गैर जिम्मेदाराना बयान

उदयनिधि एक जिम्मेदार पद पर आसीन हैं और जनता के प्रतिनिधि हैं. ऐसे में उन्हें ऐसी कोई बात कहने से पहले अच्छी तरह विचार करना चाहिए जिससे किसी को ठेस लग सकती है.

प्यार-मोहब्बत जैसे इस दुनिया की एक सच्चाई है, वैसे ही घृणा-नफरत भी एक सच्चाई है. ये कोमल और कठोर भावनाएं हमारे आस-पास मंडराती रहती हैं. सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप के दौर में खुद को बेहतर, दूसरे को नीचा दिखाने की तो होड़ लगी रहती है, लेकिन यही व्यवहार यदि जिम्मेदार पद पर बैठा कोई व्यक्ति करे, तो यह चिंता की बात हो जाती है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन के सनातन पर दिये गये बयान का सबसे गंभीर पहलू यही बात है. वह न केवल मुख्यमंत्री के बेटे हैं, बल्कि तमिलनाडु सरकार में मंत्री भी हैं. वह तमिलनाडु की एक बड़ी पार्टी डीएमके के नेता हैं. वह एम करुणानिधि के पोते हैं, जो पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. ऐसे में उदयनिधि जब कोई बात करते हैं, तो उनका आचरण सोशल मीडिया पर हल्की बातें करने वाले लोगों जैसा नहीं रह जाता.

उदयनिधि एक जिम्मेदार पद पर आसीन हैं और जनता के प्रतिनिधि हैं. ऐसे में उन्हें ऐसी कोई बात कहने से पहले अच्छी तरह विचार करना चाहिए, जिससे किसी को ठेस लग सकती है. उन्होंने सनातन को लेकर जो बात कही है, उसके मूल में वही भावना है, जो नफरत की असल वजह है यानी कि मैं बेहतर हूं, दूसरे दोयम दर्जे के हैं. ऐसे में कई राजनेताओं का उदयनिधि के बयान की निंदा करना एक उचित कदम है. उनके विरोधी और खास तौर पर भारतीय जनता पार्टी के नेता न केवल डीएमके, बल्कि उनके सहयोगियों को भी आड़े हाथों ले रहे हैं. खास तौर पर उन विपक्षी दलों के लिए मुश्किल खड़ी हो गयी है, जो आगामी आम चुनाव से पहले गोलबंद होने की मुहिम चला रहे हैं. कांग्रेस के कर्ण सिंह जैसे वरिष्ठ नेता ने खुल कर उदयनिधि के बयान पर आपत्ति प्रकट की है.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी उदयनिधि के बयान से खुद को अलग कर लिया है, मगर कांग्रेस ने अभी तक आधिकारिक तौर पर गोल-मोल बात की है. कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी मुख्यालय में कहा कि कांग्रेस सर्व धर्म समभाव में विश्वास रखती है, लेकिन हर राजनीतिक दल को अपनी बात रखने की आजादी है. कांग्रेस की तुलना में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बयान ज्यादा सीधा लगता है. उन्होंने कहा है कि वह तमिलनाडु और दक्षिण भारत का सम्मान करती हैं, मगर उनको भी सबका सम्मान करना चाहिए. जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को गैर-जिम्मेदार बयानों से बचना चाहिए. ऐसे बयानों से आम जनों की छोटी जरूरतों से जुड़े बड़े मुद्दे पीछे छूट जाते हैं.

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