मुकुल राय पर डोरे डाल रही तृणमूल कांग्रेस, ममता के करीबी रहे नेता को मनाने में जुटी भाजपा

बंगाल चुनाव में हार के बाद मुकुल राय भाजपा से दूर जा रहे हैं. भाजपा के शीर्ष नेता मनाने में जुटे हैं

By Prabhat Khabar Digital Desk | June 4, 2021 5:03 PM

कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी रहे मुकुल राय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद पंचायत चुनाव, लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में शानदार काम किया. खबर है कि पार्टी में उन्हें प्रदेश स्तर के शीर्ष नेता उपेक्षित कर रहे हैं. विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद वह भाजपा से दूरी बनाने लगे हैं. उनकी नाराजगी दूर करने में भाजपा के शीर्ष नेता जुट गये हैं.

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस भी उनके साथ सहानुभूति दिखाने में जुटी है. मुकुल राय की पत्नी की सेहत के बारे में जानने के लिए पहले टीएमसी के सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी अस्पताल गये. बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर उनका हालचाल जाना. पीएम मोदी के बाद बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मुकुल की पत्नी की सेहत का हाल जाना.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खुद फोन करने के बाद मुकुल राय को बंगाल विधानसभा में अहम जिम्मेदारी दिये जाने की चर्चा चल रही है. विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल की जीत के बाद ऐसा माना जा रहा था कि विधानसभा की लोक लेखा समिति (पीएसी) टीएमसी खुद अपने पास रखेगी, लेकिन इन अटकलों पर विराम लग गया है.

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तृणमूल कांग्रेस लोक लेखा समिति की जिम्मेदारी विपक्षी पार्टी भाजपा को देने जा रही है. कहा जा रहा है कि बीजेपी एमएलए और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय को कमेटी का चेयरमैन बनाया जा सकता है. लोक लेखा समिति का चेयरमैन प्रायः विपक्ष का ही एमएलए होता है.

सूत्रों के मुताबिक, सत्ताधारी दल ने भाजपा को इसकी जानकारी दे दी है. अगर लोक लेखा समिति के चेयरमैन के नाम की घोषणा बीजेपी करती है, तो विधानसभा में इसकी घोषणा की जायेगी. सूत्रों ने बताया कि भाजपा के एमएलए मुकुल राय को इसका चेयरमैन बनाया जा सकता है. हालांकि, अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है.


भाजपा को विधानसभा में मिलेंगी 10 समितियां

इस बार विधानसभा में 10 समितियों की प्रभारी भाजपा होगी. तृणमूल कांग्रेस की विधायक असीमा पात्रा होम स्टैंडिंग कमेटी की चेयरमैन होंगी. वर्ष 2016 के चुनाव में कांग्रेस और वाम गठबंधन ने 76 सीटों पर जीत हासिल की थी. उनके पास 18 समितियां थीं, लेकिन इस बार बीजेपी को अकेले 77 सीटें मिलीं, लेकिन 10 कमेटियां ही उनके हिस्से आने वाली हैं.

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Posted By: Mithilesh Jha

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