वॉशिंगटन : पाकिस्तान ने कहा कि वह पक्षपातपूर्ण परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं करेगा. विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी ने सुरक्षा, कूटनीतिक स्थिरता और अप्रसार के मुद्दों पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ आज हुई वार्ता में यह बात कही.
उन्होंने कहा, यह भेदभाव वाली संधि है. पाकिस्तान को अपनी रक्षा करने का अधिकार है इसलिए पाकिस्तान एनपीटी पर दस्तखत नहीं करेगा. अब तक कुल 190 देशों ने इस संधि पर दस्तखत कर दिए हैं जो 1970 में अस्तित्व में आई, लेकिन दक्षिण एशिया के दोनों परमाणु देशों भारत और पाकिस्तान ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
संधि पर दस्तखत करने से पाकिस्तान का बार-बार इंतजार करना अमेरिका द्वारा एनपीटी को बढावा देने की इच्छा के विपरीत है. लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इस पर और अन्य मुद्दों पर पाकिस्तान के रुख की सार्वजनिक निंदा नहीं की है.
चौधरी से जब पूछा गया कि परमाणु हथियारों को बचाने के लिए पाकिस्तान ने क्या कदम उठाए हैं तो उन्होंने कहा, हमने बहुस्तरीय प्रणाली बनाई है और मजबूत कमान एवं नियंत्रण प्रणाली का गठन किया है.
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वासन दिया कि पाकिस्तान विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखेगा लेकिन वह किसी के साथ हथियारों की दौड में शामिल नहीं है. चौधरी ने कहा कि कुछ समय के लिए भारत परंपरागत हथियारों को जखीरा बनाने पर काम कर रहा था.
पाकिस्तान के डॉन अखबार ने चौधरी के हवाले से कहा, पाकिस्तान अपनी तुलना भारत के साथ नहीं करना चाहता लेकिन हम संतुलन चाहते हैं. शांति को बढावा देने के लिए इस संतुलन की जरुरत है.
