कैसे करें कलश स्थापना, जानिए पूजा विधि, पूजन सामग्री और जुड़ी बातें:
नवरात्र में माता की पूजा 9 दिनों तक की जाती है. पहली पूजा के दिन ही कलश स्थापना की जाती है. उसे ही घट स्थापना भी कहा जाता है.
कलश स्थापना विधि-
-कलश स्थापना के लिए पहली पूजा के दिन घर के एक व्यक्ति को या पंडित के द्वारा नदी से रेत मंगवाना चाहिए.
-रेत को पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर वहां रखना चाहिए.
– रेत के उपर जौ को स्थान देना चाहिए
– माता की मूर्ति को स्थान देना चाहिए
-संकल्प करके पहले गणपति व माता को स्मरण करना चाहिए.
-कलश स्थापना के लिए तांबे या मिट्टी का पात्र ही शुभ माना गया है.
-पूजन के लिए लाए कलश में गंगाजल डाल लें
-कलश में पान, सुपारी, अक्षत, हल्दी ,चंदन,रुपया, पुष्प,आम के हरे पत्ते, दूब, पंचामूल, पंचगव्य आदि डालकर कलश के मुंह को मौली धागे से बांधना चाहिए.
-कलश स्थापना के समय 7 तरह के अनाजों के साथ कलश को रेत पर स्थापित करें
-कलश की जगह पर नौ दिनों तक अखंड दीप जलता रहे
-विधिपूर्वक मां भगवती का पूजन करें तथा दुर्गा सप्तशती का पाठ करके कुमारी पूजन कराना चाहिए.
कलश स्थापना में जरूरी सामग्री –
माता की एक मूर्ति,लाल या पीला कपड़ा, माता की लाल चुनरी, कलश, आम के पत्ते, फूल माला, एक जटा वाला नारियल, पान के पत्ते,सुपारी, इलायची, लौंग,रोली,गाय का दूध,गाय का गोबर,रुपया -सिक्का ,सिंदूर,मौली (कलावा), चावल,ताजे फल, फूल माला,बेलपत्र, कपूर, घी,रुई की बत्ती, हवन सामग्री,पांच मेवा,जवारे बोने के लिए मिट्टी का बर्तन,माता के शृंगार की सामग्री इत्यादि…
कलश स्थापना के समय इन बातों का रखें ख्याल-
-कलश की स्थापित शुभ मुहूर्त में ही करें
-कलश का मुंह कभी भी खुला न रहे इसका खास ध्यान रखें
-कलश को जिस बर्तन से ढक रहे हों उस बर्तन को कभी भी खाली नहीं छोड़े , उस बर्तन को चावलों से भर दें.
-चावल के बीच में एक नारियल जरूर रखें.
-देवी को लाल फूल बहुत पसंद हैं, इसलिए उन्हे लाल फूल जरूर चढ़ाएं.
-प्रत्येक दिन मां दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करना चाहिए.