अमेरिका के आगे पाकिस्तान ने टेके घुटने,तालिबान की कैद से रिहा हुए अमेरिकी-कनाडाई दंपती

वाशिंगटन : आतंकी संगठनों को अपने हितों के लिए इस्तेमाल करने और उन पर कार्रवाई न करने के आरोपों में घिरा पाकिस्तान अब अमेरिकी दबाव के आगे झुकता नजर आ रहा है. पाकिस्तान ने अफगान तालिबान से संबंधित आतंकी समूह हक्कानी नेटवर्क के कब्जे से अमेरिकी-कनाडाई दंपती को सुरक्षित बचाने के प्रयास में अहम भूमिका […]

वाशिंगटन : आतंकी संगठनों को अपने हितों के लिए इस्तेमाल करने और उन पर कार्रवाई न करने के आरोपों में घिरा पाकिस्तान अब अमेरिकी दबाव के आगे झुकता नजर आ रहा है. पाकिस्तान ने अफगान तालिबान से संबंधित आतंकी समूह हक्कानी नेटवर्क के कब्जे से अमेरिकी-कनाडाई दंपती को सुरक्षित बचाने के प्रयास में अहम भूमिका निभायी है जिससे पता चलता है कि पाकिस्तान किस तरह से आतंकवाद के मसले पर अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेकने पर मजबूर है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने गुरुवार को खुद इस बात की घोषणा की कि उनके प्रशासन ने अमेरिकी नागरिक और उसके कनाडाई पति की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित की है. दोनों 2012 से हक्कानी नेटवर्क के कब्जे में थे. गौरतलब है कि इस आतंकी संगठन को अमेरिका ने एक बार ‘आईएसआई की सहायक संस्था’ तक करार दे चुका है. ट्रंप ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान सरकार के साथ मिलकर काम करते हुए हमने बॉयले-कोलमैन की रिहाई सुनिश्चित कराने का काम किया है. यही नहीं ट्रंप ने इसके लिए पाकिस्तानी सरकार को धन्यवाद भी दिया है. हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताने से मना कर दिया कि कैसे कैटलान कोलमैन और जोशुआ बॉयले को रिहा कराया गया.

उ कोरिया ने कहा-अमेरिका ने शुरू कर दी है जंग, भुगतना होगा उसे परिणाम, ट्रंप ने कहा-समस्या का हल जरूरी

बयान के अनुसार बंधक रहने के दौरान दंपती ने तीन बच्चों को भी जन्म दिया. यहां उल्लेख कर दें कि इन दोनों की रिहाई में पाकिस्तान की ओर से मदद ऐसे समय में मिली है, जब कुछ दिन पहले ही पाक के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ की अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रंप प्रशासन ने उन्हें आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने को कहा था. यही नहीं अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि यदि आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तान का नरम रवैया बना रहता है तो वह उसके खिलाफ जरूरी ऐक्शन लेने पर विचार किया किया जाएगा.
ऐसे कयास लगाये जा रहे थे कि यदि पाकिस्तान अपने रवैये पर कायम रहता है तो अमेरिकी ओर से मिलने वाली मदद में कटौती की जा सकती है. उसकी धरती पर आतंकियों क निशाना बनाकर एक बार फिर से ड्रोन अटैक तेज किये जा सकते हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >