संताल इतिहास और शिक्षा पर राष्ट्रपति का जोर, बोलीं- कई नायकों को इतिहास में जगह नहीं मिली

President Droupadi Murmu in Darjeeling: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संताल समुदाय के इतिहास और पहचान पर बड़ा बयान दिया है. कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में संताल समुदाय का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा, लेकिन कई संताल नायकों के नाम इतिहास में दर्ज नहीं किये गये. दार्जिलिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन में राष्ट्रपति ने शिक्षा और भाषा के जरिये समुदाय के सशक्तिकरण पर जोर दिया.

President Droupadi Murmu in Darjeeling: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में संताल समुदाय का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन इस समुदाय के कई महान नायकों को इतिहास में वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसके वे हकदार थे.

सिलीगुड़ी में नौवां अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी स्थित बिधाननगर में आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति ने ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि संताल समाज की भूमिका और उसके संघर्षों को अधिक व्यापक रूप से सामने लाने की जरूरत है.

इतिहास में उपेक्षित रहे संताल नायक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि कई संताल महानायकों के नाम इतिहास में जान-बूझकर शामिल नहीं किये गये. ऐसे में समाज और नयी पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वे अपने इतिहास और विरासत को जानें और उसे आगे बढ़ायें.

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शिक्षा को बताया सशक्तिकरण का आधार

राष्ट्रपति ने संताल समाज से अपील की कि वे अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें. उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा से ही नयी पीढ़ी आत्मनिर्भर और मजबूत बन सकती है. इसलिए हर संताल बच्चे को गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा मिलनी चाहिए, ताकि वह समाज और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सके.

भाषा के साथ अवसरों का विस्तार

राष्ट्रपति ने संथाली भाषा और उसकी लिपि ओल चिकि का जिक्र करते हुए कहा कि यह समुदाय की पहचान और एकता का मजबूत प्रतीक है. उन्होंने कहा कि अवसरों का दायरा बढ़ाने के लिए संताल युवाओं को ओल चिकि के साथ अन्य भाषाएं भी सीखनी चाहिए. इससे शिक्षा, रोजगार और समाज के अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ने के नये रास्ते खुलेंगे.

ओल चिकि लिपि की विरासत

संताली भाषा के लिए ओल चिकि लिपि का आविष्कार वर्ष 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मू ने किया था. तब से यह लिपि संताल समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुकी है. आज ओल चिकि का इस्तेमाल दुनिया के कई हिस्सों में रहने वाले संताल समुदाय के लोग करते हैं. यह उनकी सामाजिक एकता को भी मजबूत बनाती है.

समाज के प्रति जिम्मेदारी का सवाल

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाया. कहा कि साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्मश्री जैसे सम्मान पाने वाले लोगों को यह भी सोचना चाहिए कि क्या वे इन सम्मानों की गरिमा बनाये रखने और समाज के लिए सार्थक योगदान देने के लिए पर्याप्त काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सम्मान केवल उपलब्धि का प्रतीक नहीं होते, समाज के प्रति जिम्मेदारी भी बढ़ाते हैं.

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By Mithilesh Jha

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