AI Robot Training: क्या आपने कभी सोचा है कि रोजमर्रा के घर के काम भी कमाई का जरिया बन सकते हैं? चेन्नई की 25 वर्षीय हाउसवाइफ नागिरेड्डी श्रीराम्यचंद्रा के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है. वह अपने सिर पर स्मार्टफोन लगाकर अपने दिनभर के घरेलू कामों की वीडियो रिकॉर्ड करती हैं. कॉफी बनाना, फल काटना, कपड़े तह करना या घर के दूसरे नॉर्मल काम को वह अपने नजरिए से कैमरे में कैद करती हैं. इसके बाद ये वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों को दिए जाते हैं.
कंपनियां इन वीडियो की मदद से ह्यूमनॉइड रोबोट्स को सिखाती हैं कि इंसान घर में चीजों का यूज कैसे करते हैं और रोजमर्रा के काम किस तरह करते हैं. यानी जिन कामों को हम नॉर्मल और सिंपल समझते हैं, वही अब भविष्य के स्मार्ट रोबोट्स को ट्रेन करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
देखें वीडियो
एक पोस्ट के मुताबिक, श्रीराम्याचंद्रा हर दिन 90 से ज्यादा छोटे-छोटे वीडियो रिकॉर्ड करती हैं और इसके बदले उन्हें करीब 250 रुपये प्रति घंटे की कमाई होती है. दिलचस्प बात यह है कि इन वीडियो में वह कोई खास काम नहीं करतीं, बल्कि रोजमर्रा के घरेलू कामकाज को कैमरे में रिकॉर्ड करती हैं. इस अनोखे काम के बारे में बात करते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “घर का काम करने के लिए भला और कौन 250 रुपये प्रति घंटा देगा?”
क्या है इगोसेंट्रिक डेटा और रोबोट्स को क्यों पड़ती है इसकी जरूरत?
AI चैटबॉट्स और इमेज जनरेटर्स को काम करने के लिए इंटरनेट पर मौजूद भारी मात्रा में डिजिटल डेटा की जरूरत होती है. लेकिन जब बात ऐसे रोबोट्स की आती है जो घरों, फैक्ट्रियों या ऑफिसों में इंसानों की तरह काम कर सकें, तो सिर्फ डिजिटल जानकारी काफी नहीं होती. उन्हें यह भी समझना पड़ता है कि लोग रोजमर्रा के काम कैसे करते हैं, चीजों को कैसे पकड़ते हैं और अपने आसपास की दुनिया के साथ कैसे इंटरैक्ट करते हैं. इसी कमी को दूर करने के लिए टेक कंपनियां अब ‘इगोसेंट्रिक डेटा’ का सहारा ले रही हैं. यानी ऐसे वीडियो जो किसी व्यक्ति की नजर से रिकॉर्ड किए जाते हैं. इससे रोबोट्स को इंसानी व्यवहार और गतिविधियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है.
AI ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होते हैं ये हाई-टेक डिवाइस
AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, इस काम में लगे लोग AI को ट्रेन करने के लिए कई तरह के हाई-टेक डिवाइस का यूज करते हैं. इनमें सिर पर पहनने वाले कैमरे, मोशन सेंसर और स्मार्ट ग्लासेज शामिल हैं. श्रीराम्याचंद्रा बताती हैं कि उनका रिकॉर्डिंग सिस्टम इतना एडवांस है कि अगर वीडियो में उनके हाथ ठीक से दिखाई नहीं देते, तो उन्हें तुरंत अलर्ट मिल जाता है. इसके बाद वह यह रिकॉर्ड की गई फुटेज एक खास ऐप के जरिए एक AI डेटा कंपनी को भेजती हैं, जिसके ऑफिस भारत और अमेरिका दोनों में हैं.
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