भारत-पाक के बीच शांति पहल का अग्रदूत बन सकता है करतारपुर गलियारा

नारोवाल (पाकिस्तान) : रावी नदी के किनारे स्थित सिखों के महत्वपूर्ण तीर्थस्थल को भारत के सीमावर्ती गुरदासपुर जिले से जोड़ने वाले एक धार्मिक गलियारे से दोनों देशों के बीच ‘‘उम्मीद और शांति” लाने की संभावना है. इस गलियारे की नींव रखे जाने की पूर्व संध्या पर सीमा के दोनों तरफ रहने वालों का यह मानना […]

नारोवाल (पाकिस्तान) : रावी नदी के किनारे स्थित सिखों के महत्वपूर्ण तीर्थस्थल को भारत के सीमावर्ती गुरदासपुर जिले से जोड़ने वाले एक धार्मिक गलियारे से दोनों देशों के बीच ‘‘उम्मीद और शांति” लाने की संभावना है. इस गलियारे की नींव रखे जाने की पूर्व संध्या पर सीमा के दोनों तरफ रहने वालों का यह मानना है. करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब और भारत के साथ लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच गलियारे की नींव रखने का समारोह बुधवार को यहां होगा. माना जाता है कि करतारपुर में ही सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने अंतिम सांस ली थी.

प्रधानमंत्री इमरान खान, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के वरिष्ठ राजनेता और कई आला अधिकारी लाहौर से करीब 120 किलोमीटर दूर नारोवाल में होने वाले इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. भारत की तरफ पंजाब के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक से अंतरराष्ट्रीय सीमा तक गलियारे की आधारशिला उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार को रखी थी. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैजल ने मंगलवार को कहा कि करतारपुर के गुरुद्वारा दरबार साहिब तक भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को वीजा मुक्त यात्रा को सुविधा देने वाले इस गलियारे का काम छह माह में पूरे होने की संभावना है.

नारोवाल निवासी 60 वर्षीय पाकिस्तानी कारोबारी अब्बास खान ने कहा, ‘‘पिछले 70 सालों में हम काफी लड़े हैं. उन लड़ाइयों से कोई फायदा नहीं हुआ, न भारत को न ही पाकिस्तान को. अब समय है कि हम एक नया सफर शुरू करें और करतारपुर गलियारे में शांति लाने की संभावना है.”

एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक लाहौर निवासी बिलाल मोहम्मद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक प्रभावशाली नेता हैं और वह तथा उनके पाकिस्तानी समकक्ष इमरान खान अगर चाहें तो द्विपक्षीय रिश्तों में बदलाव ला सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘यह उम्मीद और शांति का गलियारा होगा. हमें दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने के लिये भी ऐसे ही प्रयास शुरू करने चाहिए.”

करतारपुर साहिब पाकिस्तान में रावी नदी के पार स्थित है और डेरा बाबा नानक से करीब चार किलोमीटर दूर है. एक बार इस गलियारे के बन जाने के बाद भारतीय सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर जाने के लिये वीजा मुक्त सुविधा हासिल हो जाएगी. पिछले सप्ताह पाकिस्तान और भारत ने घोषणा की थी कि वे अपनी-अपनी तरफ सीमा तक गलियारा बनाएंगे जिससे भारतीय श्रद्धालुओं को करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब जाने में सुविधा हो.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोनों देशों के निर्णय का संबंध बर्लिन की गिरी हुई दीवार से किया जिससे यह संकेत गया कि इस परियोजना से दोनों देशों के बीच सुलग रहे तनाव से कुछ राहत मिलेगी. नारोवाल में बुधवार के कार्यक्रम के लिए व्यापक प्रबंध किये गये. इस कार्यक्रम में विभिन्न गणमान्य लोग शामिल होंगे.

कार्यक्रम के लिए पंजाब के मंत्री एवं पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान पहुंच गये हैं. भारत सरकार ने घोषणा की है कि इस कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर और हरदीप सिंह पुरी देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। कार्यक्रम स्थल के आसपास बड़ी संख्या सुरक्षा बलों को तैनात किया गया. अटारी वाघा सीमा पर कई भारतीयों ने भी गलियारा बनाने के दोनों देशों के इस कदम का स्वागत किया है.

मंजीत सिंह (35) ने कहा कि यह लम्बे समय से हमारी मांग बनी हुई है तथा दोनों देशों ने अब इस परियोजना को शुरू करने का निर्णय किया है. हम बहुत खुश हैं। भारत ने करीब 20 साल पहले इस गलियारे का प्रस्ताव पाकिस्तान को दिया था. करतारपुर साहिब गलियारे का मुद्दा तब सुर्खियों में आया जब अगस्त माह में सिद्धू इमरान खान के शपथग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए पाकिस्तान गये थे. लौटने बाद सिद्धू ने खुलासा किया कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने उन्हें यह बताया कि पाकिस्तान करतारपुर साहिब के लिए गलियारा खोल सकता है। भारत पाकिस्तान के संबंधों में पिछले कुछ समय से खटास आयी हुई है.

वर्ष 2016 में पाकिस्तान स्थित आतंकी समूहों द्वारा किये गये हमलों के भारत-पाक संबंधों में कड़वाहट आ गयी थी। सिद्धू ने करतारपुर गलियारे को ‘‘अनंत संभावनाओं वाला गलियारा” करार दिया है. उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से शांति को प्रोत्साहन मिलेगा तथा पाकिस्तान एवं भारत के बीच शत्रुता मिटेगी. उन्होंने कहा, ‘‘करतारपुर गलियारा शांति का पथ साबित होगा।” पाकिस्तान ने इस कार्यक्रम के लिए भारत के 25 पत्रकारों के समूह को आमंत्रित किया है.

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