जुकरबर्ग को फेसबुक चेयरमैन पद से हटाना चाहते हैं निवेशक

वाशिंगटन : फेसबुक के अपनी आलोचना को दबाने के लिए जनसंचार कंपनी नियुक्त करने की खबर आने के बाद निवेशकों ने मार्क जुकरबर्ग से चेयरमैन पद से इस्तीफा देने की मांग की है. न्यू यॉर्क टाइम्स ने हाल ही में एक रपट प्रकाशित कर खुलासा किया गया कि फेसबुक, कई बार अपनी आलोचनाओं को दबाने […]

वाशिंगटन : फेसबुक के अपनी आलोचना को दबाने के लिए जनसंचार कंपनी नियुक्त करने की खबर आने के बाद निवेशकों ने मार्क जुकरबर्ग से चेयरमैन पद से इस्तीफा देने की मांग की है.

न्यू यॉर्क टाइम्स ने हाल ही में एक रपट प्रकाशित कर खुलासा किया गया कि फेसबुक, कई बार अपनी आलोचनाओं को दबाने और लोगों के मन में कंपनी के खिलाफ भरे गुस्से को दूर करने के लिए अरबपति कार्यकर्ता जॉर्ज सोरोस की सेवाएं लेती है और आलोचना को अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के तरफ मोड़ने का काम करती है. वहीं, टेलीग्राफ ने अपनी रपट में कहा है कि कैंब्रिज एनालिटिका के मामले में अपनी आलोचना को दबाने के लिए उसने जनसंचार कंपनी डिफाइनर्स पब्लिक अफेयर्स की सहायता ली है.

इन खबरों पर फेसबुक में 85 लाख पौंड की हिस्सेदारी रखने वाले ट्रिलियम एसेट मैनेजमेंट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जोनास करॉन ने पिछली रात जुकरबर्ग से फेसबुक के चेयरमैन पद से इस्तीफा देने की मांग की. अखबार ने उनके हवाले से लिखा है, फेसबुक अजीब तरह का व्यवहार कर रही है. यह सही नहीं है, यह एक कंपनी है और कंपनियों को चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पदों को अलग रखने जरूरत होती है.

ज्ञात हो जुकरबर्ग ने कैंब्रिज एनालिटिका स्कैंडल मामले में गलती स्वीकार करते हुए कहा था कि यह विश्वासघात का मामला है. जुकरबर्ग ने कहा था कि इस दिशा में समस्याओं से निपटने के लिए जरूरी कदम उठा लिये गये हैं. मैं यह समझने की कोशिश की दिशा में काम कर रहा हूं कि असल में हुआ क्या और इसे दोबारा होने से कैसे रोका जाये. जुकरबर्ग का मानना था कि कंपनी उन सभी एप की जांच करेगी, जिनके जरिये बड़ी मात्रा में जानकारियां हासिल की गयी. निजी जानकारियों का दुरुपयोग या उनसे छेड़छाड़ करने वालों डेवलेपर्स पर प्रतिबंध लगाया जायेगा. इसके साथ ही संदिग्ध गतिविधियों वाले सभी एप की जांच की जायेगी. ब्रिटिश डेटा विश्लेषण कंपनी, कैंब्रिज एनालिटिका पर आरोप है कि उसने पांच करोड़ फेसबुक उपयोगकर्ताओं के निजी डेटा बिना उनकी मंजूरी के चुरा लिये हैं और उसका उपयोग राजनेताओं की मदद के लिए किया गया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रेक्सिट अभियान शामिल हैं.

कंपनी पर आरोप है कि उसने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान मतदाताओं को डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में प्रभावित करने के लिए फेसबुक के पांच करोड़ उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारियों का दुरुपयोग किया था. इस मामले के सामने आने के बाद फेसबुक और कैंब्रिज एनालिटिका दोनो को यूरोपीय संघ, ब्रिटेन समेत अमेरिका में भी कानूनी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ रहा है. दोनों कंपनियां इस मामले को लेकर भारी आलोचना झेल रहीं हैं.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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