झारखंड के स्वास्थ्य केंद्र को नहीं मिला फंड, बंद हो गया कुपोषित बच्चों का इलाज

Jharkhand News: बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण दो अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गयी थी. उक्त कुपोषण केंद्र में इंचार्ज रोशनी सहित 3 एएनएम नीलिमा वेंगरा, सुभासिनी बारीक एवं माया रानी पदस्थापित थीं. फिलहाल एमटीसी के इंचार्ज व एएनएम को कोविड टीकाकरण व लेबर रूम में ड्यूटी दे दी गयी है.

पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में संचालित कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी) फंड की कमी के कारण करीब एक माह (27 जुलाई 2022) से बंद है. यहां मुसाबनी व डुमरिया प्रखंड के कुपोषित बच्चों का इलाज होता था. केंद्र के बंद होने जाने की वजह से कुपोषित बच्चों को सरकारी चिकित्सा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. मुसाबनी सीएचसी में एमटीसी (10 बेड) का शुभारंभ 15 मार्च, 2018 को हुआ था.

  • स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से कुपोषण से लड़ाई को लगा झटका

  • एक माह से बंद मुसाबनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का कुपोषण उपचार केंद्र

  • मुसाबनी एमटीसी केंद्र के इंचार्ज व एएनएम को अन्य ड्यूटी में लगाया गया

  • आधा दर्जन कुपोषित बच्चों की माता को भोजन की राशि का नहीं हुआ भुगतान

की गयी थी दो अतिरिक्त बेड की व्यवस्था

बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण दो अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गयी थी. उक्त कुपोषण केंद्र में इंचार्ज रोशनी सहित 3 एएनएम नीलिमा वेंगरा, सुभासिनी बारीक एवं माया रानी पदस्थापित थीं. फिलहाल एमटीसी के इंचार्ज व एएनएम को कोविड टीकाकरण व लेबर रूम में ड्यूटी दे दी गयी है.

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एमटीसी को राशन देने वालों को चार माह से नहीं हुआ भुगतान

डॉ मनोज कुमार के अनुसार, एमटीसी के लिए राशन देने वालों का 4 माह से भुगतान नहीं हुआ है. दुकानदार ने और उधार देने से मना कर दिया है. एमटीसी में 0 से 6 माह और 6 माह से 59 माह तक के कुपोषित बच्चों का इलाज होता था. एमटीसी में बच्चों को टीएफ पाउडर, एफ 100, एफ 75 फीड के साथ दोपहर को कुछ बच्चों को खिचड़ी व सूजी का हलवा के साथ दिन में 3 बार दवा दी जाती थी. कुपोषित बच्चों की माताओं को प्रतिदिन एक उबला हुआ अंडा, एक केला व 130 रुपये भोजन के रूप में देने का प्रावधान है.

कुपोषित बच्चों की मां को भोजन के लिए मिलते हैं 130 रुपये

कुपोषित बच्चों के लिए पोषक आहार, राशन आदि की खरीदारी व एमटीसी में भर्ती होने वाले कुपोषित बच्चों की मां को भोजन के लिए 130 रुपये प्रतिदिन भुगतान करना होता है. फंड नहीं होने के कारण मजबूरी में केंद्र को बंद करना पड़ा है. इसकी लिखित सूचना संबंधित पदाधिकारियों को दी गयी है.

डॉ मनोज कुमार, प्रभारी, मुसाबनी सीएचसी

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