थिएटर में बेल बॉटम की रिलीज में नुकसान है लेकिन हमेशा बात पैसों की नहीं होती है- अक्षय कुमार

अक्षय कुमार की फ़िल्म बेल बॉटम सिनेमाघरों में रिलीज हो गयी है. एक अरसे बाद सिनेमाघरों में किसी फिल्म ने दस्तक दी है उनकी इस फ़िल्म और उससे जुड़े दूसरे पहलुओं पर हुई बातचीत के प्रमुख अंश

Akshay kumar interview : अक्षय कुमार की फ़िल्म बेल बॉटम सिनेमाघरों में रिलीज हो गयी है. एक अरसे बाद सिनेमाघरों में किसी फिल्म ने दस्तक दी है उनकी इस फ़िल्म और उससे जुड़े दूसरे पहलुओं पर हुई बातचीत के प्रमुख अंश

बेल बॉटम असल घटना पर आधारित है आप इस घटना से पहले से वाकिफ थे?

मुझे फ़िल्म से पहले सिर्फ इतना मालूम था कि 1984 में एक हाईजैकिंग हुई थी बस. फ़िल्म की कहान,स्क्रीनप्ले और अखबार की कटिंग की वजह से मैं इस घटना को करीब से जान पाया. यह फ़िल्म 80 प्रतिशत असल घटना पर आधारित है. बेलबॉटम का किरदार दो लोगों को मिलाकर बनाया गया है.

यह बॉलीवुड की पहली फ़िल्म है जिसकी शूटिंग लॉक डाउन में हुई थी उस अनुभव को कैसे करेंगे?

उसका पूरा क्रेडिट निर्माता वाशु भगनानी को जाता है. जब इंडस्ट्री क्या पूरी दुनिया रुकी हुई थी. उन्होंने फिल्म की शूटिंग का फैसला किया. स्कॉटलैंड में हमारी फ़िल्म की शूटिंग हुई थी कोई भी प्रभावित नहीं हुआ था. मैं तो फ़िल्म के अंदर रिस्क लेता हूं. वाशु भगनानी असल में रिस्क लेते हैं. वो असल जिंदगी के अक्षय कुमार हैं. लोग चांदिवली को स्विट्ज़रलैंड बताते हैं अपनी फिल्मों में हमने स्कॉटलैंड को भारत बना दिया था. एक बात और शेयर करना चाहूंगा कि आज बेल बॉटम रिलीज हो रही है और 20 तारीख यानी कल से मैं वाशु भगनानी की अगली फिल्म की शूटिंग कर रहा हूं. मुझे मेरे पैसे भी मिल गए हैं. बस शूटिंग शुरू करनी है.

आप एक बार एक अनसंग हीरो की कहानी इस फ़िल्म के ज़रिए कह रहे है क्या आपको लगता है कि ऐसी कहानियां आज की युवा पीढ़ी को सुनानी ज़रूरी है?

आज की नहीं हर पीढ़ी को सुनायी जानी चाहिए. जिससे हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाए. हम सभी को प्रेरणा की ज़रूरत होती है. इतिहास की किताबों से हम कई नायकों से रूबरू होते रहे हैं. उनके बारे में पढ़कर प्रेरित रहे हैं लेकिन और भी बहुत सारे नायक रहे हैं. इतनी कहानियां हैं. उनको दिखाने में शायद मेरी ज़िंदगी कम पड़ जाए लेकिन जब भी मौका मिलेगा मैं ऐसे नायकों की कहानियों को कहता रहूंगा. मुझे बहुत अच्छा लगता है. फ़िल्म एयरलिफ्ट से लोगों ने जाना कि इराक से उस वक़्त 1 लाख 70 हज़ार भारतीय लाए गए थे. जो बहुत बड़ी घटना थी.

महाराष्ट्र में फ़िल्म रिलीज नहीं हुई है वहां के दर्शकों को आप क्या कहना चाहेंगे?

हमारे मुख्यमंत्री जी सोच समझकर ही सिनेमाघरों को अभी शुरू नहीं करने का फैसला किया है ताकि कोविड के केसेज ना बढ़े. महाराष्ट्र में सिनेमाघर शुरू होने पर हम इस फ़िल्म को थिएटर में फिर रिलीज करेंगे ताकि वहां के दर्शक फ़िल्म को देख पाए.

अक्षय आप फ़िल्म में काफी फिट नज़र आ रहे हैं ऐसा लग रहा है कि बीस साल तक और आपका करियर चलने वाला है?

काफी समय के बाद मुझे इतना बेहतरीन कॉम्पलिमेंट मिलेगा. 30 साल तो इंडस्ट्री में हो गए हैं. 20 साल और गुजारना मुश्किल है लेकिन मैं पूरी कोशिश करूंगा. मैं जब से इंडस्ट्री में आया हूं मैं ये कमेंट करता रहा हूं कि जब तक शूटिंग का हिस्सा बन सकता हूं बनता रहूंगा.

कल से आप वाशु भगनानी की जिस फ़िल्म की शूटिंग करने वाले हैं उसके बारे में कुछ बताइए?

यह एक थ्रिलर फिल्म है. मेरे अपोजिट रकुल प्रीत होंगी. फिलहाल मैं यही बता पाऊंगा.

फ़िल्म निर्देशक रंजीत की पिछली फिल्म मुम्बई सेंट्रल सफल नहीं थी फिर भी आपने उनकी इस फ़िल्म में विश्वास जताया?

सफलता असफलता की बात नहीं है. बात ये है कि आप किस तरह से अपना गेम खेल रहे हो उसमें कितना अपना एफर्ट लगा रहे हैं. ये महत्वपूर्ण है।एक भूख होनी चाहिए अच्छा करने की. किसी प्रोजेक्ट को अपना 1000 गुना बेस्ट देने की. मैंने यही बात रंजीत में देखी.

महाराष्ट्र के थिएटर बन्द होने के बावजूद आपने अपनी फिल्म को थिएटर में रिलीज करने का वादा निभाया है?

वाशु भगनानी और उनकी टीम ने जंग पड़ी बोट को फिर से शुरू किया है. नुकसान है ये हमें पता है. बात पैसे की हमेशा नहीं होती है लेकिन चीज़ें शुरू होनी भी ज़रूरी है. हमें खुशी है कि हमने ये शुरू किया. ज़िन्दगी में बैलेंस ज़रूरी है ओटीटी,सैटेलाइट के साथ साथ थिएटर भी शुरू होने चाहिए. जब सब बन्द था तो मैंने खुद अपनी लक्ष्मी को ओटीटी पर रिलीज की थी.

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Author: कोरी

Published by: Prabhat Khabar

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