UPSC Results : झारखंड के अभिनव प्रकाश को मिला 279 रैंक, किसान माता-पिता के सपनों को साकार कर रो पड़े

अभिनव प्रकाश को यह सफलता दूसरी बार में हासिल हुई है. इसके लिए अभिनव प्रकाश ने कड़ी मेहनत की. 22 साल के अभिनव ने बताया कि मैं एक छोटे शहर का लड़का हूं जब मैंने दिल्ली जाकर पढ़ाई की तो मेरे सामने कई तरह की चुनौतियां थीं.

UPSC Results : मुझे जब पता चला कि मैं यूपीएससी सिविल सेवा की परीक्षा में पास हो गया हूं और मुझे 279 रैंक मिला है, तो मैं खुशी से रो पड़ा. मेरा ड्रीम था कि मैं आईएएस बनूं और मेरा यह सपना सच हो गया. उक्त बातें अभिनव प्रकाश ने प्रभात खबर के साथ खास बातचीत में कही. सिविल सेवा परीक्षा में 279 रैंक लाकर झारखंड को गौरवान्वित करने वाले अभिनव प्रकाश चतरा जिला के हंटरगंज के रहने वाले हैं.

दूसरी बार में मिली सफलता

अभिनव प्रकाश को यह सफलता दूसरी बार में हासिल हुई है. इसके लिए अभिनव प्रकाश ने कड़ी मेहनत की. 22 साल के अभिनव ने बताया कि मैं एक छोटे शहर का लड़का हूं जब मैंने दिल्ली जाकर पढ़ाई की तो मेरे सामने कई तरह की चुनौतियां थीं. रहन-सहन, भाषा आदि को लेकर भी परेशानी होती है, जिसे मैंने महसूस किया. मैंने वहां दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और फिर जेएनयू से मास्टर्स कंप्लीट किया. मैंने आईएएस की परीक्षा के लिए खान स्टडी ग्रुप ज्वाइन किया था. मैंने अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा दी और मेरा आॅप्शनल सब्जेक्ट हिस्ट्री था.

सोशल मीडिया और दोस्तों को भी दिया समय

सफलता के लिए काफी मेहनत की, लेकिन ऐसा नहीं है कि मैं दुनिया से कट गया था. मैंने सोशल मीडिया पर भी समय दिया और दोस्तों के बीच रहा, लेकिन रोज चाहे संडे हो या मंडे मैंने 8-10 घंटे पढ़ाई की. मेरे परिवार ने मेरा पूरा साथ दिया. मेरे माता-पिता किसान परिवार से हैं और उन्होंने मैट्रिक से आगे की पढ़ाई नहीं की है, लेकिन उन्होंने हमेशा मेरा मनोबल बढ़ाया और मुझे दिल्ली भेजकर पढ़ाई करवाई.

लक्ष्य तय करना बहुत जरूरी

मेरा यह मानना है कि जो भी आईएएस की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें पहले अपना लक्ष्य तय करना चाहिए. अपना शार्ट टर्म और लाॅन्ग टर्म विजन सेट करें और पूरी ईमानदारी के साथ पढ़ाई में जुट जायें. वे अगर अपने प्रति ईमानदार रहेंगे तो ऐसा संभव ही नहीं है कि वे परीक्षा पास नहीं कर पायेंगे. लेकिन आत्मानुशासन बहुत जरूरी है.

परिवार के पहले आईएएस

अभिनव प्रकाश की इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए उनके पिता मनोज सिंह ने बताया कि यह हमारे पूरे परिवार के लिए बहुत बड़ी खुशी है. हमारे परिवार में आजतक किसी ने आईएएस की परीक्षा पास नहीं की थी, इसलिए हमारे लिए यह एक उपलब्धि है. हमने पूरी कोशिश की कि अभिनव आईएएस की परीक्षा पास करे और उसने हमें खुशी दी. अभिनव प्रकाश ने 10वीं तक की शिक्षा गया के ज्ञान भारती स्कूल से प्राप्त की है. उसके बाद उन्होंने बोकारो से 12वीं की पढ़ाई की. अभिनव के परिवार में माता-पिता के अलावा एक छोटा भाई है.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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