पूर्व सांसद रूपचांद पाल और पूर्व विधायक पीके भट्टाचार्य का निधन

West Bengal News: रूपचांद पाल ने जीवन काल में कुल नौ बार चुनाव लड़ा. दो बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा. वर्ष 1984 में कांग्रेस प्रत्याशी इंदुमति भट्टाचार्य से और र्ष 2009 में तृणमूल की रत्ना दे नाग से चुनाव हार गये थे.

हुगली/हाबरा: पश्चिम बंगाल के एक पूर्व सांसद और पूर्व विधायक का निधन हो गया है. हुगली के पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ वामपंथी नेता रूपचांद पाल का कोलकाता के एक निजी अस्पताल में मंगलवार सुबह निधन हो गया. वहीं, उत्तर 24 परगना के हाबरा से माकपा के पूर्व विधायक प्रणब कुमार (पीके) भट्टाचार्य (75) का मंगलवार को तड़के दिल का दौरा पड़ने से देहांत हो गया. उन्होंने हिजलपुकुर स्थित अपने आवास पर ही अंतिम सांस ली.

6 महीने से उम्रजनित बीमारियों से थे परेशान

रूपचांद पाल 84 वर्ष के थे. वह हुगली लोकसभा क्षेत्र से 7 बार विजयी हुए थे. वह छह महीने से उम्रजनित बीमारियों से परेशान थे. घर पर ही उनका इलाज चल रहा था. अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी.

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शिक्षक से राजनेता बने रूपचांद पाल

उन्होंने मोगरा के बाघाटी श्रीगोपाल बनर्जी कॉलेज से अध्यापन कार्य आरंभ किया. बाद में नैहाटी स्थित ऋषि बंकिम चंद्र कॉलेज में अध्यापक बने. बाद में अध्यापन छोड़ पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता बन गये. वर्ष 1958 में उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ली. बाद में जिला कमेटी की सचिव मंडली के सदस्य बनाये गये. वह सीटू के उपाध्यक्ष भी रहे.

नौ बार लड़े चुनाव, दो बार हारे

रूपचांद पाल ने जीवन काल में कुल नौ बार चुनाव लड़ा. दो बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा. वर्ष 1984 में कांग्रेस प्रत्याशी इंदुमति भट्टाचार्य से और र्ष 2009 में तृणमूल की रत्ना दे नाग से चुनाव हार गये थे. 1980, 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 के चुनावों में विजयी रहे. वह चुंचुड़ा के बड़ालगलि के निवासी थे.

हाबरा : नहीं रहे पूर्व विधायक पीके भट्टाचार्य

उत्तर 24 परगना के हाबरा से माकपा के पूर्व विधायक पीके भट्टाचार्य (75) का मंगलवार को तड़के दिल का दौरा पड़ने से देहांत हो गया. उन्होंने हिजलपुकुर स्थित अपने आवास पर ही अंतिम सांस ली. वह लंबे समय तक माकपा के उत्तर 24 परगना जिला कमेटी की मंडली के सदस्य थे. दिवंगत नेता की इच्छा के अनुरूप उनकी आंखें दिशा प्रभा आई बैंक को दान कर दी गयीं.

साइकिल चलाकर लोगों से संपर्क करते थे पीके

हाबरा नगरपालिका के पूर्व मेयर नीलिमेश दास (जो अब तृणमूल कांग्रेस में हैं) भी दिवंगत प्रणब भट्टाचार्य के अंतिम दर्शन को उनके घर पर पहुंचे थे. कॉमरेड का पार्थिव शरीर स्थानीय पार्टी कार्यालय, नगरपालिका, फिर जिला माकपा कार्यालय ले जाया गया. मालूम रहे कि वर्ष 1979 में प्रणब भट्टाचार्य हाबरा नगरपालिका बोर्ड के पहले उपाध्यक्ष बने थे. वर्ष 2006 से 2011 तक वह हाबरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रहे. वह साइकिल चला कर इलाके का भ्रमण करते और लोगों से संपर्क में रहा करते थे.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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