Yam ka Diya 2023: यम का दीपक जलाना कब रहेगा शुभ, जानें नियम और सही समय

Yam ka Diya 2023: आज धनतेरस है. आज से पांच दिनों तक चलने वाला दिवाली का पर्व आरंभ हो गया है. धनतेरस पर आज शाम को मां लक्ष्मी, कुबेर भगवान की पूजा करने के साथ यमराज की पूजा करने का विधान है, आज शाम के समय दक्षिण दिशा में एक चौमुखा दीपक जलाया जाता है, जिसे यम दीपक के नाम से जाना जाता हैं.

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Yam ka Diya 2023: यम का दीपक जलाना कब रहेगा शुभ, जानें नियम और सही समय

Yam ka Diya 2023: यम का दीपक जलाना कब रहेगा शुभ, जानें नियम और सही समय

दीपदान और पूजा का शुभ मुहूर्त

धनतेरस पर खरीदारी, दीपदान और पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 46 मिनट से शाम 07 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. इस बार शुभ मुहूर्त के लिए कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट का होगा.

यम का दीपक जलाना कब रहेगा शुभ

प्रदोष काल की शुरुआत शाम 05 बजकर 29 मिनट से 08 बजकर 07 मिनट तक रहेगा. वहीं वृषभ काल की शुरुआत 05 बजकर 46 मिनट से 07 बजकर 42 मिनट तक रहेगा. इस दौरान यम का दीपक जलाना शुभ होता है.

यम का दीपक जलाने के नियम

यम का दीपक धनतेरस के दिन जलाना काफी शुभ माना जाता है. वहीं कुछ लोग धनतेरस के दिन की जगह छोटी दीपावली को भी यम दीपक जलाते हैं. क्योंकि ये दीपक यम देव को समर्पित होता है और उनकी दिशा शास्त्रों में दक्षिण मानी गई है तो इसे सिर्फ दक्षिण दिशा में ही जलाएं.

भूलकर भी न करें ये गलतियां

यम का दीपक को कभी भी घर के अंदर नहीं जलाना चाहिए, मान्यता है कि ऐसा करने पर जातक के जीवन में कई तरह की समस्या उत्पन्न होने लग जाती है. यदि आप यम दीपक जलाते हैं तो घर के बार ही जलाएं और इसे दक्षिण दिशा में रखना न भूले.

शाम के समय जलाए यम का दीया

यम दीपक जलाने के बाद परिवार के किसी भी सदस्य को उसके बाद घर से बाहर नहीं निकलने देना चाहिए, जब घर के सभी सदस्य घर आ जाएं तभी यम दीपक जलाएं. यम दीपक को सूर्यास्त के बाद संध्याकाल में ही जलाएं.

यम का दीया जलाने से अकाल मृत्यु से मिलती है मुक्ति

शास्त्रों के अनुसार, धनतेरस की देर रात को एक दीया और जलाना चाहिए, जिससे अकाल मृत्यु को भी टाला जा सकता है. घर के किसी भी बुजुर्ग द्वारा इसे जलाकर घर के बाहर रखा जाता है. इसे यम का दीया कहा जाता है. मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु भी टल जाती है.

यम दीपक का पितरो से है संबंध

पौराणिक मान्यता के अनुसार, हम जो भी पूजा से संबंधित कर्मकांड अपने पितरों के निमित्त करते हैं. उससे वह तृप्त होकर परिवार को आशीर्वाद देते हैं. यम दीपक जहां आकाल मृत्यु के संकट को रोकता है. वहीं इसके पीछे ये भी मान्यता है कि यदि धनतेरस की शाम सूर्यास्त के बाद यम दीपक जलाया जाए तो उससे पितरों के मार्ग को प्रकाश मिलता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Radheshyam kushwaha

राधेश्याम कुशवाहा को पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत उन्होंने राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में यूपी डेस्क का नेतृत्व कर रहे हैं. इन्हें धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष, राजनीति, अपराध और सकारात्मक खबरों की रिपोर्टिंग व लेखन में विशेष रुचि रखते हैं.

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