Diwali 2021: इलेक्ट्राॅनिक आइटम के कारण घटने लगी मिट्टी दीये की डिमांड, लातेहार के कुम्हार परेशान

इलेक्ट्राॅनिक और चाइनिज आइटम के डिमांड से इनदिनों मिट्टी निर्मित दीये व खिलौने के मांग कम होने लगी है. इसके कारण लातेहार के कुम्हारों के चाक की रफ्तार भी धीमी पड़ने लगी है. डिमांड कम होने से कुम्हारों के सामने आर्थिक समस्या भी उत्पन्न होने लगी है.

Jharkhand News (आशीष टैगोर, लातेहार) : दीपावली नजदीक है. कुम्हार के चाक भी तेज रफ्तार से घूम रही है. लेकिन, लातेहार के कुम्हारों के चाक में ब्रेक लग रहा है. कारण है इलेक्ट्रॉनिक सामानों के कारण मिट्टी के दीये के डिमांड में कमी आना. जिले के कुम्हार जहां पहले लाखों-लाख दीये बनाते थे, वहीं अब 30 से 40 हजार में ही सिमट गया है. बढ़ती महंगाई के कारण डिमांड में कमी आने से इन कुम्हारों की आर्थिक स्थिति भी डगमगाने लगी है.

चाइनीज लाइट एवं अन्य उत्पादों ने मिट्टी शिल्पकारों (कुम्हार) की रोजी-रोजगार और आमदनी को काफी प्रभावित किया है. विगत कई वर्षों से चाइनीज लाइटों समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक निर्मित सामानों ने दीपावली में मिट्टी के दीयों का स्थान ले लिया है. अब दीपावली में अधिकांश लोगों के घरों में रंग-बिरंगी चाइनीज लाइट जलते हैं. सस्ता और हर दुकान पर उपलब्ध होने के कारण लोग बरबस इस ओर आकर्षित होते हैं.

यही कारण है कि दीपावली के मौके पर लाखों की संख्या में मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हार बदहाल हैं. शहर के गुरुद्वारा रोड में कई कुम्हार परिवार मिट्टी के दीये, घड़े व सुराही बना कर अपना जीवन यापन करते हैं. लेकिन, आज इन कुम्हारों की स्थिति पहले जैसी नहीं है.

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यहां वर्षों से दीये बनाने वाले गिरजा प्रजापति कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता से मिट्टी के दीये बनाना सीखा था. पहले मिट्टी के दीयों की काफी डिमांड थी, लेकिन अब पहले डिमांड नहीं रही. उन्होंने बताया कि पहले दीपावली के 70 से 75 हजार दीये बनाते थे, लेकिन अब तो 10 से 15 हजार दीये में ही पूरे दीपावली का व्यवसाय सिमट जाता है.

उन्होंने कहा कि अगर लोगों को चाइनीज लाइटों के प्रति इसी प्रकार का रुझान रहा, तो धीरे-धीरे मिट्टी के दीये का व्यवसाय सिमट जायेगा. कहा कि लोग अब बस रस्म अदायगी के लिए ही मिट्टी के दीये खरीदते हैं. मिट्टी के दीयों की लागत भी अब अधिक हो गयी है. कोयला व लकड़ी अब महंगे हो गये हैं. इस कारण दीयों की लागत भी अधिक हो गयी है.

गुरुद्वारा रोड के ही सुरेश प्रजापति ने कहा कि चाइनीज लाइट आ जाने से उनका व्यवसाय मंद पड़ गया है. इस व्यवसाय से अब घर-परिवार चलाना एवं बच्चों को पढ़ाना-लिखाना मुश्किल हो गया है. शहर के बाइपास चौक में इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान चलाने वाले अविनाश कुमार कहते हैं कि चाइनीज लाइट सस्ता होता है और लोग इसे एक बार खरीदने के बाद कई वर्षों तक इसका प्रयोग कर सकते हैं. इस कारण लोग चाइनीज समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान लेना पंसद करते हैं.

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Posted By : Samir Ranjan.

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