आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट डिवाइस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी को लेकर भी नई चिंताएं सामने आ रही हैं. इसी बीच अमेरिका ने विदेशी निर्मित रोबोट और सोलर पावर इन्वर्टर को लेकर बड़ा कदम उठाया है. ट्रंप प्रशासन ने ऐसे नए डिवाइसों की एंट्री पर रोक लगाने का फैसला किया है, जब तक कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जांच में सुरक्षित साबित न हो जाएं. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इंटरनेट से जुड़े ये उपकरण संवेदनशील जानकारी जुटाने, साइबर हमलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
किन डिवाइसों पर लागू होगा नया नियम?
'द स्टेट्समैन' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने विदेशी निर्मित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले एडवांस रोबोट और पावर इन्वर्टर को अपनी "Covered List" में शामिल कर लिया है. इसके बाद इन श्रेणी के नए मॉडल तब तक अमेरिकी बाजार में आयात, बिक्री या मार्केटिंग के लिए मंजूरी नहीं पा सकेंगे, जब तक उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर विशेष अनुमति नहीं मिल जाती.
इस फैसले का दायरा मोबाइल रोबोट, ह्यूमनॉइड रोबोट, चार पैरों वाले रोबोट और ऐसे पावर इन्वर्टर तक फैला है, जो सोलर सिस्टम और अन्य ऊर्जा परियोजनाओं को बिजली ग्रिड से जोड़ते हैं और जिनमें रिमोट कनेक्टिविटी मौजूद होती है.
अमेरिका को क्यों है जासूसी और साइबर हमलों का डर?
अमेरिकी एजेंसियों की समीक्षा में यह आशंका जताई गई है कि इंटरनेट से जुड़े रोबोट और स्मार्ट इन्वर्टर साइबर हमलों का जरिया बन सकते हैं. अधिकारियों का कहना है कि ऐसे डिवाइस दूर से नियंत्रित किए जा सकते हैं, उनसे डेटा एकत्र किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर बिजली नेटवर्क को भी प्रभावित किया जा सकता है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एडवांस रोबोट अपने आसपास के माहौल और लोगों से जुड़ा काफी डेटा इकट्ठा करते हैं. अगर यह जानकारी गलत हाथों में पहुंचती है तो इसका इस्तेमाल निगरानी, विदेशी खुफिया गतिविधियों या रोबोट को दूर से नियंत्रित करने जैसी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है.
पहले खरीदे गए डिवाइस पर नहीं पड़ेगा असर
FCC ने साफ किया है कि यह फैसला केवल नए मॉडल पर लागू होगा. जिन रोबोट और इन्वर्टर को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है या जिन्हें उपभोक्ता पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं, उन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.
यानी मौजूदा ग्राहकों को अपने डिवाइस बदलने की जरूरत नहीं होगी. साथ ही जिन उत्पादों को पहले FCC की मंजूरी मिल चुकी है, उनकी बिक्री भी जारी रह सकेगी.
कंपनियों के पास रहेगी मंजूरी लेने की सुविधा
विदेशी कंपनियां पूरी तरह से अमेरिकी बाजार से बाहर नहीं होंगी. यदि कोई निर्माता यह साबित कर देता है कि उसका उत्पाद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है, तो वह विशेष छूट के लिए आवेदन कर सकता है.
संबंधित अमेरिकी एजेंसियां सुरक्षा जांच के बाद ऐसे उत्पादों को सशर्त मंजूरी दे सकती हैं. मंजूरी मिलने पर संबंधित डिवाइस को Covered List से बाहर रखा जा सकेगा और उसे FCC की स्वीकृति मिल सकती है.
तकनीकी सप्लाई चेन पर बढ़ी अमेरिकी निगरानी
यह फैसला केवल टेलीकॉम उपकरणों तक सीमित नहीं है. अमेरिका अब ऐसे सभी स्मार्ट और नेटवर्क से जुड़े उपकरणों पर नजर रख रहा है, जो डेटा एकत्र करने, रिमोट ऐक्सेस देने या महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हों. माना जा रहा है कि आने वाले समय में राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर तकनीकी उत्पादों की जांच और भी सख्त हो सकती है.
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