सम्मान की सही परिभाषा पहले जान लें

।। दक्षा वैदकर।।... कई बार जब हमारा किसी से झगड़ा होता है, तो हम सामनेवाले से कहते हैं ‘‘मैंने तुमसे कोई बड़ी चीज थोड़े ही मांगी थी. सिर्फ सम्मान ही तो मांगा था. वो भी तुम नहीं दे सकते? ‘‘ हम सभी का यह मानना है कि किसी भी रिश्ते में सबसे छोटी चीज जो […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 28, 2013 5:23 AM

।। दक्षा वैदकर।।

कई बार जब हमारा किसी से झगड़ा होता है, तो हम सामनेवाले से कहते हैं ‘‘मैंने तुमसे कोई बड़ी चीज थोड़े ही मांगी थी. सिर्फ सम्मान ही तो मांगा था. वो भी तुम नहीं दे सकते? ‘‘ हम सभी का यह मानना है कि किसी भी रिश्ते में सबसे छोटी चीज जो हम मांग सकते हैं, वह सम्मान है. यानी सम्मान एक ऐसी चीज है, जो देना बहुत आसान है और हर कोई इसे दे सकता है. यहीं पर हम गलत हैं. दरअसल, हमें सम्मान की परिभाषा ही नहीं पता. हमें लगता है कि लोगों से हालचाल पूछना, किसी कार्य को करने के पहले उनकी इजाजत ले लेना, ‘‘आप ‘‘ कह कर बात करना ही सम्मान देना होता है. लेकिन यह गलत है. दरअसल, सम्मान देने का अर्थ है, सामनेवाले को नियंत्रित न करना, उसकी आलोचना न करना, उसके कामों में कमियां न निकालना, दोष न देना, पहले से कोई धारणा न बना लेना यानी सामनेवाले के हर काम व विचार का सम्मान करना.

अब आप इस नयी परिभाषा के मुताबिक खुद को परखें. आपको पता चलेगा कि आपके द्वारा सम्मान दिये जानेवाले लोगों की लिस्ट बहुत कम हो गयी है. ऐसा इसलिए क्योंकि हम अपने आसपास सभी को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं, उनके कामों में कमियां निकालते हैं और उन्हें गलत ठहराते हैं. हम एक तरह से यह कह देते हैं कि आप जो काम कर रहे हो, वह ठीक नहीं है. अगर आप ये काम करोगे, तो मैं आपका सम्मान नहीं करूंगा.

आपके साथ भी ऐसा कई बार हुआ होगा कि घर का कोई बड़ा आपको समझाता है कि फलां व्यक्ति का सम्मान करो और आप जवाब देते हैं कि उन्होंने मेरे साथ ऐसा-ऐसा किया था, इसलिए मैं उन्हें सम्मान नहीं दे सकता. आपके पास किसी को सम्मान न देने के भी कारण होते हैं. ठीक आपकी ही तरह सामनेवाले के पास भी आपको सम्मान न देने के कारण होते हैं. इसलिए इस बात का कभी बुरा न मानें कि सामनेवाले ने मुङो सम्मान नहीं दिया. किसी एक रिश्ते का साथ प्रयोग करें. एक दिन ऐसा पूरा गुजारें कि सामनेवाले ने भले ही कोई भी काम किया हो, उसके प्रति आप नकारात्मक ऊर्जा न उत्पन्न करें.

बात पते की..

कोई आपकी मर्जी के मुताबिक काम करे या न करे, आपको उस इनसान के प्रति केवल सकारात्मक विचार ही अपने दिमाग में लाने हैं. प्रैक्टिस करें.

लोग आपसे जैसा व्यवहार चाहते हैं, आप सभी के मुताबिक रख सकते हैं? नहीं न. तो आप सब के व्यवहार को सुधारना क्यों चाहते हैं.