OTT पर क्या सेंसरशिप जरूरी है? सुनील शेट्टी बोले- आज की दुनिया में हर एक...

कुछ सालों में भारत में ओटीटी की दुनिया काफी बड़ी हो गई है. अब कई बड़े एक्टर्स इसमें एंट्री ले चुके है. लिस्ट में अजय देवगन, सोनाक्षी सिन्हा, माधुरी दीक्षित, काजोल, शाहिद कपूर जैसे एक्टर्स का नाम शामिल है.

बॉलीवुड एक्टर सुनील शेट्टी भले ही फिल्मों से दूर है, लेकिन सोशल मीडिया पर अक्सर एक्टिव रहते हैं. सुनील फिल्मों के स्क्रीनिंग, अवॉर्ड शो, रियलिटी शोज में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहते है. हालांकि एक्टर ने ओटीटी पर डेब्यू कर लिया है. ‘धारावी बैंक’ के बाद एक्टर वेब सीरीज हंटर में नजर आएंगे. इस बीच सुनील ने ओटीटी पर सेंसरशिप को लेकर बड़ी बात कह दी है.

सुनील शेट्टी बोले- आज की दुनिया में हर एक…

सुनील शेट्टी ने ओटीटी पर सेंसरशिप को लेकर कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इसकी जरूरत है. सुनील ने कहा कि, “आज की दुनिया में हर एक चीज की थीन लाइन है. उदाहरण के लिए, यदि आप कबाड़ बेचने के क्षेत्र में सेंसरशिप न होने का फायदा उठा रहे हैं, तो यह उचित नहीं है. जब उम्र और कंटेंट की बात आती है तो प्रतिबंध बहुत अधिक होने चाहिए. ”

मैं ऐसा कंटेंट नहीं दिखाऊंगा…

सुनील शेट्टी ने आगे कहा, अगर ये एक्स्ट्रीम है और ये किसी व्यक्ति, धर्म या किसी चीज को नुकसान पहुंचा रहा है या पारिस्थितिकी तंत्र में गड़बड़ी पैदा कर रहा है, तो यह उचित नहीं है. आपको नैतिक रूप से जिम्मेदार होना होगा. मैं ऐसा कंटेंट नहीं दिखाऊंगा या उसका हिस्सा नहीं बनूंगा. ऐसा कहा जा रहा है कि, सेंसरशिप आज एक बहुत ही कठिन प्रक्रिया है. आप क्या सेंसर करते हैं? क्या नहीं? इसलिए, आपको नैतिक रूप से जिम्मेदार होना होगा.”

क्या ओटीटी पर सेंसरशिप जरूरी है?

कुछ सालों में भारत में ओटीटी की दुनिया काफी बड़ी हो गई है. अब कई बड़े एक्टर्स ने इसमें एंट्री ले चुके है. लिस्ट में अजय देवगन, सोनाक्षी सिन्हा, माधुरी दीक्षित, काजोल, शाहिद कपूर जैसे एक्टर्स का नाम शामिल है. जहां एक तरफ दर्शक अलग कंटेंट को पसन्द कर रहे है तो कुछ लोग इसमें गाली-गलौच, अश्लीलता और बिना रोक टोक के दिखाए जा रहे कंटेंट पर सवाल उठा रहे है. ऐसे में क्या ओटीटी पर सेंसरशिप जरूरी है?

सेंसरशिप क्या है?

फिल्मों को सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले सीबीएफसी यानी सेंसर बोर्ड फॉर फिल्म का सर्टिफिकेट लेना पड़ता है. फिल्म में दिखाए गए कंटेंट के आधार पर सेंसर बोर्ड उसे सर्टिफिकेट देता है. जिसके बाद तय होता है कि मूवी किस वर्ग के दर्शक के लिए है. ऐसे में सेंसरशिप एक ऐसा जरिया है जो इस बात की जांच करता है कि पब्लिक डोमेन में क्या प्रसारित हो सकता है.

सेंसरशिप क्या काम करता है?

  • सेंसरशिप आपत्तिजनक सामग्री को सेंसर करने का काम करता है.

  • सेंसर बोर्ड चार सर्टिफिकेट जारी करता है, जिसमें ‘U’, ‘UA, ‘A’, और ‘S’ कैटगरी होती है.

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लेखक के बारे में

Author: Divya Keshri

दिव्या केशरी प्रभात खबर डिजिटल में सीनियर कंटेंट राइटर और एंटरटेनमेंट टीम की लीड हैं। वह साल 2020 में प्रभात खबर डिजिटल से जुड़ी थीं और तब से लगातार एंटरटेनमेंट बीट पर काम कर रही हैं। पिछले 7 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय दिव्या ग्लैमर, सिनेमा, टीवी और OTT की दुनिया को करीब से कवर कर रही हैं। उनकी खास रुचि फिल्मों की थ्रोबैक स्टोरीज, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, BTS अपडेट्स, गॉसिप और टीवी-वेब सीरीज से जुड़ी खबरों में है। दिव्या ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से एडवरटाइजिंग एंड पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स किया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ईटीवी भारत से की, जहां उन्हें हर बीट पर काम करने का मौका मिला। इस दौरान उन्होंने कई खास पैकेज तैयार किए और झारखंड से जुड़े अलग-अलग विषयों पर काम किया। खबरों को आसान और असरदार तरीके से पेश करना उन्होंने वहीं सीखा। इसके बाद दिव्या प्रभात खबर डिजिटल से जुड़ीं और अब एंटरटेनमेंट टीम को लीड कर रही हैं। फिल्मों, टीवी सीरियल्स और OTT प्लेटफॉर्म्स से जुड़े ट्रेंडिंग विषयों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। दिव्या का मानना है कि एंटरटेनमेंट की खबर सिर्फ जानकारी देने के लिए नहीं होती, बल्कि पाठकों से जुड़ने का माध्यम भी होती है। यही वजह है कि वह फिल्मों, टीवी और OTT से जुड़ी हर खबर को आसान, साफ और दिलचस्प अंदाज में लिखने की कोशिश करती हैं, ताकि पाठक खबर को सिर्फ पढ़ें नहीं, बल्कि उससे जुड़ाव भी महसूस करें। फिल्म रिव्यू, ट्रेलर एनालिसिस और बॉक्स ऑफिस रिपोर्टिंग उनके पसंदीदा विषयों में शामिल हैं।

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