Explainer : रॉल्स रॉयस से कचरा उठवाकर राजस्थान के इस राजा ने अंग्रेजों से लिया अपमान का बदला, जानें कैसे

जब राजा कोई बात आन पर ले लेते हैं, तो वह कुछ भी कर गुजरने से बाज नहीं आते. इसमें भी खास यह कि राजा-रजवाड़ों और राजघरानों के नाम से पूरे देश में प्रसिद्ध जब राजस्थान की बात आती है, तो महाराणा प्रताप से लेकर कई राजे रजवाड़ों के किस्से कहानी वीरता और अचंभा से भरपूर है.

भारत में आन, बान, शान और अपमान का हमेशा से हिसाब रखा जाता रहा है. चाहे वह आधुनिक 21वीं सदी हो, चाहे गुलामी की जंजीर में जकड़ा हुआ देश हो या फिर प्राचीन भारत हो, हर काल और परिस्थिति में यहां के आम-ओ-खास अपनी आन-बान, शान और अपमान का हिसाब रखते आए हैं. खासकर, जब भारत के राजा-रजवाड़ों की बात आती है, तो इस मामले में तो उनकी बात ही जुदा है. भारत में आपको राजा, रजवाड़ों और जमींदारों के ऐसे किस्से मिल जाएंगे, जिसे सुन-पढ़कर आप चौंक जाएंगे. इसमें भी खास यह कि राजा-रजवाड़ों और राजघरानों के नाम से पूरे देश में प्रसिद्ध जब राजस्थान की बात आती है, तो महाराणा प्रताप से लेकर कई राजे रजवाड़ों के किस्से कहानी वीरता और अचंभा से भरपूर है. बात जब गाड़ी-घोड़ों की आती है, तो इसमें बाजी लगाने में भारतीय राजे-रजवाड़ों का कोई सानी न था. राजस्थान के एक ऐसे ही राजा थे, जिन्होंने अंग्रेजों से बदला लेने के लिए रॉल्स रॉयस जैसी महंगी कार में कचरा ढुलवा दिया था. आइए, जानते हैं कि मामला क्या था…?

कौन थे वे राजा जिन्होंने रॉल्स रॉयस से कचरा फेंकवाया

आज की डेट में करोड़ों रुपये में खरीदी बेची जाने वाली रॉल्स रॉयस से कचरा फेंकवनाने वाले राजस्थान के जिन राजा की हम बात कर रहे हैं, वे अलवर के राजा थे. उनका नाम राजा जय सिंह प्रभाकर था. अलवर के राजा जय सिंह ने ही अंग्रेजों से अपने अपमान का बदला लेने के लिए उस समय लाखों रुपये में बेची जाने वाली सबसे महंगी कार को खरीदकर उसमें कचरा भरकर फेंकवाया था. मजे की बात यह है कि उन्होंने अपने अपमान का बदला लेने के लिए उस समय रॉल्स रॉयस नई कार खरीदी और फिर उसे कचरा ढोने में लगा दिया, क्योंकि उस समय अंग्रेजों के बीच रॉल्स रॉयस आन-बान और शान की सवारी मानी जाती थी. अब सवाल यह पैदा होता है कि आखिर अलवर के राजा जय सिंह के साथ ऐसा क्या हुआ था कि उन्होंने रॉल्स रॉयस जैसी महंगी कार खरीदकर कचरा फेंकवाने में लगा दिया?

लंदन में रॉल्स रॉयस के शोरूम में हुए थे अपमानित

बात कुछ ऐसी है कि एक बार अलवर के राजा जय सिंह प्रभाकर साल 1920 के आसपास लंदन घूमने के लिए गए हुए थे. संयोग से एक दिन वे राजसी पोषाक के बिना ही लंदन की सड़कों पर साधारण कपड़ों में घूमने निकल पड़े. लंदन की सड़कों पर घूमने के दौरान उनकी नजर रॉल्स रॉयस की एक शोरूम पर पड़ गई, जो बेहद ही आकर्षक बना हुआ था. सबसे खास यह रहा कि रॉल्स रॉयस के शोरूम में प्रदर्शित करने के लिए जो मॉडल शोपीस के तौर पर लगाई गई थी, वह इतनी आकर्षक थी कि उसे देखकर राजा जय सिंह प्रभाकर अपना सुध-बुध खो बैठे. उन्हें इस बात का ख्याल ही नहीं रहा कि वे राजसी पोषाक में नहीं, बल्कि आम आदमी वाले साधारण कपड़ों में हैं. तो वे रॉल्स रॉयस के उस मॉडल की सुंदरता में मोहित होकर बेधड़क शोरूम के अंदर घुस गए. अब जब शोरूम के कर्मचारियों ने साधारण कपड़ों में एक गरीब जैसा दिखने वाला आम आदमी को शोरूम के अंदर आते हुए देखा, तो उन्होंने उन्हें बाहर जाने के लिए कह दिया. फिर क्या था, राजा का गुस्सा भभक उठा. उन्होंने उसे अपनी तौहीन समझ ली. उसी समय उन्होंने ठान लिया कि वे इस अपमान का बदला जरूर लेंगे.

राजा जय सिंह प्रभाकर ने अपमान का बदल लेने की ठानी

लंदन के रॉल्स रॉयस में हुई तौहीन को अलवर के राजा जय सिंह प्रभाकर ने दिल पर ले लिया. उसी समय उन्होंने रॉल्स रॉयस और अंग्रेजों से बदला लेने की ठान ली. इसके अगले दिन वे राजसी पोषाक में एक राजा की हैसियत से रॉल्स रॉयस के उसी शोरूम में दोबारा गए. जब तक वे शोरूम तक पहुंचते, इससे पहले ही शोरूम के कर्मचारियों को इस बात की भनक लग गई थी कि राजा जय सिंह प्रभाकर शोरूम में आ रहे हैं और कल जो साधारण कपड़ों में दिखने वाला गरीब व्यक्ति शोरूम में घुस आया था, वे राजा ही थे.

राजा जय सिंह ने एक साथ खरीदीं कई गाड़ियां

अब आगे की कहानी जानकार आप और भी चौंकेंगे. अलवर के राजा जय सिंह प्रभाकर जब दूसरे दिन लंदन के रॉल्स रॉयस के शोरूम में पहुंचे, वे राजा की हैसियत से गए. शोरूम के कर्मचारी पहले ही जान चुके थे कि राजा गाड़ी खरीदने आ रहे हैं. इसलिए अबकी बार उन कर्मचारियों ने राजा के लिहाज से उनका दिलोजान से स्वागत किया. कर्मचारियों के स्वागत को नजरअंदाज करते हुए राजा जय सिंह पहले ही की तरह शोरूम में बेधड़क घुस गए और शोरूम में घुसने के साथ ही उन्होंने बिना समय गंवाए ही रॉल्स रॉयस की कई गाड़ियों को खरीदने का ऑर्डर दे दिया. उनके इस ऑर्डर देखकर शोरूम के कर्मचारी भौंचक रह गए.

राजा ने नकद भुगतान कर खरीदीं कई गाड़ियां

मजे की बात यह है कि जब राजा कोई बात आन पर ले लेते हैं, तो वह कुछ भी कर गुजरने से बाज नहीं आते. राजा जय सिंह प्रभाकर गुस्से में तो थे ही. उन्होंने लंदन के शोरूम से रॉल्स रॉयस की कई गाड़ियों को खरीदने का ऑर्डर दे दिया था. शोरूम के कर्मचारी तब भी यही समझ रहे थे कि राजा साहब मजाक कर रहे हैं. लेकिन, जब राजा साहब ने सभी गाड़ियों की कीमत का भुगतान नकदी में की, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गई.

राजा ने नगरपालिका को सौंप दी रॉल्स रॉयस की सभी गाड़ियां

आपको यह जानकर हैरानी तब यह जानकर और बढ़ जाएगी कि जब लंदन के शोरूम में खरीदी गईं गाड़ियां अलवर पहुंची, तो राजा जय सिंह प्रभाकर ने उनमें से एक भी गाड़ी का इस्तेमाल खुद के लिए नहीं किया. उन्होंने सबकी सब महंगी गाड़ियां नगरपालिका को सौंप दीं और इसके साथ ही उन्होंने फरमान यह जारी कर दिया कि इन सभी गाड़ियों का इस्तेमाल कचरा उठाने और फेंकने में किया जाए.

जब रॉल्स रॉयस ने चिट्ठी लिखकर राजा से मांगी माफी

साल 1920 दुनिया की नंबर वन कार कंपनी को जब यह पता चला, तो उसकी पैरों तले जमीन खिसक गई. इतनी बेइज्जती? उसके बाद रॉल्स रॉयस कंपनी ने महाराजा को माफी भरा एक टेलीग्राम भेजा और लिखा की वह अपने कर्मचारियों द्वारा की गई अभद्रता के लिए शर्मिंदा है. कंपनी ने महाराजा से माफी मांगी और कहा कि आप जल्द से जल्द इन कारों को कचरों से हटा लीजिए. और तो और, रॉल्स रॉयस की छह अन्य कारें राजा को उपहार में पेश की गईं. उधर, राजा के इस कदम से अलवर में भी महाराज जय सिंह प्रभाकर के सनकीपन का मजाक उड़ने लगा लगा था. लोग कहने लगे थे कि राजा इतनी महंगी गाड़ी को कचरा फेंकवाने में भला कैसे लगा सकते हैं. इसी बीच, जब रॉल्स रॉयस की ओर से कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर चिट्ठी के रूप में माफीनामा आया, तो राजा का दिल पसीज गया और उन्होंने अपनी ओर से लिखी चिट्ठी में शोरूम के कर्मचारियों को माफ करने की बात लिखी. इसके बाद, उन्होंने रॉल्स रॉयस से कचरा फेंकवाना बंद करवा दिया.

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110 साल से कानपुर में खड़ी है सिल्वर घोस्ट रॉल्स रॉयस

दुनिया की सबसे महंगी और सबसे खूबसूरत कार सिल्वर घोस्ट रॉल्स रॉयस दुनिया के बाजार से पूरी तरह गायब हो चुकी है. साल 1912-13 इसकी महज 9 मॉडल बनाई गई थी. इसका एक मॉडल आज 110 साल बाद भी कानपुर में मौजूद है. सिल्वर घोस्ट शहर के चाटर्ड अकाउंटेंट तारिक इब्राहिम की शान है. पिछले 27 साल से बेशकीमती कार इनके घर की शोभा बढ़ा रही है. 110 साल पहले 24 जनवरी 1913 को इनकी गाड़ी रॉल्स रॉयस फैक्ट्री से बनकर बाहर आई थी. लंदन के निवासी पारशल इसके पहले मालिक थे. साल 1936 में इस कार को इनकी पत्नी के बाबा लंदन से कानपुर लेकर आए थे. यह कार तारिक के हाथों में साल 1996 में आई, जब इनके ससुर ने यह कार तोहफे में दी थी.

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लेखक के बारे में

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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