Prabhat Khabar Exclusive: इंसान की लालच ने नदियों को संकट में डाला, कई तरह से हो रहा है दोहन

Prabhat Khabar Exclusive: झारखंड के गढ़वा जिला के डंडई प्रखंड अंतर्गत जरही पंचायत में स्थित चमरदाही नदी, तसरार की झवा नदी, डंडई की डान्डु व यूरिया नदी, पचौर की नकछोलवा नदी, तसरार की औरैया नदी का निरंतर अतिक्रमण हो रहा है. नदियों में कचरा का अंबार पड़ा है. यह पर्यावरण को दूषित कर रहा है.

Prabhat Khabar Exclusive: नदियां प्रकृति की अनुपम देन हैं. इसे संरक्षित करने की जरूरत है, क्योंकि यह जीवनदायिनी है. लेकिन, लगातार नदियों को प्रदूषित (River Pollution) किया जा रहा है. शहर और उद्योगों के कचरे इसमें डाले जा रहे हैं. इतना ही नहीं, अपनी लालच को पूरा करने के लिए नदियों के किनारे ईंट-भट्ठा तक खड़ा कर दिया गया है. कचरा, नाली का गंदा पानी इसमें डाला जाता है, सो अलग. यह नदी पर एक तरह का अत्याचार है. झारखंड में भी नदियों पर खूब अत्याचार हो रहा है. इसे रोकने और नदियों को बचाने (Save River) की जरूरत है.

गढ़वा में इन नदियों के तट का हो रहा है अतिक्रमण

झारखंड के गढ़वा जिला के डंडई प्रखंड अंतर्गत जरही पंचायत में स्थित चमरदाही नदी, तसरार की झवा नदी, डंडई की डान्डु व यूरिया नदी, पचौर की नकछोलवा नदी, तसरार की औरैया नदी का निरंतर अतिक्रमण हो रहा है. नदियों में कचरा का अंबार पड़ा है. यह पानी को प्रदूषित कर रहा है. पर्यावरण को भी दूषित कर रहा है.

Also Read: Prabhat Khabar Special: संकल्प लें, जल संसाधन को मानेंगे संपदा, नदियों का करेंगे संरक्षण स्थानीय स्तर पर गौण है नदी प्रदूषण का मुद्दा

हाल के दिनों में नदियों के प्रदूषण का मुद्दा जोर-शोर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा है. नदियों को प्रदूषण से बचाने की पहल भी हो रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा गौण है. न तो आम लोगों को नदियों की चिंता है, न ही प्रशासनिक अधिकारियों को इस तरफ ध्यान देने की फुर्सत है.

नदियों पर दबाव बढ़ा रहा इंसानी लालच

इंसान की लालच ने नदियों पर दबाव बढ़ा दिया है. प्रदूषण और नदियों के तट पर अतिक्रमण की वजह से नदियों को तो नुकसान हो ही रहा है, पर्यावरण को भी बड़े पैमाने पर क्षति हो रही है. इसे रोकने के लिए बड़े पैमाने पर आम लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है.

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प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों के साथ बहती झारखंड समेत देश-दुनिया की नदियां कठोर और त्वरित कार्रवाई का आह्वान कर रही हैं. डंडई के अंचल अधिकारी चोनाराम हेम्ब्रम ने इस संबंध में पूछे जाने पर कहा कि इस संबंध में जल्द ही जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. लोगों को नदी को स्वच्छ रखने के लिए जागरूक किया जायेगा.

धरती के चारों ओर पानी का विशाल भंडार

बता दें कि हमारे ग्रह के 70 फीसदी हिस्से पर पानी ही पानी है. बाकी 30 फीसदी हिस्से पर धरती, जंगल, पहाड़ आदि हैं. पानी का इतना विशाल भंडार होने के बावजूद लोगों को पीने के लिए पर्याप्त जल नहीं मिल पा रहा है. लोग नदी-नालों का प्रदूषित पानी पीने को विवश हैं.

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धरती पर जितना पानी उपलब्ध है, उसमें से सिर्फ एक फीसदी पानी ही पीने योग्य है. ये पानी नदी, नालों, तालाब और कुआं में हैं. ऐसे में अगर हमने नदियों को नष्ट कर दिया, तो आने वाले दिनों में भू-गर्भ का जलस्तर घटता चला जायेगा और कालांतर में पेयजल की किल्लत हो जायेगी. जब पानी नहीं होगा, तो निश्चित तौर पर लोगों का जीवन खतरे में पड़ जायेगा.

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रिपोर्ट- रमेश कुमार, डंडई, गढ़वा, झारखंड

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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