AC पर स्टार रेटिंग से भी ज्यादा जरूरी है ये छोटा सा नंबर, ज्यादातर लोग करते हैं नजरअंदाज

AC खरीदते वक्त सिर्फ स्टार रेटिंग देखकर फैसला लेना सही नहीं होता. असली समझ ISEER वैल्यू से मिलती है. यह बताती है कि AC कितनी स्मार्ट तरीके सेबिजली खर्च करता है. अगर आप बिजली बिल बचाना चाहते हैं, तो सालाना kWh खपत और ISEER नंबर को जरूर तुलना करें.

ISEER Number: भारत में इस समय गर्मी अपने पूरे शबाब पर है और इसी वजह से AC की डिमांड भी आसमान छू रही है. बहुत से लोग या तो नया AC खरीद रहे हैं या फिर बेहतर कूलिंग के लिए अपना पुराना मॉडल अपग्रेड कर रहे हैं. लेकिन इस भीड़-भाड़ में एक चीज जो खरीदार पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं, वो है ISEER रेटिंग.

अक्सर लोग सिर्फ एनर्जी स्टार (Energy Star) देखकर ही सोच लेते हैं कि उन्होंने अच्छा और किफायती AC चुन लिया है. ये बात काफी हद तक सही भी होती है, लेकिन असली कहानी सिर्फ स्टार्स पर खत्म नहीं होती. दरअसल, स्टार रेटिंग के नीचे जो ISEER वैल्यू होता वही आपको बताता है कि AC असल में कितनी एफिशिएंसी से बिजली खर्च करके कूलिंग देगा. 

एनर्जी स्टार से ज्यादा जरूरी होती है ISEER नंबर

AC पर जो स्टार रेटिंग दी जाती है, वो Bureau of Energy Efficiency (BEE) द्वारा एक सिंपल स्कोर की तरह तय की जाती है, जो ISEER नाम के एक माप पर बेस्ड होती है. आसान भाषा में समझें तो स्टार्स को आप स्कूल के ग्रेड की तरह मान सकते हैं, जबकि असली नंबर यानी ISEER यह बताता है कि आपने कितने मार्क्स पाए हैं. यानी ऐसा भी हो सकता है कि दो अलग-अलग 5-स्टार AC दिखने में एक जैसे लगें, लेकिन उनकी ISEER वैल्यू अलग-अलग हो. इसलिए अगली बार जब आप AC देखें, तो सिर्फ स्टार्स पर नहीं, उसके पीछे छिपे ISEER नंबर पर भी जरूर ध्यान दें.

ISEER रेटिंग काम कैसे करता है?

ISEER असल में यह बताता है कि एक AC पूरे सीजन में कितनी बिजली खर्च करके कितना कूलिंग देता है. यानी ये कोई एक समय का रीडिंग नहीं होता, बल्कि पूरी गर्मी या कूलिंग सीजन के हिसाब से इसकी परफॉर्मेंस को मापा जाता है. इसमें सीधी-सी बात है. जितना बड़ा नंबर, उतना बेहतर AC. जैसे अगर किसी AC का ISEER 5.8 है, तो वह 4.9 वाले AC की तुलना में कम बिजली में ज्यादा कूलिंग देगा, भले ही दोनों पर 5-स्टार रेटिंग ही क्यों न लिखी हो.

BEE लेबल को सही तरीके से कैसे पढ़ें?

आखिर में सबसे जरूरी सवाल यही है कि BEE लेबल को सही तरीके से कैसे पढ़ना है? तो हर AC पर जो BEE एनर्जी लेबल होता है, उसमें तीन चीजें मुख्य होती हैं. पहला स्टार रेटिंग, दूसरा ISEER वैल्यू और तीसरा सालाना बिजली खपत (kWh में). इनमें से सबसे काम की चीज है सालाना बिजली खपत, क्योंकि यही आपको असली अंदाजा देती है कि AC चलाने में कितना खर्च आएगा. बस इस नंबर को अपने इलाके की बिजली दर (प्रति यूनिट कीमत) से गुणा कर दीजिए, और आपको लगभग साल भर का बिजली बिल समझ आ जाएगा.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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