Deepfake कंटेंट बनाने और उसे प्रसारित करने पर पेनल्टी का क्या होगा असर, जानें

मोदी सरकार ने विगत एक मार्च को सोशल मीडिया और अन्य प्लैटफॉर्म्स पर टेस्टिंग के अधीन चल रहे एआई मॉडल के बारे में साफ तौर पर बताने और गैरकानूनी सामग्री को रोकने के लिए एडवाइजरी जारी की थी.

Deepfake News: डीपफेक और गलत सूचना को रोकने के लिए दंडात्मक प्रावधान उपयोगकर्ताओं को हतोत्साहित कर सकते हैं. वैश्विक शोध संस्थान कट्स इंटरनेशनल ने कहा कि एआई-जनित सामग्री के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप की मदद लेनी चाहिए.

कट्स इंटरनेशनल के अनुसंधान निदेशक अमोल कुलकर्णी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को सामग्री की सच्चाई का पता लगाने के लिए पर्याप्त अवसर की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस तरह चुनावी मौसम में भरोसेमंद तथ्य जांचकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है.

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कुलकर्णी ने कहा कि हालांकि पारदर्शिता अच्छी है, लेकिन उपयोगकर्ताओं पर सूचना की बौछार उनके अनुभव की गुणवत्ता को कम कर सकती है. उन्होंने कहा कि डीपफेक और गलत सूचना की समस्या से निपटने में सही तकनीकी और जवाबदेही वाले समाधानों से मदद मिल सकती है.

सरकार ने एक मार्च को सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर परीक्षण के अधीन चल रहे एआई मॉडल के बारे में स्पष्ट रूप से बताने और गैरकानूनी सामग्री को रोकने के लिए एक परामर्श जारी किया था.

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