Johnny Walker Death Anniversary:जॉनी वॉकर की पुण्यतिथि आज, कुछ ऐसा था बस कंडक्टर से कॉमेडी किंग बनने तक का सफर

आज ही के दिन दिग्गज अभिनेता जॉनी वॉकर ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था. अभिनेता ‘जो मेरे मेहबूब’, ‘सीआईडी’, ‘प्यासा’ और ‘चोरी चोरी’ जैसी लोकप्रिय फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने 1951 में गुरुदत्त की फिल्म बाजी से अभिनय की शुरुआत की.

हिंदी सिनेमा के सबसे शुरुआती और सबसे प्रसिद्ध स्टैंड-अप कॉमेडियन, जॉनी वॉकर निश्चित रूप से जानते थे कि अपने दर्शकों को कैसे हंसाना है. 11 नवंबर को जन्मे अभिनेता ने कॉमेडी के बादशाह बनने से पहले बेहद विनम्र शुरुआत की थी. जॉनी अपनी पेंसिल जैसी पतली मूंछों, अनोखी कर्कश आवाज और क्लासिक शराबी हरकतों के लिए जाने जाते थे. उन्होंने मिस्टर एंड मिसेज ’55 (1955), सी.आई.डी. (1956), और कागज के फूल (1959) जैसी फिल्मों में कामकर दर्शकों का दिल जीता. हालांकि 29 जुलाई 2003 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. अभिनेता की पुण्यतिथि पर, कॉमेडियन के बारे में जानते हैं कुछ दिलचस्प किस्सें….

बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी ऐसे बने जॉनी वॉकर

जॉनी वॉकर के नाम के पीछे काफी अनोखी कहानी है. उनका जन्म बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी के रूप में पंद्रह सदस्यों वाले परिवार में हुआ था. बाद में उन्होंने प्रसिद्ध स्कॉच व्हिस्की ब्रांड जॉनी वॉकर के नाम पर अपना नाम रखा. यह उनकी अक्सर नशे में धुत्त साइडकिक भूमिकाओं और शराबी एक्टिंग से सभी को हंसाने के कारण एक आदर्श नाम था.

बस कंडक्टर के रूप में काम करते थे जॉनी वॉकर

अपनी एक्टिंग से लोहा मनवाने वाले जॉनी वॉकर एक प्रशिक्षित अभिनेता नहीं थे. वह अपने पिता के साथ एक मिल में काम किया करते थे. हालांकि बाद में जब वह काम बंद हो गया, तो उनका पूरा परिवार बॉम्बे शिफ्ट हो गया. वहां उन्हें B.E.S.T (बॉम्बे इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट) बस सेवा में बस कंडक्टर की नौकरी मिल गई. उन्हें यात्रा के दौरान यात्रियों का मनोरंजन करने की आदत थी और ऐसी ही एक घटना के दौरान अभिनेता और लेखक बलराज साहनी की नजर उन पर पड़ी. जॉनी से प्रभावित होकर, बलराज ने तुरंत गैम्बल (1951) फिल्म में साइन कर लिया.

कॉमेडी के साथ-साथ सीरियस रोल्स में भी जॉनी वॉकर ने किया कमाल

जॉनी वॉकर अपनी कॉमेडी भूमिकाओं में असाधारण थे, उन्होंने साबित कर दिया कि अधिक गंभीर भूमिकाएं निभाने पर वह और भी बेहतर कर सकते हैं. साल 1971 में आई ‘आनंद’ में जॉनी इसाभाई सूरतवाला की भूमिका में नजर आये थे. हालांकि उनके लिए एक चुनौतीपूर्ण भूमिका थी. हालांकि जॉनी ने एक अभिनेता के रूप में अपनी उल्लेखनीय प्रतिभा दिखाई. 60 के दशक में जब अभिनेता महमूद ने कॉमेडी के किंग का खिताब अपने नाम किया तो जॉनी सिल्वर स्क्रीन से गायब होने लगे. हालांकि, उन्होंने फिल्म चाची 420 (1997) में अपने अभिनय कौशल का अंतिम प्रदर्शन किया. उन्होंने कमल हासन की फिल्म में मेकअप आर्टिस्ट की भूमिका निभाई थी. जिसमें वह एक बार फिर शराब की बोतल के साथ दिखे थे!

परिवार के खिलाफ जाकर की थी शादी

जॉनी वॉकर ने अपने परिवार के विरोध के बावजूद, भारतीय अभिनेत्री शकीला की बहन नूरजहां से शादी की. उनकी तीन बेटियां और तीन बेटे थे, जिनमें से एक अभिनेता नासिर खान हैं. इस बात का अफसोस करते हुए कि उन्हें 6वीं कक्षा में स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था, उन्होंने अपने बेटों को स्कूली शिक्षा के लिए अमेरिका भेज दिया. अक्सर एक शराबी की भूमिकाएं निभाने के बावजूद, जॉनी वॉकर ने कभी भी शराब को हाथ नहीं लगाया था. जॉनी वॉकर की बीमारी के बाद 29 जुलाई 2003 को मृत्यु हो गई. हालांकि अपने फैंस के दिलों में आज भी वह जिंदा है.

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इन फिल्मों में काम कर जॉनी वॉकर ने बनाया रिकॉर्ड

जॉनी वॉकर बी. आर. चोपड़ा की नया दौर (1957), चेतन आनंद की टैक्सी ड्राइवर (1954) और बिमल रॉय की मधुमती (1958) में अपने काम से विशेष रूप से संतुष्ट थे. उनकी अंतिम फिल्म 14 साल की अनुपस्थिति के बाद आई, जब उन्होंने मिसेज डाउटफायर के रीमेक चाची 420 (1997) में भूमिका निभाई. कुछ गाने विशेष रूप से उनके लिए लिखे गए थे. बॉक्स ऑफिस पर उनकी पकड़ ऐसी थी कि वितरक उन पर एक गाना रखने के लिए जोर देते थे और इसे सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त भुगतान करते थे. वह दूसरे अभिनेता हैं, जिनके नाम पर एक या एक से अधिक हिंदी फिल्में हैं. वह पहले अभिनेता थे जिन्होंने रविवार को काम करना बंद कर दिया था. वह सिनेमा टैक्सी ड्राइवर में बोलचाल की भाषा लाने वाले पहले अभिनेता थे. उन्होंने 1985 की फिल्म पाहुन्चे हुवे लोग का निर्माण और निर्देशन भी किया था.

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लेखक के बारे में

Published by: Ashish lata

आशीष लता हिंदी डिजिटल मीडिया की अनुभवी पत्रकार और कंटेंट स्ट्रेटेजिस्ट हैं. पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में उन्हें 8 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है. फिलहाल वह प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर और एंटरटेनमेंट हेड के तौर पर काम कर रही हैं. यहां वह बॉलीवुड, टेलीविजन, ओटीटी, वेब सीरीज, बॉक्स ऑफिस, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, एंटरटेनमेंट ट्रेंड्स और प्रीमियम डिजिटल कंटेंट पर फोकस करती हैं.

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आशीष लता ने पटना विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग, रिसर्च और जर्नलिज्म के 5Ws + 1H सिद्धांतों पर उनकी मजबूत पकड़ है. यही वजह है कि उनका कंटेंट भरोसेमंद, संतुलित और पाठकों के लिए उपयोगी माना जाता है.

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