Jitiya Vrat 2022 Date Live: मिथिला में जितिया व्रत नहाय खाय आज,अन्य जगहों पर कल, जानें मुहूर्त समेत डिटेल

Jitiya Vrat 2022 Date, Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Paran Time: जितिया व्रत की तारीख को लेकर किसी भी तरह का कंफ्यूजन है, तो यहां दूर कर लें. कुछ पंचाग के अनुसार जहां जितिया का व्रत 17 सितंबर को रखे जाने की बात की जा रही है, तो वहीं कुछ लोग उदया तिथि को मनते हुए 18 सितंबर को जीवित्पुत्रिका व्रत रखने की बात कर रहे हैं. जानें इस मतभेद की वजह और दूर कर लें सारे कंफ्यूजन. जितिया व्रत 2022 की सही तारीख, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, जितिया व्रत कथा समेत पारण का सही समय और तरीका जान लें.

Live Updates
4:13 PM. 16 Sept 22 4:13 PM. 16 Sept

जितिया व्रत 2022 शुभ मुहूर्त

काशी पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 17 सितंबर दिन शनिवार को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर होगी. वहीं, 18 सितंबर दिन रविवार की दोपहर 4 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. उदया तिथि के अनुसार, जितिया का व्रत 18 सितंबर 2022 दिन रविवार को रखा जाएगा. इस व्रत का पारण 19 सितंबर 2022 दिन सोमवार को किया जाएगा. 19 सितंबर की सुबह 6 बजकर 10 मिनट के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है.

4:13 PM. 16 Sept 22 4:13 PM. 16 Sept

Jitiya Vrat 2022: जितिया व्रत पूजा सामग्री

इस व्रत में भगवान जीमूत वाहन, गाय के गोबर से चील-सियारिन की पूजा का विधान है. जीवित्पुत्रिका व्रत में खड़े अक्षत(चावल), पेड़ा, दूर्वा की माला, पान, लौंग, इलायची, पूजा की सुपारी, श्रृंगार का सामान, सिंदूर, पुष्प, गांठ का धागा, कुशा से बनी जीमूत वाहन की मूर्ति, धूप, दीप, मिठाई, फल, बांस के पत्ते, सरसों का तेल, खली, गाय का गोबर पूजा में जरूरी है.

4:13 PM. 16 Sept 22 4:13 PM. 16 Sept

जितिया व्रत का महत्व

धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को संतान प्राप्ति, उनकी लंबी आयु और सुखी निरोग जीवन की कामना के साथ किया जाता है. इस व्रत को करने से संतान के ऊपर आने वाले कष्ट दूर होते हैं.

4:13 PM. 16 Sept 22 4:13 PM. 16 Sept

मिथिलांचल में जितिया व्रत आज से शुरू

मिथिला की महिलाएं आज, 16 सितंबर को दिन में नहाय खाय करेंगी और माछ मड़ुआ खाएंगी. 17 सितंबर के दिन शनिवार की सुबह पांच बजे ओठगन के साथ निर्जला जितिया व्रत शुरू होगी जो 18 सितंबर को दोपहर बाद साढ़े चार बजे संपन्न होगी. इस प्रकार इस साल मिथिला की महिलाओं के लिए यह व्रत लगभग 34 घंटा 53 मिनट लंबा होगा.

4:13 PM. 16 Sept 22 4:13 PM. 16 Sept

जितिया व्रत पूजा विधि

  • जितिया व्रत के पहले दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें.

  • उसके बाद पूजा करें.

  • इसके बाद महिलाएं भोजन ग्रहण करती हैं और उसके बाद पूरे दिन तक वो कुछ भी नहीं खाती.

  • दूसरे दिन सुबह स्नान के बाद महिलाएं पहले पूजा पाठ करती हैं और फिर पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं.

  • इस व्रत का पारण छठ व्रत की तरह तीसरे दिन किया जाता है.

  • पारण से पहले महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देती हैं, जिसके बाद ही वह कुछ खाना खा सकती हैं.

  • इस व्रत/त्यौहार के तीसरे दिन झोर भात, मरुआ की रोटी और नोनी का साग खाया जाता है.

4:13 PM. 16 Sept 22 4:13 PM. 16 Sept

मिथिला में जितिया व्रत नहाय खायआज, कल से शुरू होगा व्रत

मिथिला की महिलाएं 16 सितंबर को दिन में माछ मड़ुआ खाएंगी. 17 सितंबर के दिन शनिवार की सुबह पांच बजे ओठगन के साथ निर्जला जितिया व्रत शुरू होगी जो 18 सितंबर को दोपहर बाद साढ़े चार बजे संपन्न होगी. इस प्रकार इस साल मिथिला की महिलाओं के लिए यह व्रत लगभग 34 घंटा 53 मिनट लंबा होगा.

8:02 AM. 16 Sept 22 8:02 AM. 16 Sept

जिउतिया व्रत की पौराणिक कथा

गन्धर्वराज जीमूतवाहन बड़े धर्मात्मा और त्यागी पुरुष थे. युवाकाल में ही राजपाट छोड़कर वन में पिता की सेवा करने चले गए थे. एक दिन भ्रमण करते हुए उन्हें नागमाता मिली, जब जीमूतवाहन ने उनके विलाप करने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि नागवंश गरुड़ से काफी परेशान है, वंश की रक्षा करने के लिए वंश ने गरुड़ से समझौता किया है कि वे प्रतिदिन उसे एक नाग खाने के लिए देंगे और इसके बदले वो हमारा सामूहिक शिकार नहीं करेगा. इस प्रक्रिया में आज उसके पुत्र को गरुड़ के सामने जाना है. नागमाता की पूरी बात सुनकर जीमूतवाहन ने उन्हें वचन दिया कि वे उनके पुत्र को कुछ नहीं होने देंगे और उसकी जगह कपड़े में लिपटकर खुद गरुड़ के सामने उस शिला पर लेट जाएंगे, जहां से गरुड़ अपना आहार उठाता है और उन्होंने ऐसा ही किया. गरुड़ ने जीमूतवाहन को अपने पंजों में दबाकर पहाड़ की तरफ उड़ चला. जब गरुड़ ने देखा कि हमेशा की तरह नाग चिल्लाने और रोने की जगह शांत है, तो उसने कपड़ा हटाकर जीमूतवाहन को पाया. जीमूतवाहन ने सारी कहानी गरुड़ को बता दी, जिसके बाद उसने जीमूतवाहन को छोड़ दिया और नागों को ना खाने का भी वचन दिया.

8:02 AM. 16 Sept 22 8:02 AM. 16 Sept

जीवित्पुत्रिका व्रत की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत के युद्ध में जब द्रोणाचार्य का वध कर दिया गया तो उनके पुत्र आश्वत्थामा ने क्रोध में आकर ब्राह्रास्त्र चल दिया, जिसकी वजह से अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहा शिशु नष्ट हो गया. तब भगवान कृष्ण ने इसे पुनः जीवित किया. इस कारण इसका नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया. तभी से माताएं इस व्रत को पुत्र के लंबी उम्र की कामना से करने लगीं.

8:02 AM. 16 Sept 22 8:02 AM. 16 Sept

जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व

धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को संतान प्राप्ति, उनकी लंबी आयु और सुखी निरोग जीवन की कामना के साथ किया जाता है. इस व्रत को करने से संतान के ऊपर आने वाले कष्ट दूर होते हैं.

6:03 PM. 15 Sept 22 6:03 PM. 15 Sept

जीवित्पुत्रिका व्रत पूजन विधि

जितिया व्रत के पहले दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें.

उसके बाद पूजा करें.

इसके बाद महिलाएं भोजन ग्रहण करती हैं और उसके बाद पूरे दिन तक वो कुछ भी नहीं खाती.

दूसरे दिन सुबह स्नान के बाद महिलाएं पहले पूजा पाठ करती हैं और फिर पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं.

इस व्रत का पारण छठ व्रत की तरह तीसरे दिन किया जाता है.

पारण से पहले महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देती हैं, जिसके बाद ही वह कुछ खाना खा सकती हैं.

इस व्रत/त्यौहार के तीसरे दिन झोर भात, मरुआ की रोटी और नोनी का साग खाया जाता है.

6:03 PM. 15 Sept 22 6:03 PM. 15 Sept

जीवित्पुत्रिका व्रत महत्व

जीवित्पुत्रिका व्रत का संबंध महाभारत काल से है. मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान को लंबी उम्र का वरदान प्राप्त होता है. कहते हैं कि जो महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत करती हैं और कथा पढ़ती है उनकी संतान को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता. संतान की रक्षा और उसकी उन्नति के लिए ये बहुत लाभकारी माना जाता है. ये व्रत छठ की तीन दिन तक किया जाता है.पहले दिन महिलाएं नहाय खाय करती हैं. दूसरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है और तीसरे दिन व्रत का पारण करते हैं.

6:03 PM. 15 Sept 22 6:03 PM. 15 Sept

जीवित्पुत्रिका व्रत पूजा सामग्री

इस व्रत में भगवान जीमूत वाहन, गाय के गोबर से चील-सियारिन की पूजा का विधान है. जीवित्पुत्रिका व्रत में खड़े अक्षत(चावल), पेड़ा, दूर्वा की माला, पान, लौंग, इलायची, पूजा की सुपारी, श्रृंगार का सामान, सिंदूर, पुष्प, गांठ का धागा, कुशा से बनी जीमूत वाहन की मूर्ति, धूप, दीप, मिठाई, फल, बांस के पत्ते, सरसों का तेल, खली, गाय का गोबर पूजा में जरूरी है.

6:24 PM. 14 Sept 22 6:24 PM. 14 Sept

Jitiya Vrat 2022: जितिया व्रत महत्व

जितिया व्रत संतान की लंबी आयु, निरोगी जीवन और खुशहाली के लिए रखा जाता है. यह व्रत नहाए खाए के साथ शुरू होता है. दूसरे दिन निर्जला व्रत और तीसरे दिन व्रत का पारण किया जाता है.

5:30 PM. 14 Sept 22 5:30 PM. 14 Sept

Jitiya Vrat 2022: जीवित्पुत्रिका व्रत तिथि, पारण का समय

हिंदू पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर अष्टमी तिथि प्रारंभ हो रही है और 18 सितंबर को दोपहर 04 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार, जीवित्पुत्रिका व्रत 18 सितंबर को रखा जाएगा. 19 सितंबर की सुबह 06 बजकर 10 मिनट के बाद व्रत पारण कर सकते हैं.

जितिया व्रत की शुरुआत नहाय खाए से होती है.

इस साल 17 सितंबर 2022 शनिवार को नहाए खाए होगा.

18 सितंबर 2022 रविवार को निर्जला व्रत रखा जाएगा .

19 सितंबर को सूर्य उदय के बाद व्रत का पारण किया जाएगा.

4:12 PM. 14 Sept 22 4:12 PM. 14 Sept

Jitiya Vrat 2022: जितिया व्रत पूजा विधि

  • सुबह स्नान करने के बाद व्रती प्रदोष काल में गाय के गोबर से पूजा स्थल को लीपकर साफ कर लें.

  • इसके बाद वहां एक छोटा सा तालाब बना लें. फिर तालाब के पास एक पाकड़ की डाल लाकर खड़ाकर कर दें.

  • अब शालिवाहन राजा के पुत्र धर्मात्मा जीमूतवाहन की कुशनिर्मित मूर्ति जल के पात्र में स्थापित करें.

  • इसके बाद उन्हें दीप, धूप, अक्षत, रोली और लाल और पीली रूई से सजाएं.

  • अब उन्हें भोग लगाएं.

  • अब मिट्टी या गोबर से मादा चील और मादा सियार की प्रतिमा बनाएं.

  • दोनों को लाल सिंदूर अर्पित करें.

  • अब पुत्र की प्रगति और कुशलता की कामना करें.

  • इसके बाद व्रत कथा सुनें और पढ़ें.

4:12 PM. 14 Sept 22 4:12 PM. 14 Sept

Jitiya Vrat 2022: जितिया व्रत पारण करने का समय

जितिया व्रत का पारण 19 सितंबर 2022 को सुबह 06 बजकर 10 मिनट के बाद किया जा सकेगा.

1:46 PM. 14 Sept 22 1:46 PM. 14 Sept

Jitiya Vrat 2022: कैसे करते हैं जितिया व्रत

स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें. इसके लिए कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित करें. इस व्रत में मिट्टी और गाय के गोबर से चील व सियारिन की मूर्ति बनाई जाती है. इनके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है. पूजा समाप्त होने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी जाती है. पारण के बाद यथाशक्ति दान और दक्षिणा दें.

1:05 PM. 14 Sept 22 1:05 PM. 14 Sept

Jitiya Vrat 2022: काशी पंचांग से व्रत रखने वाली महिलाओं के उपवास की अवधि

काशी पंचांग के तहत व्रत करने वाली महिलाओं के लिए राहत की बात यह होगी कि उन्हें महज 25 घंटा 43 मिनट का ही व्रत रखना होगा.

1:05 PM. 14 Sept 22 1:05 PM. 14 Sept

Jitiya Vrat 2022: मिथिला की महिलाओं का उपवास 34 घंटा 53 मिनट लंबा

मिथिला की महिलाएं 16 सितंबर को दिन में माछ मड़ुआ खाएंगी. 17 सितंबर के दिन शनिवार की सुबह पांच बजे ओठगन के साथ निर्जला जितिया व्रत शुरू होगी जो 18 सितंबर को दोपहर बाद साढ़े चार बजे संपन्न होगी. इस प्रकार इस साल मिथिला की महिलाओं के लिए यह व्रत लगभग 34 घंटा 53 मिनट लंबा होगा.

12:11 PM. 14 Sept 22 12:11 PM. 14 Sept

Jitiya Vrat 2022: मिथिला में जितिया व्रत

जितिया नहाय खाय- 16 सितंबर, शुक्रवार

जितिया व्रत जिवितपुत्रिका महाअष्टमी व्रत- 17 सितंबर, शनिवार

18 सितंबर की शाम को 4 बजकर 39 मिनट के बाद पारण

इस व्रत में उनको सप्तमी युक्त अष्टमी तिथि मिलेगी. जो महिलाएं महालक्ष्मी की व्रत करती है, उनके लिए चंद्रोदय काल में अष्टमी तिथि मिल रही मिल रही है.

11:25 AM. 14 Sept 22 11:25 AM. 14 Sept

Jitiya Vrat 2022: जितिया तिथि शुरू

जितिया नहाय खाय- 16 सितंबर, शुक्रवार

जितिया व्रत जिवितपुत्रिका महाअष्टमी व्रत- 17 सितंबर, शनिवार

18 सितंबर की शाम को 4 बजकर 39 मिनट के बाद पारण

इस व्रत में उनको सप्तमी युक्त अष्टमी तिथि मिलेगी. जो महिलाएं महालक्ष्मी की व्रत करती है, उनके लिए चंद्रोदय काल में अष्टमी तिथि मिल रही मिल रही है.

11:25 AM. 14 Sept 22 11:25 AM. 14 Sept

Jitiya Vrat 2022: जितिया व्रत पारण टाइम

जितिया व्रत का पारण 19 सितंबर 2022 को सुबह 06 बजकर 10 मिनट के बाद किया जा सकेगा.

10:35 AM. 14 Sept 22 10:35 AM. 14 Sept

Jitiya Vrat 2022: इस मुहूर्त में न करें पूजन

राहुकाल- दोपहर 12 बजे से 01 बजकर 30 मिनट तक

यमगंड- सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 09 बजे तक

गुलिक काल- सुबह 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक

दुर्मुहूर्त काल- दोपहर 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक

7:10 AM. 14 Sept 22 7:10 AM. 14 Sept

नहाय खाय विधि

सप्तमी के दिन नहाय खाय का नियम होता है. बिल्कुल छठ की तरह ही जिउतिया में नहाय खाय होता है. इस दिन महिलाएं सुबह-सुबह उठकर गंगा स्नान करती हैं और पूजा करती हैं. अगर आपके आसपास गंगा नहीं हैं तो आप सामान्य स्नान कर भी पूजा का संकल्प ले सकती हैं. नहाय खाय के दिन सिर्फ एक बार ही भोजन करना होता है. इस दिन सात्विक भोजन किया जाता है. नहाय खाय की रात को छत पर जाकर चारों दिशाओं में कुछ खाना रख दिया जाता है. ऐसी मान्यता है कि यह खाना चील व सियारिन के लिए रखा जाता है.

7:10 AM. 14 Sept 22 7:10 AM. 14 Sept

जीवित्पुत्रिका व्रत तिथि, पारण का समय

हिंदू पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर अष्टमी तिथि प्रारंभ हो रही है और 18 सितंबर को दोपहर 04 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार, जीवित्पुत्रिका व्रत 18 सितंबर को रखा जाएगा. 19 सितंबर की सुबह 06 बजकर 10 मिनट के बाद व्रत पारण कर सकते हैं.

जितिया व्रत की शुरुआत नहाय खाए से होती है.

इस साल 17 सितंबर 2022 शनिवार को नहाए खाए होगा.

18 सितंबर 2022 रविवार को निर्जला व्रत रखा जाएगा .

19 सितंबर को सूर्य उदय के बाद व्रत का पारण किया जाएगा.

6:24 PM. 14 Sept 22 6:24 PM. 14 Sept

जितिया व्रत का महत्व (Significance of Jitiya Vrat)

जितिया व्रत संतान की लंबी आयु, निरोगी जीवन और खुशहाली के लिए रखा जाता है. यह व्रत नहाए खाए के साथ शुरू होता है. दूसरे दिन निर्जला व्रत और तीसरे दिन व्रत का पारण किया जाता है.

5:34 PM. 13 Sept 22 5:34 PM. 13 Sept

व्रत कैसे करें

स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें. इसके लिए कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित करें. इस व्रत में मिट्टी और गाय के गोबर से चील व सियारिन की मूर्ति बनाई जाती है. इनके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है. पूजा समाप्त होने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी जाती है. पारण के बाद यथाशक्ति दान और दक्षिणा दें.

5:34 PM. 13 Sept 22 5:34 PM. 13 Sept

3 दिन तक निर्जला उपवास रखती हैं महिलाएं

यह व्रत संतान की दीर्घायु और मंगल कामना के लिए रखा जाता है. माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और उसकी रक्षा के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. तीन दिन तक चलने वाले इस उपवास में महिलाएं जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करतीं.

1:46 PM. 14 Sept 22 1:46 PM. 14 Sept

व्रत पारण का समय

जीवित्पुत्रिका व्रत रखने वाली माताएं 19 सितंबर को सूर्योदय के बाद दोपहर 12 बजे तक पारण करेंगी. मान्यता है कि जीवित्पुत्रिका व्रत का पारण दोपहर 12 बजे तक कर लेना चाहिए.

5:34 PM. 13 Sept 22 5:34 PM. 13 Sept

इन मुहूर्त में न करें पूजन

राहुकाल- दोपहर 12 बजे से 01 बजकर 30 मिनट तक

यमगंड- सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 09 बजे तक

गुलिक काल- सुबह 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक

दुर्मुहूर्त काल- दोपहर 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक

4:12 PM. 14 Sept 22 4:12 PM. 14 Sept

Jivitputrika Vrat katha: जिउतिया व्रत की पौराणिक कथा

इस व्रत की कहानी जीमूतवाहन से जुड़ी है. गन्धर्वराज जीमूतवाहन बड़े धर्मात्मा और त्यागी पुरुष थे. इसलिए उन्होंने अपना राज्य आदि छोड़ दिया और वो अपने पिता की सेवा करने के लिए वन में चले गए थे. वन में एक बार उन्हें घूमते हुए नागमाता मिली. नागमाता विवाप कर रही थी, जब जीमूतवाहन ने उनके विलाप करने का कारण पूछा, तो उन्होंने बताया कि नागवंश गरुड़ से काफी परेशान है, वंश की रक्षा करने के लिए वंश ने गरुड़ से समझौता किया है. समझौते के अनुसार वे प्रतिदिन उसे एक नाग खाने के लिए देंगे और बदले में वो हमारा सामूहिक शिकार नहीं करेगा.

5:34 PM. 13 Sept 22 5:34 PM. 13 Sept

जितिया व्रत 2022 व्रत पारण टाइमिंग

जितिया व्रत का पारण 19 सितंबर 2022 को सुबह 06 बजकर 10 मिनट के बाद किया जा सकेगा.

2:32 PM. 13 Sept 22 2:32 PM. 13 Sept

Jitiya Vrat Katha: जितिया व्रत कथा

आपको दें कि, इस व्रत का संबंध महाभारत काल से है. एक पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत के युद्ध के समय अश्वत्थामा अपने पिता की मौत से काफी विचलित हो गया था. उसके अंदर इतनी ज्यादा नफरत पैदा हो गयी थी की उसने अपने पिता के मौत की बदला लेने के लिए रात को सो रहे द्रौपदी के पांच बेटों को पांडव समझकर उनकी हत्या कर दी. उसका मन इतने से भी जब नहीं भरा तो उसने अभिमन्यु की पत्नी के गर्भ में पल रहे उसकी संतान को भी मार डाला.

अश्वत्थामा के बढ़ते आतंक को देखकर अर्जुन ने उसे बंदी बना लिया और श्री कृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से अभिमन्यु की पत्नी के गर्भ को फिर से जीवित कर दिया. बता दें कि, अभिमन्यु की पत्नी का नाम उत्तरा था और उसने जिस संतान को जन्म दिया उसका नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया. आगे जाकर जीवित्पुत्रिका ही राजा परीक्षित के नाम से मशहूर हुए. इसके बाद से ही महिलाएं अपने संतान की लंबी उम्र के लिए जीवित्पुत्रिका का व्रत रखने लगीं. इस व्रत को मुख्य रूप से उत्तरप्रदेश और बिहार में संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है.

2:32 PM. 13 Sept 22 2:32 PM. 13 Sept

Jitiya Vrat 2022 Date: झारखंड, बिहार में जितिया व्रत कब है?

  • जिवितपुत्रिका व्रत की शुरुआत नहाय खाए से होती है.

  • इस साल 17 सितंबर 2022 दिन शनिवार को नहाए खाए होगा.

  • 18 सितंबर 2022 दिन रविवार को निर्जला व्रत रखा जाएगा.

  • 19 सितंबर को व्रत का पारण किया जाएगा.

1:16 PM. 13 Sept 22 1:16 PM. 13 Sept

Jitiya Vrat 2022 Date: मिथिला में जितिया व्रत

जितिया नहाय खाय- 16 सितंबर, शुक्रवार

जितिया व्रत जिवितपुत्रिका महाअष्टमी व्रत- 17 सितंबर, शनिवार

18 सितंबर की शाम को 4 बजकर 39 मिनट के बाद पारण

इस व्रत में उनको सप्तमी युक्त अष्टमी तिथि मिलेगी. जो महिलाएं महालक्ष्मी की व्रत करती है, उनके लिए चंद्रोदय काल में अष्टमी तिथि मिल रही मिल रही है.

1:16 PM. 13 Sept 22 1:16 PM. 13 Sept

Jitiya Vrat 2022: जितिया व्रत नहाय खाय में मछली और मडुआ रोटी खाने का रिवाज

जितिया व्रत के एक दिन पहले नहाय खाय किया जाता है. महिलाएं इस दिन मड़ुआ की रोटी और मछली बनाती हैं. इस दिन मछली खाने का महत्व है.

1:16 PM. 13 Sept 22 1:16 PM. 13 Sept

Jitiya Vrat 2022: जितिया व्रत विधि

स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.

फिर भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें.

इसके लिए कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा को धूप-दीप, चावल, पुष्प आदि अर्पित करें.

इस व्रत में मिट्टी और गाय के गोबर से चील व सियारिन की मूर्ति बनाई जाती है.

इनके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया जाता है.

पूजा समाप्त होने के बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनी जाती है.

पारण के बाद यथाशक्ति दान और दक्षिणा दें

1:16 PM. 13 Sept 22 1:16 PM. 13 Sept

मिथिला की महिलाएं 17 सितंबर को रखेंगी उपवास

मिथिलांचल और देश के अन्य हिस्सों में रहने वाली मैथिल महिलाएं 16 सितंबर को व्रत को लेकर स्नान करेंगी और 17 सितंबर को उपवास रखेंगी. इसी दिन पूजा-अर्चना करेंगी और व्रत की कथा सुनेंगी. मिथिला पंचांग के अनुसार सप्तमी युक्त अष्टमी के व्रत की महत्ता है. इस दिन दोपहर में 3:06 बजे से अष्टमी लगेगा. इसका समापन रविवार को शाम 4:39 बजे होगा. इसके बाद व्रतधारी पारणा करेंगी.

1:16 PM. 13 Sept 22 1:16 PM. 13 Sept

मातृ नवमी का श्राद्ध करने के बाद होगा नहाय खाय

मातृ नवमी का श्राद्ध भी होगा. इससे पहले 17 सितंबर को महिला इस व्रत के लिए स्नान करेंगी और अपने पितरों को जलांजलि देकर उन्हें तृप्त करेंगी. इसके बाद मडुवा रोटी, नोनी का साग, सतपुतिया की सब्जी सहित अन्य कुछ ग्रहण करेंगी और रात में ओठगन करेंगी.

1:16 PM. 13 Sept 22 1:16 PM. 13 Sept

Jitiya Vrat 2022: जीवित्पुत्रिका व्रत 18 सितंबर को

जीवित्पुत्रिका व्रत 18 सितंबर को है. वाराणसी पंचांग के अनुसार इस दिन शाम 4:39 बजे तक अष्टमी है. इस वजह से व्रत का पारण 19 सितंबर को होगा. पंचांग के अनुसार, पारणा के लिए नवमी तिथि और पूर्वाह्न के समय की महत्ता है. यही वजह है कि इसकी पारणा अगले दिन अर्थात् सोमवार को सूर्योदय के बाद होगा. इस दिन सूर्योदय 5:57 बजे होगा.

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Jivitputrika Vrat 2022: जीवित्पुत्रिका व्रत शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 17 सितंबर को दोपहर 02 बजकर 14 मिनट से हो रहा है और यह तिथि अगले दिन 18 सितंबर को शाम 04 बजकर 32 मिनट तक मान्य है. ऐसे में जीवित्पुत्रिका व्रत 18 सितंबर दिन रविवार को रखा जाएगा.

1:16 PM. 13 Sept 22 1:16 PM. 13 Sept

Jivitputrika Vrat 2022: जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व

जीवित्पुत्रिका का व्रत मुख्य रूप से वैवाहिक स्त्रियों द्वारा रखा जाता है. मान्यता है कि जो माताएं इस व्रत को करती हैं उनकी संतान की उम्र लंबी होती है और संतान को जीवन में किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता. इसके अलावा संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाली महिलाएं यदि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करती हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है.

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Jitiya Vrat 2022: जीवित्पुत्रिका व्रत तिथि, पारण का समय

पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर अष्टमी तिथि प्रारंभ हो रही है और 18 सितंबर को दोपहर 04 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि के अनुसार, जीवित्पुत्रिका व्रत 18 सितंबर को रखा जाएगा. 19 सितंबर की सुबह 06 बजकर 10 मिनट के बाद व्रत पारण कर सकते हैं.

जितिया व्रत की शुरुआत नहाय खाए से होती है.

इस साल 17 सितंबर 2022 शनिवार को नहाए खाए होगा.

18 सितंबर 2022 रविवार को निर्जला व्रत रखा जाएगा .

19 सितंबर को सूर्य उदय के बाद व्रत का पारण किया जाएगा.

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Jitiya Vrat 2022: सप्तमी से शुरू हो जाते हैं जितिया व्रत के नियम

हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखने का विधान है. जीवित्पुत्रिका व्रत को जितिया या जिउतिया व्रत के नाम से जाना जाता हैं. यह व्रत सप्तमी से शुरू होती है और नवमी तिथि को समाप्त हो जाती है. जितिया व्रत संतान की लंबी आयु के लिए माताएं रखती हैं.

मुख्य बातें

Jitiya Vrat 2022 Date, Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Paran Time: जितिया व्रत की तारीख को लेकर किसी भी तरह का कंफ्यूजन है, तो यहां दूर कर लें. कुछ पंचाग के अनुसार जहां जितिया का व्रत 17 सितंबर को रखे जाने की बात की जा रही है, तो वहीं कुछ लोग उदया तिथि को मनते हुए 18 सितंबर को जीवित्पुत्रिका व्रत रखने की बात कर रहे हैं. जानें इस मतभेद की वजह और दूर कर लें सारे कंफ्यूजन. जितिया व्रत 2022 की सही तारीख, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, जितिया व्रत कथा समेत पारण का सही समय और तरीका जान लें.

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लेखक के बारे में

By Anita Tanvi

Senior journalist, senior Content Writer, more than 10 years of experience in print and digital media working on Life & Style, Education, Religion and Health beat.

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