छेद को सील दिया जाता है और बहुत थोड़ी सी जगह छोड़ी जाती है.
यह कुछ समुदायों की धार्मिक और सामाजिक परंपराओं का हिस्सा है. ऐसा लड़कियों को शादी के लिए तैयार करने जैसी मान्यताओं के कारण किया जाता है.एफजीएम के कई मानसिक और शारीरिक दुष्प्रभाव होते हैं। इनसे कई तरह का इंफेक्शन भी हो सकता है.
स्वीडन में इस प्रक्रिया को 1982 में पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया था, ऐसे में इस तरह की घटना का सामने आना कई सवाल खड़े करता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन का कहना है कि इस तरह की घटनाएं अन्य देशों में भी देखने को मिलती है,अफ्रीका और मध्य पूर्व के 29 देशों की 12.5 करोड़ महिलाएं एफजीएम से गुजर चुकी हैं.
