कोरोना से जंग : कोरोना के संक्रमित व संदिग्ध की होगी काउंसिलिंग

कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश को लॉक डाउन कर दिया गया है. पश्चिम बंगाल में भी यह संक्रमण तेजी से फैल रहा है. इसके फैलाव को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से सभी मेडिकल कॉलेजों व जिला स्तर के अस्पतालों में फीवर क्लिनिक खोले गये हैं

शिव कुमार राउत, कोलकाता : कोरोना वायरस का संक्रमण दुनिया भर में तेजी से फैल रहा है. पूरी दुनिया में इसे लेकर आतंक की स्थिति देखने को मिल रही है. हर दिन दुनिया भर में हजारों नये मामले सामने आ रहे हैं, जबकि सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है. दुनिया के कई शहरों और पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति देखने को मिल रही है. भारत भी कोरोना वायरस की चपेट में आ चुका है. देश में कोरोना का पहला मामला 19 मार्च को चंडीगढ़ में सामने आया था.

कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश को लॉक डाउन कर दिया गया है. पश्चिम बंगाल में भी यह संक्रमण तेजी से फैल रहा है. इसके फैलाव को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से सभी मेडिकल कॉलेजों व जिला स्तर के अस्पतालों में फीवर क्लिनिक खोले गये हैं. वहीं देश के सबसे पुराने चिकित्सा शिक्षण संस्थान कलकत्ता मेडिकल कॉलेज सभी तीन हजार बेडों पर कोरोना पीड़ितों की चिकित्सा की जायेगी. इस बीच कोरोना के संक्रमण को बढ़ते देख राज्य सरकार की ओर से जल्द एक और पहल की जायेगी.

कोरोना संक्रमित व होम क्वारेंटाइन में रखे गये लोगों को जल्द स्वस्थ करने के लिए इनकी काउंसिलिंग करने की योजना पर सरकार कार्य कर रही है. गौरतलब है कि कुछ अस्पतालों के फीवर क्लिनिक में बुखार को लेकर आने वाले मरीजों की काउंसलिंग भी की जा रही है. इस विषय में महानगर के विशिष्ट मनोवैज्ञनिक डॉ अभिषेक हंस के अनुसार कोरोना के इस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन काफी महत्वपूर्ण है. इससे देश को कितना फायदा हो रहा यह अगले सप्ताह तक देखने को मिल सकता है. कोरोना से बंगाल में भी एक की मौत हो चुकी है.

जबकि सैकड़ों संदिग्ध अस्पताल पहुंच चुके हैं. ऐसे में लोगों के मन में इस बीमारी को लेकर खौफ है. कई लोगों के मानसिक रूप से बीमार पड़ने की आशंका है. इसकी बानगी हाल ही में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में देखी जा चुकी है जब एक कोरोना संदिग्ध ने खुदकुशी कर ली थी. इसे देखते हुए मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है. कमजोर इच्छाशक्ति वाले लोगों को इस बीमारी से लड़ने में दिक्कत होगी. इसके इलाज में काफी सब्र की जरूरत है.

यह तभी संभव है जब मरीज मानसिक रूप से स्वस्थ रहे. काउंसिलिंग के जरिए साइको थैरेपी दी जाती है. कोरोना पीड़ित मरीज व संदिग्धों को इलाज के साथ लगातार काउंसिलिंग किये जाने की जरूरत है. डॉ हंस ने बताया कि फिलहाल फीवर क्लिनिक में आने वाले मरीजों का ही काउंसिलिंग किया जा रहा है. लेकिन आने वाले कुछ दिनों में अगर कोरोना पीड़ितों की संख्या बढ़ती है, तो इन मरीजों की काउंसिलिंग की जायेगी, ताकि इस संक्रमण से पीड़ित लोगों को तनाव मुक्त होकर जल्द स्वस्थ हो जाये.

कोर्टिसोल हार्मोन हमें बनाता है बीमार

डॉ हंस ने बताया कि जब हम तनाव में रहते हैं तो हमारे शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का श्राव होता है. यह हार्मोन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देते हैं. रोग प्रतिरोधक क्षमता के कम होने से कोरोना मरीजों को इस संक्रमण से लड़ने में परेशानी होगी.

ऐसे की जायेगी काउंसिलिंग

डॉ हंस ने बताया होम क्वारेंटाइन या अस्पताल में भर्ती कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट किट की आवश्यकता होती है. लेकिन इस किट की सप्लाई पहले से ही काफी कम है. ऐसे में काउंसिलिंग के लिए इस पोशाक की जरूरत नहीं. किट न हो तो विडियो कॉलिंग के जरिए भी काउंसिलिंग की जा सकती है. इससे कोरोना पीड़ित मरीज जल्द स्वस्थ हो कर घर लौट सकते हैं. उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज जहां फिलहाल केवल कोरोना पीड़ित मरीजों का ही इलाज किया जायेगा, वहां भर्ती कराये जाने वाले मरीजों को काउंसिलि करने के लिए सरकार की ओर से अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया गया है.

महामारी की दहशत को ऐसे दूर करें

कोरोना से बचने के लिए खुद को स्वच्छ रखें. लोगों से दूरी बनाकर रखें, लेकिन दिमाग में इन चीजों को न बैठायें. बीमारी को लेकर चिंता करने से कोई समाधान नहीं होगा. इस समय समाज से दूरी और एकांत जरूरी है. एकांत में रहने पर भी अपने आपको कहीं न कहीं व्यस्त रखें. इसके तमाम विकल्प मौजूद हैं. घर के काम कर सकते हैं. टीवी व मोबाइल से मनोरंजन हासिल कर सकते हैं. परिवार के साथ गपशप कर सकते हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Pritish Sahay

Published by: Prabhat Khabar

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >