Photos : भारत की वो महिलायें, जिन्होंने अंग्रेजों से लिया लोहा, देखें तस्वीरें

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं के योगदान की बात न हो तो आजादी की कहानी अधूरी सी लगेगी. भारत की स्वतंत्रता के लिये न केवल पुरुषों ने बल्कि, कई महिलाओं ने भी अपने साहस का परचम लहराते हुए आजादी की लड़ाई में अपनी सहभागिता दी थी.

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं के योगदान की बात न हो तो आजादी की कहानी अधूरी सी लगेगी. भारत की स्वतंत्रता के लिये न केवल पुरुषों ने बल्कि, कई महिलाओं ने भी अपने साहस का परचम लहराते हुए आजादी की लड़ाई में अपनी सहभागिता दी थी. आज हम आपको भारत की कुछ ऐसी वीरांगनाओं के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने भारत की आजादी के लिये अपना अहम योगदान दिया.    

भारत में सबसे प्रतिष्ठित महिला स्वतंत्र सेनानियों में से एक बेगम हजरत महल थी उन्हें झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के समकक्ष के रूप में भी जाना जाता है. 1857 में जब विद्रोह शुरू हुआ तब वह पहली स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थी, जिन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने और आवाज उठाने के लिए राजी किया था. बेगम हजरत महल की हिम्मत का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्होंने मटियाबुर्ज में जंगे-आज़ादी के दौरान नज़रबंद किए गए वाजिद अली शाह को छुड़ाने के लिए लार्ड कैनिंग के सुरक्षा दस्ते में भी सेंध लगा दी थी.

सावित्रीबाई फुले देश की पहली महिला शिक्षिका थी. साल 1848 में महाराष्ट्र के पुणे में देश के सबसे पहले बालिका स्कूल की स्थापना इन्होंने ने ही की थी. सावित्री बाई फूले ने महिलाओं को लेकर तमाम रूढ़ियों औऱ जड़ताओं का हल शिक्षा में ढूंढ़ा औऱ समाज में शिक्षा की ज्योति जलाने की अपनी यात्रा में निकल पड़ी. भारतीय स्त्री आंदोलन की यात्रा में सावित्री बाई फूले का जीवनकर्म एक अहम कड़ी है.

भारत की कोकिला कहलाये जाने वाली सरोजिनि नायडू  एक नारीवादी, कार्यकर्ता, कवियत्री और राजनीतिक नेता थीं. वे प्रभावशाली और महिला स्वतंत्रता सेनानियों में प्रमुख महिला थी. उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिनके लिए उन्हें जेल भी हुई थी. 

उषा मेहता भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में स्वतंत्रता संग्राम की सबसे कम उम्र की प्रतिभागियों में से एक थी.वे महात्मा गांधी की अनुयायी थीं. जब यह 8 साल की थी तब इन्होंने साइमन गो बैक विरोध में भाग लिया. वह स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा नहीं बनना चाहती थी. लेकिन वह जितना हो सके उतना योगदान देना देना चाहती थी. उन्होंने पढ़ाई छोड़ने के बाद खुद को पूरी तरह से स्वतंत्रता संग्राम के लिए समर्पित कर दिया. यहां तक कि इन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ रेडियो चैनल चलाया जिसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा.

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Author: Shradha Chhetry

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