सोशल मीडिया कभी उम्मीदों का समंदर था, लेकिन आज यह जहरीली नदी बन चुका है. जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) में मशहूर ब्रिटिश लेखक, अभिनेता और कॉमेडियन स्टीफन फ्राई ने सोशल मीडिया की हालत की तुलना ऐसी चीज से किया कि पूरा हॉल सन्न रह गया. उन्होंने कहा- “यह वही नदी है जिसमें कभी लोग तैरते थे, बातें करते थे, दोस्ती करते थे… लेकिन अब इसमें जहर घुल चुका है.”
शुरुआत में था जादू, अब है डर
फ्राई ने याद किया कि जब ट्विटर और फेसबुक जैसे प्लैटफॉर्म आये थे, तो उन्हें लगा था कि यह दुनिया बदल देंगे. अरब स्प्रिंग जैसी क्रांतियों में सोशल मीडिया ने लोगों को ताकत दी थी. लेकिन वही ताकत अब डर और नफरत में बदल चुकी है.
नदी का मेटाफॉर- बातचीत से प्रदूषण तक
फ्राई ने सोशल मीडिया को नदी से जोड़ा. शुरुआत में यह साफ पानी था- जिसमें लोग उतरकर मजे लेते थे. लेकिन जैसे औद्योगिक क्रांति ने लंदन की नदियों को गंदा कर दिया था, वैसे ही पूंजीवाद ने सोशल मीडिया को जहरीला बना दिया.
बच्चों को दूर रखो इस जहर से
उन्होंने चेतावनी दी कि अब यह नदी इतनी दूषित हो चुकी है कि कोई अपने बच्चों को इसमें तैरने नहीं देगा. फ्राई का कहना था कि यह प्लैटफॉर्म दिमाग को प्रदूषित कर रहे हैं और धीरे-धीरे इंसान की सोच को बिगाड़ रहे हैं.
मुनाफे की भूख ने बिगाड़ा खेल
फ्राई ने साफ कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों के लालच ने इस मंच को बर्बाद कर दिया. भारी मुनाफे की चाहत में “जहर” डाला जा रहा है. बातचीत की जगह अब एल्गोरिद्म और विज्ञापन हावी हैं.
बॉलीवुड पर मजेदार जवाब
सत्र के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भारतीय फिल्मों में काम करेंगे, तो उन्होंने हंसते हुए कहा- “हां, लेकिन मुझे गाते-नाचते हुए मत देखना, आप सह नहीं पाएंगे.” उनकी हाजिरजवाबी पर पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा.
यह भी पढ़ें: X ने मानी अपनी गलती, 3500 से ज्यादा कंटेंट किए ब्लॉक, 600 से अधिक अकाउंट डिलीट
