गांव की दहलीज पर दम तोड़ती सरकारी योजनाएं, आजादी के अमृत महोत्सव के जश्न में कैसे होंगी शामिल

आजादी के 75 सालों के बाद भी आज भी कई गांव ऐसे हैं जो विकास की राह देख रहे हैं. बरसोल क्षेत्र के कई गॉव ऐसे हैं जहां सरकारी सुविधाएं गांव की दहलीज पर ही दम तोड़ देती हैं. देश आजादी का अमृत उत्सव मना रहा है.

आजादी के 75 सालों के बाद भी आज भी कई गांव ऐसे हैं जो विकास की राह देख रहे हैं. बरसोल क्षेत्र के कई गॉव ऐसे हैं जहां सरकारी सुविधाएं गांव की दहलीज पर ही दम तोड़ देती हैं. देश आजादी का अमृत उत्सव मना रहा है. हम आजादी से लेकर अबतक के विकास की कहानी, अपने सफर का जिक्र कर रहे हैं लेकिन कई गांव ऐसे हैं जो आजादी से लेकर अबतक विकास के रास्ते पर चल ही नहीं सके.

आज हम एक ऐसे ही गांव की कहानी आपके सामने रख रहे हैं. बरसोल के सांडरा पंचायत अंतर्गत लुगाहारा गॉव है. गांव की खूबसूरती ऐसी की जैसे ऊपर वाले ने प्रकृति की विशेष खूबसूरती से नवाजा हो, चारों तरफ जंगल से घिरा यह गांव प्राकृतिक तौर पर खूब संपन्न है.

इस गॉव में 45 परिवार के करीब 250 लोग निवास करते हैं लेकिन इस गॉव मैं एक भी परिवार केपास ना तो शौचालय है और ना ही पीएम आवास।. तना ही नहीँ गॉव में सिर्फ एक दो बुजुर्गों को छोड़कर और किसी को भी पेंसन नहीँ मिलती है. गॉव में एक भी सोलर जलमिनार नहीँ है जबकि क्षेत्र के दूसरे गांव में 2,3 सोलर जलमिनार बनाया गया है.

इस गांवों में एक भी शौचालय नहीं है होने की वजह से लोगों को खुले में शौच जाना पड़ता है. भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत जहां एक ओर स्वच्छता के संदेश दिए जा रहे हैं। लोगों के खुले में शौच करने से बचने के लिए जागरूक किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर इस गांव तक सरकारी योजनाओं की पहुंच तो नहीं है लेकिन टीवी, रेडियो पर इन योजनाओं की चर्चा गांव के लोगों ने खूब सुनी है. इस इलाके तक सरकारी योजना पहुंचाने वाले अधिकारी से जब हमारे संवाददाता ने बात की तो सुनिये क्या कहते हैं सुनिये गांव में कोई एक समस्या नहीं है सरकारी योजनाओं की उचित पहुंच ना होने से कई तरह कीसमस्या हैं.

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By PankajKumar Pathak

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