छत्तीसगढ़ : इस तरह बढ़ते गये उम्मीदवार, जानें किस चुनाव में कितने की हुई जमानत जब्त

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में साल-दर-साल उम्मीदवारों की संख्या बढ़ती गई. अब तक प्रदेश में अब तक चार बार चुनाव हुए हैं. इनमें किस तरह उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी या घटी, उसका पूरा आंकड़ा यहां देखें.

Chhattisgarh Election 2023 : छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में हर बार उम्मीदवारों की संख्या बढ़ती गयी. लेकिन, वर्ष 2023 के चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या में गिरावट आई है. इस बार 1,181 प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं. पहले चरण में सात नवंबर को वोटिंग है, जिसमें 20 विधानसभा सीट पर 223 उम्मीदवार खड़े हैं, जबकि 17 नवंबर को होने वाली दूसरे चरण की वोटिंग में 958 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं. मध्यप्रदेश से अलग होकर अस्तित्व में आने वाले इस प्रदेश में पहली बार 90 सीटों पर वर्ष 2003 में विधानसभा के चुनाव कराये गये थे. इसमें 819 उम्मीदवार मैदान में थे. 757 पुरुष और 62 महिला. इनमें से 85 पुरुष और 5 महिलाओं ने जीत दर्ज की. 615 की जमानत जब्त हो गयी. 568 पुरुष उम्मीदवारों को अपनी जमानत गंवानी पड़ी, तो 47 महिलाओं को.

महिला उम्मीदवारों की संख्या हो गई 94

वर्ष 2008 में वर्ष 2003 की तुलना में ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतरे. इस बार उम्मीदवारों की संख्या 1066 हो गयी. महिला और पुरुष दोनों उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी. इस बार 972 पुरुषों ने चुनाव लड़ा, तो चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर 94 हो गयी. महिला उम्मीदवारों की संख्या डेढ़ गुणा हो गयी. वहीं, चुनाव जीतने वाली महिलाओं की संख्या में 100 फीसदी से ज्यादा इजाफा हुआ. इस बार 11 महिलाओं ने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की. पुरुष विधायकों की संख्या 79 रही. 796 पुरुष और 73 महिला समेत 871 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गयी.

2013 में हुए चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या घटी

अब बात करते हैं वर्ष 2013 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की. इस बार उम्मीदवारों की संख्या में थोड़ी गिरावट आयी. पुरुष उम्मीदवार भी कम रहे और महिला उम्मीदवार भी. पहली बार दो थर्ड जेंडर के उम्मीदवारों ने भी चुनाव लड़ा. हालांकि, इन दोनों की जमानत जब्त हो गयी. 901 पुरुष, 83 महिला समेत 986 उम्मीदवार मैदान में थे. इनमें से 80 पुरुष और 10 महिला ने विधानसभा का चुनाव जीता. 735 पुरुष और 59 महिला समेत 796 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गयी.

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2018 के चुनाव में चार थर्ड जेंडर उम्मीदवार

वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव हुए, सबसे ज्यादा 1269 उम्मीदवार मैदान में उतरे. इसमें चार थर्ड जेंडर के उम्मीदवार भी थे. पुरुष उम्मीदवारों की संख्या पहली बार एक हजार को पार कर गई. इस बार पुरुष प्रत्याशियों की संख्या 1133 और महिलाओं की संख्या 132 रही. इनमें से 77 पुरुष और 13 महिलाओं ने जीत दर्ज की. सभी चार थर्ड जेंडर के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. 957 पुरुष और 102 महिला समेत 1063 उम्मीदवारों को अपनी जमानत गंवानी पड़ी.

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90 सीटों पर होती है वोटिंग

बता दें कि छत्तीसगढ़ में 90 सीटों के लिए विधानसभा चुनाव कराए जाते हैं. एक सदस्य को मनोनीत किया जाता है. छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद से अब तक चार बार विधानसभा के चुनाव कराए गए हैं. इसमें तीन बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार बनी है. डॉ रमन सिंह हर बार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने. वर्ष 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी का सूपड़ा साफ कर दिया था. वर्ष 2013 में 49 सीट जीतने वाली बीजेपी 15 सीट पर सिमट गई थी.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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