Life Style : बच्चों में बढ़ती जा रही निराशा, बात बिगड़ने से पहले बातचीत से संभाले कोमल बचपन

Life Style : बचपन हर गम से बेफिक्र होता है लेकिन हैरत और चिंता की बात है कि आज का बचपन इतना तनाव झेल रहा है. खेलने और पढ़ने की उम्र में उनके दिमाग ने आत्मघाती विचार उत्पन्न हो रहे हैं जो वाकई चिंताजनक है. इसके लिए घर- परिवार और समाज सभी को जागना होगा.

Life Style : आजकर टीवी, मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में खोए बच्चे अपने ही परिवार से कट गए हैं उनमें चिड़चिड़ापन और निराशा की समस्या बढ़ती जाा रही है वे वर्चुअली दोस्तों से अपनी बातें शेयर करते हैं लेकिन घर में माता- पिता से दूरी महसूस करते हैं और अपनी बात नहीं कह पाते. इसमें अधिक दोष बच्चों के माता पिता का है जो अपनी लाइफस्टाइल में इतना बिजी है कि अपने बच्चों के मन में क्या चल रहा है वो जान नहीं पाते. समस्या को रोकने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं

संवाद करें: बच्चों से नियमित रूप से बातचीत करें.उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें और उन्हें सुनने का मौका दें

समय दें: बच्चों को उनकी पसंदीदा गतिविधियों में समय देने का प्रयास करें. यह उनकी स्वतंत्रता और रुचि को बढ़ावा देगा

समर्थन प्रदान करें: उन्हें उनकी कामयाबियों की सराहना करें और उनकी प्रासंगिक कौशलों को प्रोत्साहित करें

सकारात्मकता को प्रोत्साहित करें: उनके सकारात्मक सोचने की क्षमता को बढ़ावा देने के लिए, उनकी उपलब्धियों को नकारात्मकता के साथ नहीं तौले

पेशेवर मार्गदर्शन: यदि आप देखते हैं कि निराशा की समस्या गंभीर हो रही है, तो एक पेशेवर सलाहकार से संपर्क करना भी विचारनीय हो सकता है.

समय-समय पर संवाद, समर्थन, और सकारात्मकता के साथ बच्चों की मानसिकता को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। यदि आपका बच्चा गंभीर निराशा के लक्षण दिखाता है, तो एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है.

रांची के तुपुदाना ओपी क्षेत्र के हुलहुंडू में स्थित एक स्कूल में कक्षा 6 की छात्रा ने छत से कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया है. यह घटना शुक्रवार की दोपहर हुई है. जहां स्कूल की छत से छात्रा ने छलांग लगा दी. आनन-फानन में स्कूल प्रबंधन के द्वारा छात्रा को धुर्वा स्थित पारस हॉस्पिटल लाया गया. छात्रा को पारस हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है. जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है.

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Author: Meenakshi Rai

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