सरकार ने बनाया नया IT नियम: AI कंटेंट लेबल करना हुआ जरूरी, टेकडाउन का भी समय घटाया

10 फरवरी को MeitY ने Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Amendment Rules, 2026 की सूचना दी. इस नए नियम के तहत अब कानून की सीमा बढ़ा दी गई है और इसमें स्पष्ट तौर पर ‘सिंथेटिकली जनरेट की गई जानकारी’ यानी कंप्यूटर या AI से बनाई गई जानकारी भी शामिल कर दी गई है.

सरकार ने AI से बने कंटेंट के लिए नए नियम बना दिए हैं. नई सरकारी नियमों के मुताबिक अब सभी AI-जनित कंटेंट, जैसे कि डीपफेक वीडियो, सिंथेटिक ऑडियो या बदलवाले विजुअल्स, पर साफ-साफ लेबल लगाना जरूरी है. सरकार ने पहली बार इसे औपचारिक नियमों के तहत लाया है. इसे गजट नोटिफिकेशन G.S.R. 120(E) के जरिए जारी किया गया और जॉइंट Joint सेक्रेटरी अजीत कुमार ने साइन किया. ये नए नियम 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे.

मकसद साफ है. प्लेटफॉर्म्स को हर AI-जनरेटेड कंटेंट पर ऐसा लेबल लगाना होगा, जिसे यूजर तुरंत पहचान सके. साथ ही, कंटेंट में पर्सिस्टेंट मेटाडेटा और यूनिक आइडेंटिफायर भी डालना होगा, ताकि इसके सोर्स का पता चल सके. और एक बार लेबल लग जाने के बाद इसे बदलना, हटा देना या छुपाना मुमकिन नहीं होगा.

AI-जनरेटेड कंटेंट का क्या मतलब होगा?

सरकार अब पहली बार “सिंथेटिक रूप से बनाई गई जानकारी” यानी AI-जनरेटेड कंटेंट की आधिकारिक परिभाषा लेकर आई है. इसमें वो सब ऑडियो, वीडियो या ऑडियो-वीजुअल कंटेंट आता है जो कंप्यूटर की मदद से बनाया या बदल दिया गया हो और जो असली जैसा दिखे. जैसे किसी इंसान या घटना को असली लगने वाला तरीके से दिखाया गया हो.

लेकिन हर तरह का फिल्टर इस्तेमाल करना AI कंटेंट नहीं माना जाएगा. जैसे रंग ठीक करना, आवाज साफ करना, फाइल साइज कम करना या अनुवाद करना. अगर इनसे असली मतलब नहीं बदलता, तो ये इस परिभाषा में नहीं आते.

Instagram, YouTube और Facebook को अब कड़े नियमों का पालन करना होगा

भारी जिम्मेदारी अब बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Instagram, YouTube और Facebook पर है. नए Rule 4(1A) के तहत, किसी यूजर के पोस्ट अपलोड करने से पहले प्लेटफॉर्म को पूछना होगा: “क्या ये कंटेंट AI-generated है?” लेकिन बस यूजर से पूछ लेना ही काफी नहीं है. प्लेटफॉर्म्स को अपने ऑटोमेटेड टूल्स भी लगाना होंगे, जो कंटेंट के फॉर्मेट, सोर्स और नेचर को चेक करें, ताकि अपलोड होने से पहले सच में सही जानकारी मिल सके. अगर कंटेंट सिंथेटिक यानी AI-जनरेटेड पाया जाता है, तो उस पर साफ-साफ डिस्क्लोजर टैग लगाना जरूरी है.

पहले 36 घंटे थे, अब सिर्फ तीन घंटे

अब प्लेटफॉर्म्स को कुछ कानूनी आदेशों पर कार्रवाई करने के लिए सिर्फ तीन घंटे मिलेंगे. पहले ये समय 36 घंटे था. 15 दिन की समय सीमा अब सात दिन रह गई है. 24 घंटे का डेडलाइन अब 12 घंटे हो गया है.

नए नियम सीधे सिंथेटिक (कृत्रिम) कंटेंट और अपराध कानून से जोड़ते हैं. अगर ऐसा कंटेंट बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा, अश्लील, झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, विस्फोटक सामग्री या किसी की पहचान/आवाज का गलत रूप दिखाने वाला डिपफेक है, तो अब ये भारतीय न्याय संहिता, POCSO एक्ट और Explosive Substances Act के तहत आएगा.

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By Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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