सीरिया जा रहे ईरानी जहाज़ पर ब्रिटेन का कब्ज़ा, ईरानी नेता ने कहा 'जवाब देना आता है'

<figure> <img alt="जहाज़" src="https://c.files.bbci.co.uk/15D83/production/_107757498_64b4071c-b4a2-4d97-b12d-ace049b8489a.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><p>ईरान की शुरा समिति (संसद) के सेक्रेटरी मोहसिन रज़ाई ने कहा है कि अगर लंदन ईरान के चार जुलाई को पकड़े जाने वाले सुपर टैंकर को नहीं छोड़ता है तो तेहरान को भी एक ब्रिटेन का तेल टैंकर पकड़ लेना चाहिए.</p><p>मोहसिन रज़ाई ने पांच जुलाई को किए […]

<figure> <img alt="जहाज़" src="https://c.files.bbci.co.uk/15D83/production/_107757498_64b4071c-b4a2-4d97-b12d-ace049b8489a.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><p>ईरान की शुरा समिति (संसद) के सेक्रेटरी मोहसिन रज़ाई ने कहा है कि अगर लंदन ईरान के चार जुलाई को पकड़े जाने वाले सुपर टैंकर को नहीं छोड़ता है तो तेहरान को भी एक ब्रिटेन का तेल टैंकर पकड़ लेना चाहिए.</p><p>मोहसिन रज़ाई ने पांच जुलाई को किए एक ट्वीट में कहा कि ईरान ने ‘कभी कोई संघर्ष शुरू नहीं किया लेकिन उसे धौंस जमाने वालों को बग़ैर किसी झिझक के जवाब देना आता है.'</p><p>ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर ने कहा कि ब्रिटेन की ओर से ईरानी तेल टैंकर न छोड़े जाने की सूरत में ये संबंधित अधिकारी की ज़िम्मेदारी है कि वह जवाब दें और ब्रिटेन के तेल जहाज़ को पकड़ लें.</p><p>चार जुलाई को जिब्राल्टर में ब्रिटेन के रॉयल मरींस ने ग्रेस वन नाम के ईरानी सुपर टैंकर को क़ब्ज़े में ले लिया था. ब्रिटेन की नौसेना के मुताबिक़, उन्हें आशंका थी कि ये टैंकर दमिश्क (सीरिया) जा रहा है जो यूरोपीय यूनियन की पाबंदी के ख़िलाफ़ है.</p><p>इससे पहले ईरान ने तेल टैंकर को क़ब्ज़े में लिए जाने पर विरोध के लिए तेहरान में ब्रिटेन के राजदूत को तलब किया था.</p><p>ब्रिटेन की रॉयल मरींस फ़ोर्स ने जिब्राल्टर में अधिकारियों को ईरानी जहाज़ ज़ब्त करने में इसलिए मदद की क्योंकि उनके पास सबूत था कि जहाज़ यूरोपीय यूनियन की पाबंदियों का उल्लंघन करते हुए दमिश्क की ओर जा रहा था.</p><p>स्पेन के विदेश मंत्री के अनुसार, ‘ग्रेस वन’ जहाज़ को अमरीका के निवेदन पर क़ब्ज़े में लिया गया था. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस क़दम को ‘समुद्री डाकुओं का एक तरीक़ा’ बताया है.</p><p>गुरुवार की सुबह जिब्राल्टर के बंदरगाह पर क़ानून लागू करने वाले संगठनों ने रॉयल मरींस की मदद से ईरानी तेल टैंकर को क़ब्ज़े में लिया था. </p><p>बीबीसी को बताया गया है कि 30 मरींस की एक टीम जिब्राल्टर की सरकार के निवेदन पर ब्रिटेन से गई थी.</p><p>रक्षा सूत्रों के अनुसार ये ‘बड़ा शांत ऑपरेशन’ था जिसमें कोई बड़ी घटना नहीं हुई.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-48835864?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">ईरान-अमरीका परमाणु समझौता बच सकता है?</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-48832341?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">ईरान के लोग अमरीका से युद्ध चाहते हैं या शांति?</a></li> </ul><p>हालांकि ईरानी विदेश मंत्री के प्रवक्ता अब्बास मुसावी ने बताया है कि तेहरान में ब्रिटेन राजदूत रॉबर्ट मैकायर को ‘टैंकर को ग़ैर-क़ानूनी तौर पर क़ब्ज़े’ में लेने पर तलब किया गया था.</p><p>ईरान के टीवी चैनल को दिए जाने वाले एक छोटे से इंटरव्यू में अब्बास ने कहा कि टैंकर को क़ब्ज़े में लेना ‘समूद्री लूटपाट की एक क़िस्म’ है और उसकी कोई क़ानूनी या अंतरराष्ट्रीय बुनियाद नहीं है. उन्होंने टैंकर को फ़ौरी-तौर पर छोड़े जाने की मांग की है ताकि वह अपना सफ़र जारी रख सके.</p><p>उन्होंने कहा, &quot;ये क़दम इशारा करते हैं कि ब्रिटेन अमरीका की दुश्मनी की बुनियाद पर क़ायम नीतियों की पैरवी करता है जो कि ईरानी जनता और सरकार को मंज़ूर नहीं है.&quot;</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-48760550?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">ईरान-अमरीका तनाव और भारत की दुविधा</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-48753328?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">अमरीका ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध</a></li> </ul><figure> <img alt="ईरान और अमरीका के राष्ट्रपति" src="https://c.files.bbci.co.uk/023F/production/_107757500_b4a2b22b-9ffe-4efb-ba9a-585568e236a2.jpg" height="549" width="976" /> <footer>AFP</footer> </figure><p>बीबीसी के रक्षा संवाददाता जॉनथन बॉयल के मुताबिक़ जहां ब्रिटेन कहता है कि यह कार्रवाई जिब्राल्टर सरकार की ओर से की गई है वहीं ऐसा लगता है कि इसके लिए ख़ुफ़िया जानकारी अमरीका से आई थी.</p><p>स्पेन के विदेश मंत्री जोज़ेफ़ बोरेल ने कहा है कि स्पेन इस कार्रवाई के परिणामों के बारे में जान रहा था और ये भी कहा कि ये कार्रवाई ‘ब्रिटेन द्वारा अमरीका की मांग का पालन करना था.'</p><h3>यूरोपीयन यूनियन की पाबंदियों का उल्लंघन</h3><p>लेकिन यहां यह भी याद रखने वाली बात है कि स्पेन जिब्राल्टर पर ब्रिटेन के स्वामित्व से अलग राय रखता रहा है. </p><p>अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा कि टैंकर को क़ब्ज़े में लेने की ख़बर ‘शानदार’ थी. उन्होंने कहा कि दमिश्क के लिए तेल से भरा टैंकर यूरोपीय यूनियन की पाबंदियों का उल्लंघन था. उन्होंने कहा कि अमरीका और उसके सहयोगी ईरान और सीरिया की सरकारों को उस ग़ैर-क़ानूनी व्यापार से लाभ उठाने से रोकते हैं.</p><p>ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेरेमी हंट ने कहा है कि जिब्राल्टर के अधिकारी और रॉय मरींस जहाज़ों की फ़ौरी कार्रवाई सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद की ‘क़ातिल सरकार’ को बताना है कि यह मंज़ूर नहीं है.</p><p>जिब्राल्टर के अधिकारी ने कहा है कि इस बात पर यक़ीन करने की वजह है कि ये जहाज़ दमिश्क के शहर टारटस के बंदरगाह पर स्थापित एक रिफ़ाइनरी के लिए कच्चा लेकर जा रहा था.</p><p>ये तेल रिफ़ाइनरी दमिश्क की सरकारी पेट्रोलियम का एक हिस्सा है. यूरोपीय यूनियन का कहना है कि ये रिफ़ाइनरी सीरिया सरकार की आर्थिक मदद करती है.</p><p>याद रहे कि इस रिफ़ाइनरी को सन 2014 से यूरोपीय यूनयिन की ओर से प्रतिबंध का सामना करना पड़ रहा है.</p><figure> <img alt="डोनल्ड ट्रंप" src="https://c.files.bbci.co.uk/11112/production/_107760996_7c370504-317d-4389-8a71-18c094451ff8.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h3>अमरीका-ईरान तनाव </h3><p>ईरान और अमरीका के बीच हालिया तनाव उस वक़्त पैदा हुआ जब राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान और छह वैश्विक ताक़तों की बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रुकवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौते से अलग होने का फ़ैसला किया था.</p><p>इस समझौते पर सन 2015 में संयुक्त राष्ट्र समेत अमरीका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने हस्ताक्षर किए थे. समझौते में तय पाया गया था कि ईरान अपने परमाणु समझौते को कम करेगा और सिर्फ़ तीन फ़ीसदी यूरेनियम का इस्तेमाल कर सकेगा.</p><p>अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की ओर से परमाणु समझौते से अलग होने और पाबंदियों की बहाली के ऐलान में ईरान ने यूरेनियम संवर्धन में बढ़ोतरी की थी. ये यूरेनियम परमाणु बिजली घरों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होता है लेकिन इसे परमाणु बमों की तैयारी में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-48734807?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">ईरान की हथियार प्रणालियों पर अमरीका का साइबर अटैक</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-48754044?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">अमरीका ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामनेई पर प्रतिबंध क्यों लगाए?</a></li> </ul><figure> <img alt="ईरानी राष्ट्रपति" src="https://c.files.bbci.co.uk/15F32/production/_107760998_4bbe6327-1f67-43ff-8bf4-c105e7bf90c5.jpg" height="549" width="976" /> <footer>EPA</footer> <figcaption>अमरीका ने समझौता तोड़ा तो ईरान ने भी अपना परमाणु कार्यक्रम शुरू कर दिया था</figcaption> </figure><h3>ब्रिटेन भी ईरान से हुआ ख़फ़ा</h3><p>अमरीका ने बीते महीने स्ट्रेट ऑफ़ हॉरमुज़ में तेल टैंकरों को होने वाले नुक़सान का आरोप ईरान पर लगाता रहा है जबकि ईरान ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.</p><p>ईरान ने कुछ रोज़ पहले हवाई सीमाओं का उल्लंघन करने पर अमरीका का ड्रोन मार गिराया था. जिस पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया था कि ‘ईरान ने बहुत बड़ी ग़लती की है.'</p><p>तेल टैंकरों पर कथित हमले के बाद ब्रिटेन ने कहा था कि इन हमलों के लिए ईरान ज़िम्मेदार है, ईरान और ब्रिटेन के बीच तनाव बढ़ गया था.</p><p>ब्रिटेन ईरान पर ईरानी मूल की ब्रिटिश नागरिक नाज़नीन ज़ग़ारी रेटक्लिफ़ की रिहाई के लिए भी दबाव डाल रहा है जिनको सन 2016 में जासूसी के आरोप में पांच साल जेल की सज़ा सुनाई गई थी हालांकि वह अपने ऊपर लगने वाले आरोप से इनकार करत रही हैं. </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a 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