खास बातें
Suvendu Adhikari Wins Bhabanipur 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘जायंट किलर’ शुभेंदु अधिकारी ने वो करिश्मा कर दिखाया है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी. शुभेंदु ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके सबसे सुरक्षित गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर में भी पराजित कर दिया है. रात करीब 9:20 बजे आये अंतिम आंकड़ों के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 मतों के अंतर से करारी शिकस्त दी है. यह दूसरा मौका है, जब शुभेंदु ने दीदी को चुनावी मैदान में धूल चटायी है.
नंदीग्राम के बाद अब भवानीपुर फतह, शुभेंदु ने पूरा किया वादा
शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव की घोषणा से पहले ही खुले मंच से ममता बनर्जी को भवानीपुर में चुनौती देने का ऐलान किया था. शुभेंदु न केवल नंदीग्राम से दोबारा चुनाव जीते, बल्कि भवानीपुर में भी अपनी जीत का परचम लहराया. शुभेंदु के नामांकन में खुद गृह मंत्री अमित शाह पहुंचे थे. भवानीपुर में हुए रोड शो और अमित शाह की रैलियों ने जो माहौल बनाया, उसका असर नतीजों में साफ दिखा. ‘स्ट्रीट फाइटर’ ममता बनर्जी को उनके गढ़ में पराजित करके शुभेंदु ने साबित कर दिया है कि वह कोई कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं.
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चौथी बार सीएम बनने का ममता का सपना टूटा, नहीं टूटा ज्योति बसु का रिकॉर्ड
ममता बनर्जी इस चुनाव में लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद के साथ मैदान में उतरी थीं. लेकिन भवानीपुर की हार और भाजपा के प्रचंड बहुमत ने उनके इस सपने को तोड़ दिया है. पश्चिम बंगाल के इतिहास में अब भी ज्योति बसु ही एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो लगातार 5 बार मुख्यमंत्री बने थे. मुख्यमंत्री रहते वह कभी नहीं हारे. इसके पहले डॉ विधान चंद्र रॉय भी सीएम के पद पर रहते चुनाव नहीं हारे. ममता बनर्जी इस एलीट क्लब में शामिल होना चाहतीं थीं, लेकिन शुभेंदु ने उनके सपने को चकनाचूर कर दिया.
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हुमायूं कबीर और शुभेंदु 2026 के डबल विनर
इस चुनाव में 2 सीटों पर जीत दर्ज करने वाले दिग्गजों में 2 नेता शामिल हैं. भाजपा के शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों जगह से जीते. अपनी नयी पार्टी AJUP (आम जनता उन्नयन पार्टी) के टिकट पर 2 सीटों पर जीत हासिल कर हुमायूं कबीर ने भी बंगाल की राजनीति में अपनी ताकत का अहसास कराया.
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कोलकाता की सड़कों पर गूंज रहा जय श्रीराम
शुभेंदु अधिकारी की इस जीत ने न केवल ममता बनर्जी के अपराजेय होने के मिथक को तोड़ दिया है, बल्कि भाजपा के लिए बंगाल के मुख्यमंत्री की कुर्सी का रास्ता भी साफ कर दिया है. दक्षिण कोलकाता की सड़कों पर अब जय श्रीराम के नारों के साथ कमल की गूंज है.
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