Govinda Naam Mera Review: बस नाम भर ही है, गोविंदा की कॉमेडी का जादू है नदारद

Govinda Naam Mera Review: 90 के दशक में अभिनेता गोविंदा का सिक्का हिंदी सिनेमा पर चलता था. उन्हें किंग ऑफ़ कॉमेडी फिल्म कहा जाता था. धर्मा प्रोडक्शन की विक्की कौशल स्टारर कॉमेडी फिल्म का नाम 'गोविंदा मेरा नाम' है. जिससे उम्मीद बंधी थी कि यह हल्की -फुल्की कहानी वाली फिल्म जबरदस्त मनोरंजन करेंगी.

फ़िल्म-गोविंदा नाम मेरा

निर्माता -धर्मा प्रोडक्शन

निर्देशक -शशांक खेतान

कलाकार -विक्की कौशल, कियारा आडवाणी, भूमि पेंडेकर, अमेय, रेणुका शाहणे , दयानन्द शेट्टी और अन्य

प्लेटफार्म – डिज्नी प्लस हॉटस्टार

रेटिंग – दो

90 के दशक में अभिनेता गोविंदा का सिक्का हिंदी सिनेमा पर चलता था. उन्हें किंग ऑफ़ कॉमेडी फिल्म कहा जाता था. धर्मा प्रोडक्शन की विक्की कौशल स्टारर कॉमेडी फिल्म का नाम गोविंदा मेरा नाम है. जिससे उम्मीद बंधी थी कि यह हल्की -फुल्की कहानी वाली फिल्म जबरदस्त मनोरंजन करेंगी. फिल्म से अभिनय के कई भरोसेमंद नाम भी जुड़े हैं, लेकिन फिल्म नाम बड़े दर्शन छोटे वाला मामला ही साबित होती है.यह फिल्म बस नाम भर की ही गोविंदा है. परदे पर गोविंदा की कॉमेडी फिल्मों वाला जादू नदारद है. वैसे पूरी फिल्म में विक्की कौशल के किरदार को गोविंदा नाम के बजाय गोविन्द, गोंदया, गोवि जैसे नामों से बुलाया जाता है, जिससे फिल्म के किरदार को दिक्कत है, लेकिन असल में यही नाम इस बेदम कहानी और उसके कमज़ोर ट्रीटमेंट के साथ न्याय करता है.

एंटरटेनमेंट गायब है इस कहानी से

फिल्म का नाम गोविंदा है, तो कहानी भी गोविंदा ( विक्की कौशल )की होगी. पेशे से डांसर गोविंदा खुद को कोरियोग्राफर बताता है, कहानी पर आते हैं वह एक बुरी शादी में फंसा हुआ है. उसकी पत्नी गौरी (भूमि ) आए दिन उसे परेशान करती रहती है. उसे सुकून अपनी को डांसर सुकू (कियारा आडवाणी )में मिलता है. दोनों शादी करना चाहते हैं लेकिन गौरी तलाक के लिए दो करोड़ मांगती है. इतने पैसे गोविंदा के पास नहीं है, असल दिक्कत मगर ये नहीं है. गोविंदा के लिए असली दिक्कत उसका 150 करोड़ का बंगला है. जिस पर उसके सौतले भाई ने कोर्ट में दावा किया है. कहानी का यह एंगल रोहित शेट्टी की ज़िन्दगी से प्रेरित है. कैसे वह फिल्म देखने पर आपको समझ आ जाएगा. 150 करोड़ के बंगले का विवाद, पति, पत्नी और वो के साथ -साथ कहानी में मर्डर, ड्रग, धोखा और एक मास्टर प्लान भी हैं. यह सब होते हुए भी यह कहानी एंटरटेन नहीं कर पाती हैं.

यहां हो गयी है चूक

निर्देशक शशांक खेतान की कोशिश एक मसाला एंटरटेनर फिल्म देने की थी, लेकिन फिल्म का फर्स्ट हाफ बहुत स्लो हैं, फर्स्ट हाफ में मन में यही सवाल चलता रहता है कि आखिरी यह फिल्म कहना क्या चाहती है. सेकेंड हाफ में कहानी में ट्विस्ट एंड टर्न आते हैं, वो थोड़े समय के लिए फिल्म में आपकी रूचि जगाते हैं, लेकिन क्लाइमेक्स तक आते -आते फिल्म एक बार फिर औंधे मुंह गिर जाती है. फिल्म को वर्तमान और अतीत के साथ -साथ बार -बार जोड़ा गया है.फिल्म का यह नरेशन भी अखरता है. फिल्म में जरुरत से ज्यादा सिनेमेटिक लिबर्टी ली गयी है. मर्डर दिखाया गया है, लेकिन कहानी में वह गहरे या कॉमिक सिचुएशन दोनों नहीं ला पाया है. कॉमेडी फिल्म की सबसे बड़ी ज़रूरत उसके संवाद होते हैं. फिल्म के संवाद मुश्किल से हंसाते हैं.फिल्म की लम्बाई दो घंटे की है, लेकिन फिल्म की एडिटिंग बेहद निराशाजनक है. कई दृश्यों का दोहराव भी हुआ है. गीत-संगीत औसत हैं, राहत की बात ये है कि ये सिचुएशनल है.

अभिनय में हुई है अच्छी कोशिश

अभिनय की बात करें तो यह फिल्म विक्की कौशल की फिल्म है. अब तक ज़्यादातर सीरियस किरदारों में नज़र आ चुके विक्की कौशल ने इस फिल्म में कुछ अलग करने की कोशिश की है, लेकिन कमज़ोर स्क्रीनप्ले उनके किरदार को निखरने का मौका नहीं देता है. कियारा आडवाणी अपने अभिनय से प्रभावित करती है. भूमि के लिए फिल्म में करने को कुछ खास नहीं था. रेणुका शाहणे, दयानन्द शेट्टी, अमेय , तृप्ति सहित बाकी के कलाकारों ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है.

देखें या ना देखें

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लेखक के बारे में

Author: कोरी

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