Amjad Khan Death Anniversary: अगर ये एक्टर हां कह देते तो अमजद खान कभी नहीं बन पाते गब्बर सिंह,जानें ये किस्सा

रमेश सिप्पी की फिल्म शोले तो लगभग सभी देखी ही होगी. फिल्म में गब्बर सिंह का किरदार को दर्शक आज भी पसंद करते है. लेकिन क्या आपको पता है कि इस रोल के लिए अमजद खान मेकर्स की पहली पसंद नहीं थे. उनकी पुण्यतिथि पर जानिये ये किस्सा...

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमजद खान का 27 जुलाई 1992 को 51 साल की उम्र में मुंबई में निधन हो गया. उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई. अभिनेता को लोकप्रिय रूप से शोले के गब्बर सिंह के रूप में याद किया जाता है, जो 1975 में रिलीज़ हुई थी. अमजद खान ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की थी और उन्हें ‘नाजनीन’ और ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ जैसी फिल्मों में देखा गया था. बाद में, 1973 में, उन्होंने ‘हिंदुस्तान की कसम’ से अपनी शुरुआत की और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज उनकी पुण्यतिथि पर हम आपको उनके जीवन की कुछ दिलचस्प बातें बताएंगे.

अमजद खान शोले के लिए नहीं थे मेकर्स की पहली पसंद

अमजद खान फिल्म शोले में गब्बर सिंह का किरदार निभाकर अमर हो गये. फिल्म में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी और जया बच्चन मुख्य भूमिका में थे. उनका डायलॉग ‘कितने आदमी थे’, ‘मां बच्चों को कहती है ‘सो जाओ नहीं तो गब्बर आ जाएगा’ सदाबहार डायलॉग्स में से एक है. उन्हें हिंदी सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रसिद्ध खलनायकों में से एक माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गब्बर सिंह के लिए अमजद खान को कैसे चुना गया? जावेद अख्तर उनकी जगह किसी और को लेना चाहते थे.

गब्बर सिंह के लिए ये एक्टर थे मेकर्स की पहली पसंद

अमजद खान रमेश सिप्पी की प्रतिष्ठित फिल्म ‘शोले’ में गब्बर सिंह का प्रतिष्ठित किरदार निभाने के लिए पहली पसंद नहीं थे. यह भूमिका पहले डैनी डेन्जोंगपा को मिली थी, जो कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार निर्देशक की पहली पसंद थे. हालांकि, अभिनेता को यह भूमिका गंवानी पड़ी, क्योंकि वह तब अफगानिस्तान में फिरोज खान की ‘धर्मात्मा’ की शूटिंग कर रहे थे. विशेष रूप से, संजीव कुमार और अमिताभ बच्चन, ने भी घातक डाकू ‘गब्बर सिंह’ की भूमिका निभाने की गहरी इच्छा व्यक्त की थी. हालांकि उन्हें ये रोल नहीं मिला और उन्होंने बाद में ‘ठाकुर’ और ‘जय’ की भूमिका निभाई थी.

कैसे सेलेक्ट हुए अमजद खान

साल 2020 के एक इंटरव्यू में रमेश सिप्पी ने खुलासा किया कि उन्होंने ‘गब्बर सिंह’ के रोल के लिए अमजद को क्यों चुना. रमेश ने खुलासा किया था कि उन्होंने अमजद खान को स्टेज पर परफॉर्म करते देखा था. इसी दौरान उन्हें लगा कि उनका व्यक्तित्व और आवाज ‘गब्बर सिंह’ की भूमिका के लिए एकदम परफेक्ट है. उन्होंने कहा, ”मुझे याद है कि मैंने उनकी की एक हरकत देखी थी. उनका चेहरा, व्यक्तित्व, आवाज सब कुछ ठीक लग रहा था. हमने उन्हें दाढ़ी बढ़ाने के लिए कहा, उन्हें कपड़े पहनाए, तस्वीरें लीं. वह कैरेक्टर में बिल्कुल परफेक्ट दिखे.” फिल्म में अमिताभ और अमजद खान के अलावा धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जया भादुड़ी, एके हंगल, सचिन, असरानी, ​​मैक मोहन और हेलेन भी थे.

अमजद खान के बारे में

दिग्गज अभिनेता अमजद खान का जन्म 12 नवंबर 1940 को हुआ था. उन्होंने अपने 20 साल के फिल्मी करियर में 132 से अधिक फिल्मों में काम किया है. वह अभिनेता जयंत के बेटे थे. उन्होंने ज्यादातर हिंदी फिल्मों में खलनायक भूमिकाओं के लिए लोकप्रियता हासिल की, जिनमें सबसे प्रसिद्ध 1975 की क्लासिक शोले में गब्बर सिंह और मुकद्दर का सिकंदर (1978) में दिलावर की भूमिका थी. फिल्मों में आने से पहले एक्टर एक थिएटर एक्टर थे. उनकी पहली भूमिका 11 साल की उम्र में 1951 में फिल्म नाज़नीन में एक बाल कलाकार के रूप में थी. उनकी अगली भूमिका 17 साल की उम्र में फिल्म अब दिल्ली दूर नहीं (1957) में थी. उन्होंने 1960 के दशक के अंत में फिल्म लव एंड गॉड में के. आसिफ की सहायता की और फिल्म में एक संक्षिप्त भूमिका निभाई. 1971 में आसिफ की मृत्यु के बाद यह फिल्म अधूरी रह गई और अंततः 1986 में रिलीज़ हुई. 1973 में, वह हिंदुस्तान की कसम में एक छोटी भूमिका में दिखाई दिए.

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कैसे हुआ अमजद खान का निधन

1972 में, अमजद खान ने शैला खान से शादी की और अगले वर्ष, उन्होंने अपने पहले बच्चे शादाब खान का स्वागत किया. उनकी एक बेटी, अहलम खान और एक और बेटा, सीमाब खान भी है. अहलम ने 2011 में लोकप्रिय थिएटर अभिनेता जफर कराचीवाला से शादी की. 1976 में अमजद खान की मुंबई-गोवा राजमार्ग पर एक गंभीर दुर्घटना हुई, जिससे उनकी पसलियां टूट गईं और उनका फेफड़ा फट गया. वह अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘द ग्रेट गैम्बलर’ की शूटिंग में भाग लेने जा रहे थे. जुलाई 1992 में, 51 वर्ष की काफी कम उम्र में, दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई.

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लेखक के बारे में

Author: Ashish Lata

आशीष लता डिजिटल मीडिया की अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के साथ एंटरटेनमेंट हेड के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया इंडस्ट्री में करीब 7 साल का अनुभव रखने वाली आशीष ने एंटरटेनमेंट से लेकर देश-दुनिया और विभिन्न राज्यों की खबरों पर गहराई से काम किया है. बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से जुड़ी खबरों के कंटेंट प्रोडक्शन में भी उनकी मजबूत पकड़ रही है. वह खबरों को आसान, रोचक और पाठकों की रुचि के अनुसार पेश करने के लिए जानी जाती हैं. एंटरटेनमेंट जर्नलिज्म में आशीष की खास दिलचस्पी सिनेमा और सितारों की दुनिया से जुड़ी खबरों में रही है. वह बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री की थ्रोबैक स्टोरीज, BTS अपडेट्स, सेलेब्रिटी गॉसिप, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट, टीवी शोज, वेब सीरीज और स्टार इंटरव्यू जैसे विषयों पर लगातार लिखती रही हैं. इसके अलावा स्पेशल और प्रीमियम न्यूज कंटेंट तैयार करने में भी उनकी खास विशेषज्ञता मानी जाती है. उनकी राइटिंग स्टाइल में फैक्ट्स, एंटरटेनमेंट वैल्यू और रीडर्स फर्स्ट अप्रोच का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है. आशीष लता ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्लस न्यूज से की थी. यहां उन्होंने बिहार में एंकर और रिपोर्टर के रूप में काम करते हुए कई महत्वपूर्ण ग्राउंड रिपोर्ट्स कीं. इस दौरान उन्होंने अशोक चौधरी और नगर निगम अध्यक्ष जैसे कई प्रमुख नेताओं के इंटरव्यू भी किए. शुरुआती दौर में रिपोर्टिंग और फील्ड जर्नलिज्म के अनुभव ने उनकी लेखन शैली और न्यूज प्रेजेंटेशन को और मजबूत बनाया. इसके बाद आशीष ने एबीपी न्यूज और ईटीवी भारत जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में रहते हुए उन्होंने न्यूज कवरेज, डिजिटल कंटेंट और एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग के कई अलग-अलग फॉर्मेट्स पर काम किया. लगातार बदलते डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स को समझते हुए उन्होंने अपने कंटेंट को हमेशा ऑडियंस फ्रेंडली और SEO ऑप्टिमाइज्ड बनाए रखा. पटना में जन्मी आशीष लता की शुरुआती पढ़ाई पटना सेंट्रल स्कूल, सीबीएसी से हुई. इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया किया. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मीडिया अनुभव उन्हें हिंदी पत्रकारिता के उन मूल सिद्धांतों की मजबूत समझ प्रदान करते हैं, जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल 5Ws+1H यानी पर आधारित न्यूज राइटिंग के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.

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