World Cup 2011 के हीरो युवराज सिंह टूर्नामेंट के वक्त बहुत तेज खांसते थे, लेकिन जब सच आया सामने तो…

अश्विन ने कहा कि युवराज सिंह विश्वकप 2011 के मैनऑफ दि सीरीज थे. जिन्हें भारत का आइकन माना जाता था, उनका कैंसर जैसी बीमारी से ग्रसित होना चौंकाने वाली सूचना थी. हम सब शाॅक्ड थे. जो इंसान अभी विश्वकप में इतनी बड़ी भूमिका निभाया हो, वह कैंसर जैसी बीमारी से पीड़ित हो.

World Cup News : ‘युवी अक्सर खांसते थे, उन्हें जब खांसी आती थी, तो वे बहुत जोर से खांसते थे. मैं सोचता था कि यह खेल का दबाव है, इससे ज्यादा कभी किसी ने सोचा नहीं. किसी को भी यह एहसास नहीं था कि वह एक गंभीर बीमारी से जूझ रहा है. यहां तक कि टीम के जूनियर वर्ग से किसी को कोई अंदाजा नहीं था कि वह एक गंभीर बीमारी से पीड़ित था. ”रविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल कुट्टी स्टोरीज विद ऐश में उक्त बातें हर्षा भोगले के साथ चर्चा में कही.

भारत का आइकन गंभीर बीमारी से पीड़ित था

अश्विन ने कहा कि युवराज सिंह विश्वकप 2011 के मैनऑफ दि सीरीज थे. जिन्हें भारत का आइकन माना जाता था, उनका कैंसर जैसी बीमारी से ग्रसित होना चौंकाने वाली सूचना थी. हम सब शाॅक्ड थे. जो इंसान अभी विश्वकप में इतनी बड़ी भूमिका निभाया हो, जिसके बारे में यह कहा जा सकता है कि 2011 का विश्वकप उसका विश्वकप था, वह कैंसर जैसी बीमारी से पीड़ित हो, यह सोचकर ही दहशत हो जाता है.

जोकर इन ए पैक थे युवराज सिंह

हर्षा भोगले ने चर्चा में कहा कि युवराज सिंह वो खिलाड़ी थे जो टीम में एक बैट्‌समैन और बाॅलर की भूमिका बहुत ही संयमित तरीके से निभाते थे. अश्विन ने कहा कि वे टीम के लिए ‘जोकर इन ए पैक’ की भूमिका में थे. उन्हें पार्ट टाइमर गेंदबाज कहना गलती होगी. उनका गेंद पर जिस तरह का ग्रिप था वह रेअर स्पिनर में होता है. आर अश्विन ने कहा कि 2011 का विश्वकप सिर्फ टीम की जीत का विश्वकप नहीं था, यह जीत हर आम भारतीय की थी और मैंने इस जीत को महसूस किया था.

गौतम गंभीर अनसंग हीरो

इस चर्चा में आर अश्विन ने 2011 के विश्वकप में गौतम गंभीर द्वारा खेले गए मैच की चर्चा भी की. उन्होंने कहा कि गौतम गंभीर वैसे अनसंग हीरो हैं, जिनके योगदानों की चर्चा बहुत नहीं हुई. हर्षा और अश्विन ने कहा कि उनकी पारियां टीम के लिए बहुत जरूरी थीं और उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया था, बावजूद इसके जितनी चर्चा उनकी होनी चाहिए थी वो नहीं हुई. कुट्टी स्टोरीज विद ऐश के पांचवें एपिसोड में हर्षा भोगले ने कहा कि इस सीरीज का नाम भले ही कुट्टी स्टोरीज है, लेकिन ये जाइंट स्टोरीज हैं. जिसकी एंकरिंग अश्विन कर रहे हैं, इसपर अश्विन ने उन्हें टोका कि नहीं यहां कोई एंकरिंग नहीं कर रहा और ना ही कोई इंटरव्यू चल रहा है. हम बस रोचक स्टोरी पर बात कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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