इंजेक्शन द्वारा दवाई देना कब से शुरू हुआ ?
शरीर में चोट लगने पर दवाई सीधे लगाने की परंपरा तो काफी पुरानी है. शरीर में अफीम रगड़कर या किसी कटे हुए हिस्से में अफीम लगाकर शरीर को राहत मिल सकती है, ऐसा विचार 15वीं-16वीं सदी में बन गया था. अफीम से कई रोगों का इलाज किया जाने लगा, पर डॉक्टरों को लगता था कि […]
शरीर में चोट लगने पर दवाई सीधे लगाने की परंपरा तो काफी पुरानी है. शरीर में अफीम रगड़कर या किसी कटे हुए हिस्से में अफीम लगाकर शरीर को राहत मिल सकती है, ऐसा विचार 15वीं-16वीं सदी में बन गया था. अफीम से कई रोगों का इलाज किया जाने लगा, पर डॉक्टरों को लगता था कि इसे खिलाने से लत पड़ सकती है. इसलिए शरीर में प्रवेश का कोई तरीका खोजा जाये. स्थानीय एनिस्थीसिया के रूप में भी मॉर्फीन वगैरह का इस्तेमाल होने लगा था.
ऐसी सुई जिसके भीतर खोखला बना हो 16वीं-17वीं सदी से इस्तेमाल होने लगी थी. पर सबसे पहले सन 1851 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक चाल्र्स गैब्रियल प्रावाज ने हाइपोडर्मिक नीडल और सिरिंज का आविष्कार किया. इसमें महीन सुई और सिरिंज होती थी. तबसे इसमें तमाम तरह के सुधार हो चुके हैं.
