बेहतरीन इनसान थे डॉ पीयूषेंदु गुप्ता

इतिहास व पुरातत्व में गहरी अभिरुचि थी ।। डॉ दिलीप सेन ।। 90 वर्षीय डॉ सेन पटना के प्रमुख चिकित्सक और मशहूर पैथोलॉजिस्ट हैं. रेड क्रॉस से जुड़े रहे हैं. बिहार अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष.मेरे लिए डॉ पीयूषेंदु गुप्ता सबसे पहले एक बेहतरीन इनसान थे. मानवता ही उनका स्वभाव था. गरीबों की मदद के […]

इतिहास व पुरातत्व में गहरी अभिरुचि थी

।। डॉ दिलीप सेन ।।

90 वर्षीय डॉ सेन पटना के प्रमुख चिकित्सक और मशहूर पैथोलॉजिस्ट हैं. रेड क्रॉस से जुड़े रहे हैं. बिहार अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष.मेरे लिए डॉ पीयूषेंदु गुप्ता सबसे पहले एक बेहतरीन इनसान थे. मानवता ही उनका स्वभाव था. गरीबों की मदद के लिए वह हमेशा तैयार रहते थे. आइएससी की पढ़ाई हमने साथ की थी. मेडिकल कॉलेज में भी वह मेरे साथ थे. बाद में वह मेरे रिश्तेदार भी बने. वह मेरी पत्नी के भाई थे. मेरे साथ उनका संबंध भाई जैसा था. उदार स्वभाव के पीयूषेंदु कभी अपने विचार दूसरों पर नहीं थोपते थे. गरीबों के साथ गहराई से जुड़े थे और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों का भी बहुत ख्याल रखते थे.

पेशे से वह डॉक्टर थे. लेकिन, इतिहास और पुरातत्व में उनका योगदान शानदार रहा. सबसे बढ़ कर समाज और गरीबों की उन्होंने जिंदगी भर मदद की. एमबीबीएस करने के बाद कुछ दिनों तक तो वह पटना के भिखना पहाड़ी इलाके में मेडिकल प्रैक्टिस करते थे. लेकिन, कुछ ही दिनों बाद साठ के दशक की शुरुआत में वह तत्कालीन मंत्री चंद्रशेखर सिंह और बेगूसराय के स्थानीय लोगों के अनुरोध पर गरीबों के इलाज के लिए बेगूसराय के पास बीहट गांव में प्रैक्टिस करने चले गये.

वहां उनकी फीस सिर्फ दो रुपये हुआ करती थी. लेकिन, कोई फीस नहीं भी देता था, तब भी उसका इलाज मुफ्त में बढ़िया से करते थे. बेगूसराय से वह अक्सर मुङो फोन किया करते थे. अधिकतर फोन पर वह कहते थे कि फलां को भेज रहा हूं.. उसका इलाज कर देना.. और सुनो, पैसे नहीं मिलेंगे.. गरीब आदमी है. उनके ज्यादातर मरीज गरीब लोग ही हुआ करते थे. मुझसे भी अक्सर गरीबों की आर्थिक मदद के लिए कहा करते थे.मेरी शादी 1953 में हुई. लेकिन, हम काफी पहले से एक-दूसरे को जानते थे.

हम दोनों पटना साइंस कॉलेज में एक ही साथ आइएससी में पढ़ते थे. 1945 में आइएससी करने के बाद पटना मेडिकल कॉलेज में मेरा एडमिशन हो गया. लेकिन, पीयूषेंदु गुप्ता सीपीआइ के साथ जुड़े थे. इसी साल वह ढाका चले गये. उनके बहनोई ढाका मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर थे. ढाका में ही उन्होंने बीएससी किया. इसके बाद उन्होंने दरभंगा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन लिया. वहां सेकेंड इयर पूरा करने के बाद उनका ट्रांसफर पटना मेडिकल कॉलेज में हो गया, जहां से 1953 में उन्होंने एमबीबीएस किया.

इतिहास और पुरातत्व में उनकी गहरी अभिरुचि थी. 80 के दशक में उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से इतिहास में एमए भी किया. गंगा, कोसी और गंडक बेसिन के निवासियों के इतिहास पर उन्होंने शानदार रिसर्च किया. इसमें इस इलाके के इतिहास और पुरातत्व की कई नयी जानकारियां सामने आयीं. इसके साथ वह मेडिकल प्रैक्टिस भी करते रहे और बाद में बीहट से बेगूसराय शिफ्ट हो गये. बेगूसराय इलाके लोगों में उनकी लोकप्रियता बेमिसाल थी. वहां के लोग आज भी उन्हें बहुत प्यार करते हैं. बाद में उम्र ज्यादा होने पर उनकी तबीयत खराब रहने लगी, तो परिवार के अनुरोध पर पटना आ गये. हालांकि, वह बेगूसराय छोड़ना नहीं चाहते थे.

पटना आने के फैसले से बेगूसराय में लोग बहुत दुखी हुए. जब वह बेगूसराय से पटना आ रहे थे, तो उन्हें छोड़ने के लिए हजारों लोग बेगूसराय से पटना आये. वहां के लोग रो रहे थे. उनका व्यक्तित्व अद्भुत मानवीय गुणों से भरा था. गरीब मरीजों का इलाज वह अपने पैसे से दवा आदि खरीद कर करते थे. उन्हें कपड़े, कंबल आदि भी देते थे.

पटना आने के बाद उन्होंने खजांची रोड में क्लिीनिक खोल कर प्रैक्टिस शुरू की. वहां पटना के अलावा बेगूसराय से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने आते थे. इसके साथ ही इतिहास और पुरातत्व पर भी काम करते रहे. उन्होंने ‘आर्कियोलॉजी एंड आर्ट ऑफ गंगा, गंडक एंड कोसी बेसिन’ नाम की किताब भी लिखी. इतिहास और पुरातत्व पर उनके शानदार काम के लिए एशियाटिक सोसाइटी, पटना ने हाल में उन्हें ‘इतिहासरत्न’ की उपाधि से नवाजा था. वह अपने बेटे मशहूर अर्थशास्त्री डॉ शैबाल गुप्ता के साथ पटना के बैंक रोड स्थित आवास में रह रहे थे. दो साल पहले तक वह अपने क्लिनिक में बैठते थे.

इन दिनों उनकी तबीयत ज्यादा खराब रह रही थी. इसके बावजूद 86 साल की उम्र भी में भी वह घर पर ही मरीजों को देखते थे. वह इतने दयालु थे कि कोई भी इनसान उनसे किसी तरह की मदद मांगता था, तो तुरंत तैयार हो जाते थे.पेशे से वह डॉक्टर थे. लेकिन, इतिहास और पुरातत्व में उनका योगदान शानदार रहा. सबसे बढ़ कर समाज और गरीबों की उन्होंने जिंदगी भर मदद की.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >