कौन हैं मुस्लिम नेता रिकमन मोमिन ? पीएम मोदी के इस प्रशंसक को बीजेपी ने बनाया मेघालय का अध्यक्ष

रिकमन मोमिन जैसा नाम से ही पता चल रहा है कि वे मुस्लिम समुदाय से आतें हैं, उन्हें बीजेपी ने मेघालय इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया है. जानें पीएम मोदी के इस खास प्रशंसक के बारे में

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने राज्यसभा सदस्य एस सेल्वगनबथी को पार्टी की पुडुचेरी इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया है. वहीं बीजेपी ने अपनी नगालैंड इकाई के उपाध्यक्ष को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की ओर से जारी अलग अधिसूचना के अनुसार बीजेपी ने रिकमन मोमिन को पार्टी की मेघालय इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया है. पार्टी की अधिसूचना के अनुसार बीजेपी प्रमुख जे पी नड्डा ने इन नियुक्तियों को मंजूरी दी है. इन तीनों प्रदेशों में से एक प्रदेश की खास चर्चा अब होने लगी है. जी हां…वह प्रदेश मेघालय है. दरअसल, रिकमन मोमिन को बीजेपी ने मेघालय इकाई का अध्यक्ष बनाया जिसके बाद उनके बारे में लोग जानना चाहते हैं.

जानें कौन हैं रिकमन मोमिन

रिकमन मोमिन जैसा नाम से ही पता चल रहा है कि वे मुस्लिम समुदाय से आते हैं, उन्हें बीजेपी ने मेघालय इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया है. जिस मुस्लिम नेता रिकमन मोमिन को प्रदेश की कमान सौंपी गई है, उनकी दिल्ली के नेताओं में जबरदस्त पकड़ बताई जा रही है. साल 2022 में, बीजेपी ने मेघालय की तुरा लोकसभा सीट से मोमिन को चुनावी मैदान में उतारा था. रिकमन मोमिन पीएम नरेंद्र मोदी के जबरदस्त प्रशंसक माने जाते हैं. वे पेशे से एक व्यापारी हैं. मोमिन मीडिया में कई बार इस बात को साफ तौर पर कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर ही उन्होंने राजनीति में कदम रखने का काम किया है.


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अर्नेस्ट मावरी को क्यों हटाया गया

मेघालय में इतने बड़े बदलाव के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि बीजेपी ने इतना बड़ा फैसला क्यों लिया ? यदि आपको याद हो तो मेघालय बीजेपी के पूर्व प्रमुख अर्नेस्ट मावरी का बयान कुछ दिनों पहले आया था. इसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस बात पर फैसला करेगा कि उन्हें पद पर बने रहना चाहिए या नहीं? आगे उन्होंने कहा था कि मैंने अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है. मैं इस पद पर आगे रहूंगा या नहीं, इसका फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा. मारवी का उक्त बयान बीजेपी विधायक एएल हेक के उस बयान के बाद आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि मावरी को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का कदम हटाया जा सकता है.


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पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों पर बीजेपी का फोकस

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां तैयारी में जुट चुकी है. इस बीच बीजेपी पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों पर ज्यादा फोकस कर रही है. इस क्षेत्र के 12 राज्यों के बीजेपी के वरिष्ठ नेता लोकसभा चुनाव के संबंध में रणनीति बनाने के लिए गुवाहाटी में जुटे थे. एक नजर पूर्वोत्तर के आठ राज्यों पर डालें तो इस क्षेत्र में कुल 25 लोकसभा सीट हैं, जिनमें असम में सबसे ज्यादा 14 सीट हैं. अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर तथा त्रिपुरा में लोकसभा की दो-दो सीटें हैं, वहीं मिजोरम, नागालैंड तथा सिक्किम में एक-एक सीट है. अब बात पूर्वी राज्यों की करें तो पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीट, बिहार में 40 सीट, ओडिशा में 21 और झारखंड में 14 सीट हैं जिसको जीतने के लिए भाजपा पूरा जोर लगा रही है.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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