भटकती रही श्रमिक स्पेशल ट्रेनें, गोवा से 1 दिन, तो महाराष्‍ट्र से दो दिन में पहुंची उत्तर प्रदेश

गोवा से बलिया के लिए चली श्रमिक स्पेशल ट्रेन रास्ता भटककर महाराष्ट्र में भ्रमण करती रही तथा तय समय से तकरीबन 25 घण्टे बिलम्ब से रविवार को बलिया पहुंची.

बलिया उप्र : गोवा से बलिया के लिए चली श्रमिक स्पेशल ट्रेन रास्ता भटककर महाराष्ट्र में भ्रमण करती रही तथा तय समय से तकरीबन 25 घण्टे बिलम्ब से रविवार को बलिया पहुंची.

गोवा के करमाली से कामगारों को लेकर बृहस्पतिवार को बलिया के लिए चली ट्रेन रास्ता भटककर रविवार बलिया पहुंची. ट्रेन से यात्रा कर रहे मऊ जनपद के निवासी संजय चौहान और अवध कुमार ने बताया कि गोवा से यह ट्रेन गुरुवार को अपने निर्धारित समय से चली थी.

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गोवा से चलते समय वहां पर उनको खाना और पानी मिला था. उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के भुसावल से इटारसी न जाकर ट्रेन नागपुर चली गई. इसके कारण ट्रेन महाराष्ट्र के विभिन्न रूटों पर चक्कर लगाती रही.

बाद में चालक को रूट की सही जानकारी होने पर ट्रेन इटारसी पहुंची. इसके बाद इस ट्रेन ने सही रूट पकड़ा. मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि 1652 नम्बर की ट्रेन को शनिवार दोपहर 11 बजे पहुंचना था तथा यह रविवार दोपहर एक बजकर 28 मिनट पर बलिया पहुंची है.

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उपजिलाधिकारी सर्वेश कुमार यादव ने बताया कि इस ट्रेन से कुल 1,129 यात्री आये हैं , जिनमें अधिकतर यात्री बलिया के साथ ही पड़ोसी जिले मऊ और आजमगढ़ के थे. यात्रियों ने पत्रकारों को बताया कि रूट भटकने के कारण उन्हें यात्रा में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा तथा पानी तक के लिए तरसना पड़ा.

पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि रेल यातायात काफी होने के कारण श्रमिक स्पेशल ट्रेन काफी विलंब से बलिया पहुंची है.

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महाराष्ट्र से गोरखपुर दो दिन बाद पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन

महाराष्ट्र के वसई रोड रेलवे स्टेशन से गोरखपुर के लिए चली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार 1,399 यात्रियों को यह सफर ताउम्र याद रहेगा क्योंकि 25 घंटे में गंतव्य तक पहुंचाने वाली ट्रेन ने गोरखपुर पहुंचने में 60 घंटे का समय लिया. वसई रोड स्टेशन से बृहस्पतिवार को चली श्रमिक स्पेशल ट्रेन जैसे ही गोरखपुर के प्लेटफार्म नंबर-नौ पर पहुंची, यात्रियों ने राहत की सांस ली.

दरअसल, हुआ यह कि से शुक्रवार को यह ट्रेन ओडिशा के राउरकेला की तरफ मोड़ दी गई जिसकी वजह से 25 घंटे का सफर 60 घंटे की अघोषित प्रताड़ना बन गया. ट्रेन से आए सिद्धार्थनगर के विजय कुमार ने कहा कि वह पूरे जीवन इस यात्रा को नहीं भूल पाएंगे. ट्रेन लगातार गलत दिशा में ही भटकती रही. पहले झारखंड पहुंची, फिर बिहार, पश्चिम बंगाल और फिर ओडिशा पहुंच गई.

गोरखपुर के अखिलेश ने बताया कि पूरी यात्रा अजीबो-गरीब ढंग से हो गई. जब ट्रेन के गार्ड से पूछा गया कि ट्रेन कहां जा रही है तो उनका जवाब था, मुझे नहीं पता. हम सिर्फ सिग्नल का पालन कर रहे हैं. राउरकेला के स्टेशन प्रबंधक अभय मिश्रा ने बताया के विभिन्न मार्गों पर दबाव है क्योंकि बड़ी संख्या में श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चल रही है.

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