Covid19 Pandemic: बंगाल के बुजुर्गों को उम्मीद, जल्द खत्म होगा कोरोना वायरस का संकट

Covid19 Pandemic: Bengal's elderly hope that coronavirus crisis will end soon. बंगाल के बुजुर्गों को उम्मीद, जल्द खत्म होगा कोरोना वायरस का संकट : कोलकाता : वर्ष 1929 की वैश्विक मंदी (1929 Global Slowdown) से लेकर 1947 में भारत के विभाजन (Partition of India), 1943 में बंगाल में पड़े अकाल (1943 Drought in Bengal) और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम (Bangladesh Mukti Sangram) तक देख चुके पश्चिम बंगाल (West Bengal) के कुछ सबसे बुजुर्ग लोगों ने कोरोना वायरस (Coronavirus Outbreak) को लेकर दुनियाभर में छाये संकट (Coronavirus Crisis) से शीघ्र निकलने की उम्मीद जतायी है. अपने जीवन के 100 वसंत पार कर चुके या उनके करीब पहुंच चुके कोलकाता (Kolkata) के ये बुजुर्ग कोविड-19 महामारी (Covid19 Pandemic) को लेकर बिल्कुल भी विचलित नहीं हैं. उन्हें उम्मीद है कि दुनिया और देश इस संकट से जल्द ही निकल जायेगा.

कोलकाता : वर्ष 1929 की वैश्विक मंदी (1929 Global Slowdown) से लेकर 1947 में भारत के विभाजन (Partition of India), 1943 में बंगाल में पड़े अकाल (1943 Drought in Bengal) और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम (Bangladesh Mukti Sangram) तक देख चुके पश्चिम बंगाल (West Bengal) के कुछ सबसे बुजुर्ग लोगों ने कोरोना वायरस (Coronavirus Outbreak) को लेकर दुनियाभर में छाये संकट (Coronavirus Crisis) से शीघ्र निकलने की उम्मीद जतायी है. अपने जीवन के 100 वसंत पार कर चुके या उनके करीब पहुंच चुके कोलकाता (Kolkata) के ये बुजुर्ग कोविड-19 महामारी (Covid19 Pandemic) को लेकर बिल्कुल भी विचलित नहीं हैं. उन्हें उम्मीद है कि दुनिया और देश इस संकट से जल्द ही निकल जायेगा.

अपने समय के लोकप्रिय शास्त्रीय गायक, 104 वर्षीय दिलीप कुमार रॉय (Dilip Kumar Roy) ने अपने गरियाहाट निवास से फोन पर कहा, ‘मैं बहुत बीमार हूं. मैं अपने अंतिम दिन गिन रहा हूं. लेकिन, मुझे उम्मीद है कि दुनिया इस संकट से निकल जायेगी, जैसा कि अतीत में कई बार हुआ है.’ हालांकि, श्री रॉय ने कहा कि उन्होंने कभी भी इतने लंबे समय तक का बंद नहीं देखा.

जादवपुर विश्वविद्यालय Jadavpur University) के छात्रों के पूर्व डीन 99 वर्षीय हिमेंदु बिश्वास (Himendu Biswas) का कहना है कि लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से सुबह की सैर और अखबार पढ़ने की उनकी दैनिक क्रियाएं प्रभावित हुई हैं. श्री बिस्वास ने बताया, ‘समाचार पत्रों से अपडेट प्राप्त करने की मेरी दिनचर्या प्रभावित हुई है, क्योंकि मैंने एक युवा लड़के को काम पर रखा था, जो हर दिन आता था और मेरे लिए अखबार पढ़ता था. लेकिन मैं महत्वपूर्ण समाचारों के लिए टेलीविजन चैनल देख लेता हूं.’

पूर्व शिक्षक अशोक रॉय (99) का कहना है कि उन्होंने इससे पहले ऐसा बंद नहीं देखा. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति तो तब भी नहीं थी, जब जापानियों ने हवाई हमले किये थे और सेना के जवानों ने लोगों के बाहर निकलने पर रोक लगा दी थी. उन्होंने कहा कि लोगों को बेघर और गरीबों को खाना खिलाते हुए देखकर अच्छा लगता है. वर्ष 1943 के अकाल के दौरान मैं भी अपने कुछ दोस्तों के साथ लोगों के बीच खिचड़ी बांटता था.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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