स्टेडियम में मैच देखते वक्त धोनी के कान में लगा ये छोटा-सा डिवाइस क्या है? जानें कैसे करता है काम

भारत-इंग्लैंड वनडे के दौरान स्टैंड्स में मौजूद एमएस धोनी के कान में एक छोटा-सा डिवाइस नजर आया. यह एक स्टेडियम रेडियो रिसीवर ईयरपीस है. इसकी मदद से फैंस लाइव मैच देखते हुए बॉल-बाय-बॉल कमेंट्री, एक्सपर्ट की राय और अहम अपडेट सुन सकते हैं.

भारत और इंग्लैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला खेला जा रहा है. इस मैच में महेंद्र सिंह धोनी भी स्टैंड्स में नजर आए. लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा उनकी मौजूदगी की नहीं, बल्कि उनके कान में लगे एक छोटे से ईयरपीस की हो रही है. मैच के दौरान धोनी इसे लगातार लगाए हुए दिखे. ऐसे में अगर आपके मन में भी ये सवाल उठ रहा है कि आखिर यह ईयरपीस क्या है और धोनी इसे क्यों पहने हुए थे, तो आइए इसका जवाब जानते हैं.

धोनी के कान में दिखा वो छोटा डिवाइस आखिर है क्या?

एमएस धोनी के कान में दिखने वाला यह छोटा-सा डिवाइस कोई नॉर्मल ईयरपीस नहीं, बल्कि एक मिनी स्टेडियम रेडियो रिसीवर है. इसकी मदद से स्टेडियम में बैठे लोग मैच देखते हुए लाइव बॉल-बाय-बॉल कमेंट्री भी सुन सकते हैं. यहां BBC Test Match Special और दूसरे बड़े कमेंट्री चैनल मैच की लाइव कमेंट्री सुनाते हैं. स्टेडियम में बैठे लोग इस छोटे से रेडियो डिवाइस को कान में लगाकर हर गेंद की कमेंट्री आसानी से सुन सकते हैं, जबकि सामने मैदान में मैच भी देखते रहते हैं.

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि फैंस को सिर्फ बड़ी स्क्रीन या स्टेडियम में होने वाली अनाउंसमेंट पर डिपेंड नहीं रहना पड़ता. वे मैच का रोमांच अपनी आंखों से देखने के साथ-साथ एक्सपर्ट्स की कमेंट्री, खिलाड़ियों से जुड़ी दिलचस्प जानकारी, रिप्ले में क्या हुआ इसकी जानकारी और हर गेंद की लाइव अपडेट भी सुन सकते हैं.

कैसे काम करता है ये ईयरपीस?

स्टेडियम में मिलने वाला यह खास रेडियो रिसीवर एक लोकल फ्रीक्वेंसी पर काम करता है, जो सिर्फ स्टेडियम और उसके आसपास ही उपलब्ध होती है. मैच शुरू होने से पहले फैंस इसे स्टेडियम से खरीद या किराए पर ले सकते हैं. इसके बाद बस रिसीवर को तय फ्रीक्वेंसी पर ट्यून करना होता है और ईयरपीस के जरिए बिना किसी रुकावट के लाइव कमेंट्री सुनाई देने लगती है. 

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि कमेंट्री और मैदान पर चल रहे एक्शन के बीच बहुत ही कम देरी होती है. इससे हर गेंद और हर पल का रोमांच लगभग उसी समय फील होता है. हालांकि, यह सुविधा सिर्फ स्टेडियम के आसपास तक ही सीमित रहती है. जैसे ही आप स्टेडियम से बाहर निकलते हैं, इसका सिग्नल मिलना बंद हो जाता है.

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Published by: Ankit Anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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