माफिया मुख्तार अंसारी से मिलने बांदा जेल पहुंची बहू निखत, पोते को सीने से लगाकर बोला- मैं बदनसीब दादा हूं

बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी से उसकी बहू और पोते ने मुलाकात की. जहां पर लगभग एक घंटे की मुलाकात में पोते को देख मुख्तार ने उन्हें सीने से लगा लिया. इस मुलाकात की पुष्टि जेल अधीक्षक ने की है.

यूपी के बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी से सोमवार को उसकी बहू और पोते ने मुलाकात की. जहां पर लगभग एक घंटे की मुलाकात में पोते को देख मुख्तार ने उन्हें सीने से लगा लिया. इस मुलाकात की पुष्टि जेल अधीक्षक ने की है. मुख्तार अंसारी से मिलने के लिए अब्बास अंसारी की पत्नी यानी उसकी बहू और पोता जेल पहुंचे. जहां पर उन्होंने मुख्तार से मुलाकात की. वहीं जेल अधीक्षक ने बताया कि निखत को जेल मैनुअल के अनुसार लगभग 1 घंटे मुलाकात कराई गई है. इसके बाद वह वापस चली गईं. इस दौरान सुरक्षा को देखते हुए सभी को अलर्ट किया गया था. इस दौरान उन्होंने मीडिया के सामने भी बोलने से इंकार कर दिया. जेल प्रशासन के मुताबिक, मुलाकात के दौरान मुख्तार ने अपने पोते यानी निखत के बेटे को सीधे गोद में लेकर सीने से लगा लिया और कहा कि मैं बदनसीब दादा हूं. खुशियों की जगह तकलीफ दे रहा हूं. फिर पोते को प्यार किया. बहू निखत से कहा कि समय आने पर सब ठीक हो जाएगा, और वहीं पर सभी परिवार वालों का हाल चाल जाना. जेलर वीरेश राज शर्मा ने बताया कि निखत ने मुलाकात की अर्जी डाली थी, जिसके बाद उनकी मुलाकात मुख्तार अंसारी से हुई है. निखत के साथ उनका बेटा भी था. सीसीटीवी के साथ-साथ सभी को सुरक्षा की दृष्टि से अलर्ट किया गया था. मुलाकात के बाद वह वापस लौट गईं.

माफिया मुख्तार की जेल में एक-एक रात कट रही मुश्किल से

बता दें कि एक जमाना था जब देश विदेशों में माफिया मुख्तार अंसारी के नाम की तूती बोलती थी, लेकिन अब उसकी बादशाहत मिट्टी में मिलनी शुरू हो गई है. जानकारी के मुताबिक बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी एक-एक रात मुश्किल से कट रही है. मुख्तार मुकदमों और परिवार की टेंशन में बेचैनी से जेल में अपने दिन काट रहा है, जेल में न वो किसी से बात करता है, न कुछ और. बस एक कौने पड़ा लेटा करवटें बदलता रहता है. सुबह 5 बजे सोता है, दिन में 11 बजे जागता है. बताया जा रहा है कि वो सिर्फ पेशी के दौरान वीडियो कांफ्रेंसिंग से जज के सामने गिड़गिड़ाता है. जेल सूत्रों के मुताबिक बैरक में मुख्तार अंसारी तन्हाइयों में अपना एक- एक पल काटने को मजबूर है, एक तरफ उसे आने वाले मुकदमों में फैसले की चिंता सता रही है तो दूसरी तरफ परिवार की. काफी दिनों से उसका कोई अपना भी जेल में मिलने नहीं आया है. जिसकी वजह से वो काफी परेशान है, बस बेचैनी से दिन रात करवटें बदल रहा है. जेल में न किसी से बात करता है, न कोई डिमांड करता है, बस चेहरे में चिंता लिए बैरक में टहलता नजर आता है.

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गौरतलब है कि पंजाब की रोपड़ जेल से अप्रैल 2021 में मुख्तार को बांदा जेल लाया गया था. जिसके बाद से मुख्तार अंसारी इसी जेल में बंद है. मुख्तार को पेशी में जाने के बाद खुद के साथ अनहोनी का डर सता रहा है. जिस कारण वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी कराने की गुहार भी लगाता है. बताया जा रहा है कि इन दिनों वो आगामी मुकदमों गाजीपुर, बाराबंकी और बनारस के कोर्ट की तैयारियो में जुटा हुआ है. उम्मीद है कि इसी हफ्ते कम से कम दो कोर्ट में चल रहे मुकदमो में फैसला आ सकता है, जिसको लेकर वह दिन रात सोचता रहा है. वहीं जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि अगले कुछ दिनों में गाजीपुर, बाराबंकी और बनारस कोर्ट में चल रहे मामलों में फैसला आने की उम्मीद है, जिसे लेकर मुख्तार परेशान सा दिखता है. कोर्ट के आदेश के बाद उसकी पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग से कराई जाती है. इन दिनों मुकदमों में परेशान है, उसकी दिनचर्या भी बदली हुई है. वह सुबह 5 बजे सोता है और सुबह 11 बजे जगता है. दिनभर टहलता रहता है, टेंशन में पड़ा रहता है. सुरक्षा की दृष्टि से मुख्य गेट से लगाकर अंदर गेट में सुरक्षा व्यवस्था के पर्याप्त व्यवस्था है,सीसीटीवी के साथ हर आने जाने पर विशेष नजर है. उसकी सुरक्षा में बॉडी कैम से लैश जवान तैनात हैं. पूरे जेल कैंपस में पुलिस, सिविल पुलिस के साथ PAC के जवान तैनात हैं, मैं खुद निगरानी करता हूं. बाकी जेल मैनुअल के मुताबिक सभी बंदियों को व्यवस्थाएं उपलब्ध होती हैं.

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Author: Sandeep kumar

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