नीना गुप्ता बोली- एक्टिंग का टैलेंट साबित करने के बावजूद मसाबा को काम नहीं मिलता, 'वध' को लेकर कही ये बात

फिल्म वध काफी अलग जॉनर की है, ऐसे में शूटिंग का अनुभव कैसा रहा? इसपर नीना गुप्ता ने कहा, संजय मिश्रा मेरे को एक्टर हैं और उनका सेंस ऑफ ह्यूमर कितना कमाल का है, तो हम हंसते और मजा करते रहते थे.

अभिनेत्री नीना गुप्ता (Neena Gupta) हर प्रोजेक्ट्स के साथ अपने अभिनय की एक नयी ऊंचाई को छूती जा रही हैं. इन दिनों वह अपनी आज रिलीज हुई फिल्म वध को लेकर सुर्खियों में है. जिसमें उनके अभिनय की एक बार फिर सभी सराहना कर रहे हैं. उनकी इस फिल्म, करियर पर उर्मिला कोरी से हुई बातचीत.

फिल्म वध काफी अलग जॉनर की है, ऐसे में शूटिंग का अनुभव कैसा रहा?

स्क्रिप्ट बहुत अच्छे से लिखी हुई थी. निर्देशक अच्छे से थे. लोकेशन का चुनाव बहुत ही अच्छा था. जो कहानी के साथ पूरी तरह से मैच कर रहा था. यह फिल्म शारीरिक तौर पर ज़्यादा थका देने वाली थी गली -गली में जाकर घर था. उसकी सीढ़ी एकदम खड़ी थी. ऊपर से ग्वालियर की असहनीय गर्मी थी. जिसमे शूटिंग करना बहुत मुश्किल था, लेकिन बहुत अच्छी टीम थी, तो काम भी अच्छा हुआ. संजय मिश्रा मेरे को एक्टर हैं और उनका सेंस ऑफ ह्यूमर कितना कमाल का है, तो हम हंसते और मजा करते रहते थे.

फ़िल्म की तुलना श्रद्धा हत्याकांड से भी की जा रही है?

हमारे लोगों को कुछ काम नहीं है, जिनको काम नहीं है. वे ऐसे ही जोड़ते और तोड़ते रहेंगे.

ऐसी फिल्मों को करते हुए क्या मानसिक तौर पर आप परेशान होती है?

इसमें ऐसा कुछ नहीं था, जो मुझे डिस्टर्ब करें. मैं डिस्टर्ब तब होती हूं, जब बहुत अच्छा सीन किया हो क्योंकि फिर नींद ही नहीं आती है या मैं किसी सीन में अपने परफॉरमेंस से संतुष्ट ना होऊं. इस फिल्म में भी एक सीन से मैं संतुष्ट नहीं थी. जो अभी भी देखकर मुझे कचोटता है. असल में उस लोकेशन में काम खत्म हो गया था. वरना मैं फिर से रिशूट करने को कहती थी.

वध कहीं ना कहीं इंसान के गुस्से को भी दर्शाती है, आपको जब गुस्सा आता है, तो आप उसे कैसे जाहिर करती है?

मैं रोती हूं या फिर चिल्लाती हूं या फिर खाना शुरू कर देती हूं.

यह साल खत्म होने को है, किस तरह से इस गुज़रते हुए साल को परिभाषित करेंगी?

बहुत कमाल का रहा, मसाबा मसाबा 2, पंचायत 2, गुडबाय, ऊंचाई और वध जैसे अलग -अलग प्रोजेक्ट्स में मैं नजर आयी. ये पांच प्रोजेक्ट्स में नजर आयी और इसी साल पांच प्रोजेक्ट्स की शूटिंग भी कर ली. इससे अच्छी बात क्या हो सकती है. तीन फिल्में है और दो वेब सीरीज है. एक हार्दिक गज्जर के साथ फिल्म बा, उसमें मैं हीरोइन हूं और मेरे साथ एक डॉग है, बहुत खूबसूरत फिल्महै. लस्ट स्टोरीज के अगले सीजन की एक कहानी में दिखूंगी. जिसे आर बल्कि ने निर्देशित किया है. स्क्रिप्ट बहुत खास है उसकी. हाल ही में विजय मौर्या की फिल्म साबुन पूरी की है. एक फिल्म अनुपम खेर क़े साथ शिव शास्त्री बालबोआ है.एक वेब सीरीज डॉग्स नोट अलाउड की है. मतलब नए साल में भी मेरा अच्छा काम देखने को मिलेगा.

गुड़बाय एक बेहतरीन फ़िल्म थी, लेकिन टिकट खिड़की पर दर्शक नहीं मिले?

बहुत दुख होता है, जब इतनी अच्छी फ़िल्म को दर्शक नहीं मिलता है. ओटीटी पर वही खूब चलेगी.

आपकी मौजूदा क़ामयाबी ने आपकी फीस में कितनी बढ़ोतरी की है?

(हंसते हुए )बहुत अच्छी. अब कुछ चीजों को खरीदते हुए मुझे ये नहीं सोचना पड़ता है कि अभी लूं या एक साल रुक जाऊं. जो बहुत ही अच्छी वाली फीलिंग है.

आपकी इस क़ामयाबी पर आपकी बेटी मसाबा का क्या कहना है?

वो मेरे लिए बहुत खुश है. वो कहती है कि आप काम करना ऐसे ही जारी रखिए. कई बार किसी लम्बी आउटडोर वाली फिल्म का ऑफर आता है, तो मैं उसको बोलती हूं कि मैं फिल्म को ना बोल देती हूं, तुझे मेरी ज़रूरत लगी तो. वह कहती है कि बिल्कुल भी नहीं, मैं अपना ख्याल रख लुंगी. आप अपने काम पर फोकस कीजिए. वह जानती है कि मैं अपने काम को कितना एन्जॉय करती हूं.

मसाबा भी काफी बेहतरीन एक्ट्रेस हैं?

हां उसके एक्टिंग टैलेंट ने मुझे भी चकित कर दिया था वो और एक्टिंग करना भी चाहती है लेकिन उसे ऑफर ही नहीं मिलते है. मसाबा और मॉडर्न लव दोनों में ही सभी ने उसके काम को बहुत पसंद किया था. एक्टिंग का टैलेंट है लेकिन ऑफर नहीं है.

मौजूदा वक्त में आमिर खान के ब्रेक पर जाने से एक नयी चर्चा शुरू हो गयी है कि फिल्में ना चले तो एक्टर्स को ब्रेक पर जाना चाहिए?

आप गलत इंसान से ये सवाल पूछ रही हैँ. मेरा तो तीस सालों का ब्रेक था.अभी तो काम मिलना शुरू हुआ है. सभी की अपनी जर्नी और पसंद है. कई बार आप काम करके थक जाते है. जब मेरी शादी हुई थी, तो मैं खुश थी कि काम नहीं करुंगी क्योंकि उस वक्त डेली सोप का कल्चर शुरू हो गया था. मैं घर से सुबह 8 बजे निकलती थी और रात के11 बजे वापस आती थी. घर आकर फिर पापा और बेटी का ख्याल भी रखो. घर -गृहस्थी की बातें भी करो, तो लगता है कि थोड़ा ब्रेक ले लूं. अब आदमी ने काम ही नहीं किया तो वो काहे का ब्रेक ले.

सोशल मीडिया पर बने रहने का प्रेशर क्या आपको महसूस होता है?

मेरा सोशल मीडिया पर महिलाओं के साथ एक कनेक्शन है. मुझे लगता है कि अपने पोस्ट के जरिए मैं उनसे बात करती हूं लोगों के कमेंट पढ़कर और खुश हो जाती हूं, वे दिल से कमेंट लिखते है. वैसे मैं प्रेशर में आकर पोस्ट नहीं करती कि करना चाहिए. जब मुझे लगता है कि मुझे कुछ कहना चाहिए तो मैं पोस्ट करती हूं या मुझे लगता है कि मैं बहुत अच्छी लग रही हूं, तो थोड़ा शो ऑफ करने क़े लिए भी पोस्ट कर देती हूं

नए साल में किस तरह की फिल्मों में खुद को देखने की ख्वाहिश है?

विशलिस्ट की बात करूं, तो एक अरसे से मुझे एक्शन फिल्म करना था. हाल ही मुझे एक स्क्रिप्ट भी मिली है. पता नहीं वो कब शूटिंग फ्लोर पर होगी. मुझे कॉप भी बनने की ख्वाहिश है, लेकिन उसके लिए मेरी उम्र ज़्यादा हो गयी है. मेरी उम्र में लोग रिटायर हो जाते है. यूनिफार्म पहनकर किरदार को करना चाहती हूं.

हाल ही कहीं पढ़ा था कि आपकी ख्वाहिश एक लम्बे समय से अपने एक चैट शो को करने की रही है?

हां,बहुत टाइम पहले से मैं चाहती थी कि मेरा एक शो हो, लेकिन वो हुआ ही नहीं क्योंकि मेरे बस का नहीं कि मैं लोगों को लल्लो चप्पो करूं और कहूं कि आओ मेरे शो में, तो वो हुआ नहीं.

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लेखक के बारे में

Author: कोरी

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