पाकिस्तान : सलमान तासीर के हत्यारे कादरी के जनाजे में उमड़ा समर्थकों का सैलाब

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर के हत्यारे मुमताज कादरी को सुपुर्द ए खाक करने के लिए सैकडों इस्लामियों के एकत्र होने के मद्देनजर आज पाकिस्तान में हाई अलर्ट रखा गया है. उदारवादी नेता एवं विवादास्पद ईश निन्दा कानूनों में सुधार की मांग करने वाले तासीर के हत्यारे कादरी को कल फांसी […]

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर के हत्यारे मुमताज कादरी को सुपुर्द ए खाक करने के लिए सैकडों इस्लामियों के एकत्र होने के मद्देनजर आज पाकिस्तान में हाई अलर्ट रखा गया है. उदारवादी नेता एवं विवादास्पद ईश निन्दा कानूनों में सुधार की मांग करने वाले तासीर के हत्यारे कादरी को कल फांसी दे दी गई थी.इस्लामाबाद और पास के रावलपिंडी शहर में महत्वपूर्ण स्थलों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं.

रावलपिंडी में कादरी के जनाजे का जुलूस निकलेगा.गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘पुलिस हाई अलर्ट पर है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं. किसी को भी कोई गड़बड़ी करने की इजाजत नहीं दी जाएगी.’ कादरी पुलिस कमांडो था और उसने 2011 में इस्लामाबाद के एक बाजार में दिनदहाडे तासीर की हत्या कर दी थी. उसने उन्हें 28 गोलियां मारी थीं.

उसे कल रावलपिंडी स्थित अडियाला जेल में फांसी दी गई थी जिसके विरोध में हजारों इस्लामियों ने प्रदर्शन करते हुए इसे ‘काला दिवस’ करार दिया था.कादरी के समर्थक उसे नायक के रुप में मान रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उसने मजहब की रक्षा के लिए तासीर की हत्या की थी.उसके समर्थकों ने सडकों को अवरुद्ध कर दिया और दुकानदारों को दुकान बंद करने पर विवश कर दिया. सबसे बडा प्रदर्शन कराची में हुआ जहां करीब आठ हजार लोग सडकों पर उतर आए.
फांसी के बाद कादरी का शव रावलपिंडी के सादिकाबाद में रहने वाले उसके परिवार को सौंप दिया गया था.कराची आधारित समूह पाकिस्तान सुन्नी तहरीक ने घोषणा की है कि वह कादरी के लिए रावलपिंडी के ऐतिहासिक लियाकत बाग ग्राउंड में जनाजे की नमाज अदा करेगा.
कादरी के समर्थकों की ओर से हिंसा की आशंका के चलते रावलपिंडी और इस्लामाबाद में ज्यादातर निजी स्कूल बंद रखे गए हैं.कादरी के हाथों मारे गए तासीर उस ईसाई महिला के समर्थन में आगे आए थे जिस पर ईशनिन्दा कानून के तहत आरोप लगाए गए थे. उन्होंने ईशनिन्दा कानून को ‘‘काला कानून’ करार दिया था, जिससे वह चरमपंथियों के निशाने पर आ गए थे.

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